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नोएडा श्रमिक आंदोलन: माकपा का आरोप- पुलिस हिरासत में श्रमिकों से की गई मारपीट, फर्जी मामलों में फंसाया

पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 03 Jun 2026 04:51 PM IST
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सार

नोएडा में अप्रैल के श्रमिक आंदोलन के दौरान गिरफ्तार मजदूरों ने आरोप लगाया है कि पुलिस हिरासत में उनके साथ मारपीट हुई और फर्जी सबूतों के आधार पर उन्हें फंसाया गया। जमानत पर रिहा हुए श्रमिकों से मुलाकात के बाद माकपा ने कहा कि यह मजदूरों के अधिकारों पर हमला है और वह उन्हें कानूनी व राजनीतिक मदद देती रहेगी। पढ़िए रिपोर्ट-

CPI(M) alleges custodial assault, false cases against Noida workers
नोएडा में वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार

नोएडा में अप्रैल में हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए श्रमिकों ने आरोप लगाया है कि पुलिस हिरासत में उनके साथ मारपीट की गई। फर्जी सबूतों के आधार पर उन्हें फंसाया गया। उनके आंदोलन को दबाने के लिए उन्हें कई मामलों में आरोपी बनाया गया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने बुधवार को यह दावा किया। पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में जमानत पर रिहा हुए मजदूरों से मिला, जो करीब एक महीने से जेल में थे। 


माकपा प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल थे?
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व माकपा के महासचिव एमए बेबी ने किया। इसमें पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य आर. अरुण कुमार और तपन सेन, राज्यसभा सांसद वी. शिवदासन तथा अन्य नेता शामिल थे।
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प्रतिनिधिमंडल ने फैब्रैक्ट क्लोदिंग कंपनी के श्रमिकों से भी मुलाकात की। इनमें से करीब 50 कर्मचारियों ने अप्रैल के विरोध के बाद मजदूर आंदोलन से जुड़ना शुरू किया था। इसी तरह विब्राकोस्टिक इंडिया के श्रमिक प्रतिनिधियों ने भी माकपा नेताओं से मुलाकात की और आरोप लगाया कि प्रबंधन मजदूर संगठन बनाने से रोकता है और नेतृत्व करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया जाता है।
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माकपा ने क्या आरोप लगाए?
मुलाकात के बाद एमए बेबी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर पुलिस हिंसा और फर्जी मामलों में फंसाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि जेल में बंद श्रमिकों से मिलने के लिए प्रतिनिधिमंडल को अनुमति नहीं दी गई। बेबी ने कहा, पिछले कई दिनों से हम अपने सांसद वी. शिवदासन के जरिये जेल में बंद श्रमिकों से मिलने की अनुमति मांग रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने बताया कि उच्च स्तर पर इसे मंजूरी नहीं दी गई। 

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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ कैदियों को जमानत याचिका दायर करने और पर्याप्त कानूनी सहायता पाने में दिक्कतें आ रही हैं, जो उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। माकपा ने कहा कि वह श्रमिकों को कानूनी सहायता और राजनीतिक समर्थन देना जारी रखेगी। पार्टी ने यह भी कहा कि गिरफ्तारियां, नौकरी से निकाले जाना और मजदूरों पर लगाए गए प्रतिबंध मजदूरों के अधिकारों पर लगातार हो रहे हमलों को दिखाते हैं, लेकिन मजदूरों की एकता ही इसका सबसे मजबूत जवाब है।
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