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भेदभाव!: वीआईपी कवच देने वाली CRPF के जांबाजों को नहीं मिलता स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस, एसपीजी को मिल रहा 55 फीसदी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 22 Jun 2022 06:23 PM IST
सार

बल के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सिक्योरिटी विंग में कार्यरत जांबाजों का भत्ता बढ़ाया जाना चाहिए। अगर यहां उन्हें कोई प्रोत्साहन नहीं मिलेगा, तो नए कमांडो का वीआईपी ड्यूटी में आने के लिए उत्साह खत्म हो जाएगा। केंद्र सरकार को 'वीआईपी' ड्यूटी में तैनात जवानों और अफसरों को उनके मूल वेतन का 40 फीसदी 'स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस' मिलना चाहिए

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CRPF commando who gave VIP security are not getting special security allowance as compared to SPG is getting 55 percent
सीआरपीएफ - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

सीआरपीएफ की सिक्योरिटी विंग, देश में सर्वाधिक वीआईपी (लगभग 120) को सुरक्षा मुहैया करा रही है। अति विशिष्ट लोगों की सुरक्षा में लगे सीआरपीएफ कमांडो बहादुरी के कई कारनामों में दुनिया भर में सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। विश्व की सबसे विशिष्ट फोर्स 'कोबरा' यानी (कमांडो बटालियन फॉर रिसोल्यूट एक्शन) विंग से अनेक कमांडो 'जेड प्लस' व अन्य सुरक्षा श्रेणी में आते रहते हैं। तीन साल पहले तक स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी एसपीजी के दायरे में रहे पांच वीआईपी को भी अब सीआरपीएफ सुरक्षा मिली हुई है। इसके बावजूद सीआरपीएफ के जांबाजों को 'स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस' नहीं दिया जा रहा। सूत्रों का कहना है, इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय को फाइल भेजी गई थी, लेकिन वहां से उसे बिना किसी स्वीकृति के वापस लौटा दिया गया है। दूसरी तरफ, एसपीजी को 55 फीसदी 'स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस' मिल रहा है।

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गृह मंत्रालय ने वापस लौटा दी भत्तों की फाइल

सूत्रों का कहना है, सीआरपीएफ सुरक्षा वाले वीआईपी देश के हर हिस्से में मिल जाएंगे। इन्हें अभी केवल मूल वेतन दिया जा रहा है। 'स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस' को लेकर कई बार मांग उठी है, लेकिन उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पिछले दिनों, केंद्रीय गृह मंत्रालय को जो प्रपोजल भेजा गया था, उसमें सीआरपीएफ सिक्योरिटी विंग के उन अधिकारियों और जवानों को उनके मूल वेतन का 40 फीसदी 'स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस' देने की मांग की गई थी। हालांकि बाद में यह भी कहा गया कि जो अधिकारी या जवान वीआईपी ड्यूटी पर हैं, उन्हें 40 फीसदी और जो दफ्तर में कार्यरत हैं, उन्हें बीस फीसदी भत्ता दे दिया जाए। एसपीजी में तैनात कर्मियों को 'स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस', उनके मूल वेतन का 55 प्रतिशत तक मिलता है।

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भत्ता बढ़ता है तो नए कमांडो सिक्योरिटी विंग में आएंगे

बल के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि सिक्योरिटी विंग में कार्यरत जांबाजों का भत्ता बढ़ाया जाना चाहिए। अगर यहां उन्हें कोई प्रोत्साहन नहीं मिलेगा, तो नए कमांडो का वीआईपी ड्यूटी में आने के लिए उत्साह खत्म हो जाएगा। केंद्र सरकार को 'वीआईपी' ड्यूटी में तैनात जवानों और अफसरों को उनके मूल वेतन का 40 फीसदी 'स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस' मिलना चाहिए। इसके लिए दोबारा से केंद्रीय गृह मंत्रालय से आग्रह किया जाएगा। सीआरपीएफ कमांडो को कोई खास टीए/डीए भी नहीं मिलता। यह भत्ता मुश्किल से तीन चार हजार रुपये तक सिमट जाता है। जोखिम वाले इलाकों में तैनात बल के जवानों को रिस्क अलाउंस भी मिलता है। अगर सीआरपीएफ की वीआईपी सुरक्षा विंग को 'स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस' दिया जाता है, तो बल के अन्य कमांडो भी इस ओर आने के लिए प्रेरित होंगे।

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सीआरपीएफ सुरक्षा कवच वाले प्रमुख वीआईपी  

  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
  • भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा
  • केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी
  • पूर्व पीएम डा. मनमोहन सिंह एवं उनकी पत्नी
  • लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला
  • कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी
  • लोकसभा सांसद राहुल गांधी
  • कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी
  • एनडीए की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू
  • उद्योगपति मुकेश अंबानी
  • असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा
  • स्वामी रामदेव
  • पूर्व आईपीएस के.विजय कुमार
  • जस्टिस सुधीर अग्रवाल
  • जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा
  • पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई
  • राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा
  • राज्यसभा सांसद सुब्रमणयम स्वामी
  • पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़
  • सांसद असदुद्दीन ओवैसी

सीआरपीएफ कमांडो की खासियत

देश में मौजूदा समय में 18 अति विशिष्ट लोगों को सीआरपीएफ द्वारा जेड प्लस सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है। इसके अलावा एक्स, वाई, वाई प्लस और जेड श्रेणी के तहत भी अनेक लोगों को बल की सुरक्षा प्रदान की गई है। साल 2015 में गणतंत्र दिवस की परेड में पहली बार सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो राष्ट्र के सामने आए थे। कोबरा यूनिट का गठन करने से पहले यूएस मरिन कमांडो, उनकी ट्रेनिंग, वर्किंग स्टाइल, सर्जिकल स्ट्राइक और दूसरे कई तरह के ऑपरेशन की जानकारी ली गई। इन सबके बाद ही कोबरा यूनिट स्थापित हुई थी। यह विशिष्ट कमांडो फोर्स जंगल में बिना किसी मदद के 11 दिनों तक लड़ सकती है। इसी वजह से कोबरा विश्व में पहले स्थान पर है।

कमांडो को दी जा रही है इस तरह की ट्रेनिंग

नक्सलियों, आतंकियों से लड़ने, वीवीआईपी सुरक्षा और दूसरे बड़े ऑपरेशनों के लिए इस विशिष्ट फोर्स को खास तरह की ट्रेनिंग दी गई है। हथियार, वर्दी एवं तकनीकी उपकरणों के मामले में भी 'कोबरा' दूसरे सभी बलों से पूरी तरह अलग हैं। बिना किसी मदद के लगातार डेढ़ सप्ताह तक जंगलों में लड़ते रहना इस फोर्स की खासियत है। अमेरिकी मरीन कमांडो बिना किसी मदद के जंगल में लगातार तीन रातों तक लड़ सकते हैं, लेकिन सीआरपीएफ के हर कोबरा कमांडो के लिए ट्रेनिंग के दौरान सात दिन तक जंगल में लड़ने की परीक्षा पास करना अनिवार्य है। कई साल पहले कोबरा ने सारंडा (झारखंड) के घने जंगलों में 11 दिनों तक बिना किसी सहायता के एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया था। वजन लेकर घने जंगल में नियमित रूप से लड़ते रहने का रिकॉर्ड ब्रिटेन के विशिष्ट कमांडो दस्ते 'एसएएस' के नाम पर है। यह दस्ता 30 किलो वजन उठाकर दस रातें जंगल में गुजार सकता है, जबकि कोबरा 23 किलो वजन के साथ 11 रातों तक गहन जंगल से गुजरने में समर्थ हैं।

सीआरपीएफ कमांडो को मिलते हैं ये हथियार

यूएस मरीन कमांडो की तर्ज पर सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो को भी मरपट (मरिन पैटर्न) वर्दी मिलती है। यानी इसमें सभी तरह के तकनीकी उपकरण लगे होते हैं। वीवीआईपी सुरक्षा और विभिन्न ऑपरेशन करने में निपुण कोबरा कमांडो को यूएस आर्मी जैसा पैसजट (पर्सनल आर्मर सिस्टम-ग्राउंड ट्रूप्स) हेलमेट, यूएस के एम-1 हेलमेट और जर्मन आर्मी के ‘स्टेहेलम’ हेलमेट मुहैया कराए जाते हैं। ये कमांडो इस्राइल निर्मित एमटीएआर व एक्स-95 राइफल जैसे अत्याधुनिक हथियारों से लैस रहते हैं। कमांडो के पास जीपीएस के अलावा नाइट विजन वाला चश्मा भी होता है। अब इन्हें जैमर और बुलेट प्रूफ तकनीक मुहैया करा दी गई है। वीवीआईपी सुरक्षा में तैनात होने वाले जवानों को नोएडा में ट्रेनिंग दी जाती है। दो माह की प्री-इंडक्शन ट्रेनिंग में जवानों को वीवीआईपी सुरक्षा, भवनों या किसी विशेष स्पॉट की हिफाजत से संबंधित हर बारीकि से अवगत कराया जाता है। इस दौरान जवानों को कई तरह की परीक्षा पास करनी होती हैं। उसके बाद ही उन्हें वीवीआईपी सुरक्षा यूनिट का हिस्सा बनाया जाता है। सीआरपीएफ जवानों की खासियत है कि ये किसी भी परिस्थिति में काम कर सकते हैं।

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