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CRPF Group Centre Crime: 10 वर्षीय बच्ची के साथ बर्बरता, वेंटीलेटर पर बच्ची, सिपाही अनवर-पत्नी खातून पर एफआईआर
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अपराध (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : अमर उजाला
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देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के नोएडा स्थित ग्रुप केंद्र पर एक दस वर्षीय बच्ची के साथ बर्बरता करने का मामला सामने आया है। सीआरपीएफ के आरोपी सिपाही तारिक अनवर और उनकी पत्नी रिम्पा खातून के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि इस मामले में एफआईआर कराने में देरी की गई है। बच्ची को बुरी तरह से टॉर्चर किया गया था। पहले उसे 15 जनवरी को सर्वोदय अस्पताल में भर्ती कराया गया। जब वहां पर डॉक्टरों ने बच्ची की जांच की तो वे हैरान रह गए। बच्ची के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे। कई जगह पर घाव बने हुए थे।अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को उसी दिन इस मामले की सूचना दी, लेकिन एफआईआर 18 जनवरी को दर्ज की गई है।
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तारीक अनवर और रिम्पा खातून ने बच्ची के साथ बर्बरता की
एफआईआर के मुताबिक, सिपाही जीडी तारीक अनवर और उसकी पत्नी रिम्पा खातून ब्लॉक संख्या 60, क्वार्टर नंबर 13 सीआरपीएफ कैंप, गौतम बुद्ध में रह रहे हैं। पीड़ित बच्ची, तारीक की पत्नी की भांजी है। बच्ची को सीआरपीएफ कैंपस में रखने के लिए तारीक द्वारा अनुमति नहीं ली गई थी। तारीक अनवर और रिम्पा खातून ने बच्ची के साथ बर्बरता की। बच्ची के सिर, सीने और दूसरे अंगों में गंभीर चोट लगी है। शुरु में तो वह बच्ची सर्वोदय अस्पताल बिसरख में भर्ती रही। फिलहाल वह बच्ची सेक्टर 28 के मैक्स अस्पताल में वैंटीलेटर पर है। एफआईआर के मुताबिक, यह घटना 14 और 15 जनवरी की रात की है। तारीक अनवर ने इस बाबत अपने अधिकारियों को संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
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शारीरिक यातनाएं देते थे... आंखों के नीचे काले धब्बे और पैरों में सूजन
पुलिस एफआईआर में लिखा है कि बच्ची को मरणासन्न अवस्था में ले जाने के लिए तारीक और उसकी पत्नी खातून जिम्मेदार हैं। 15 जनवरी को अस्पताल की डिस्चार्ज स्लिप, बर्बरता को खुद ब खुद बयान कर रही है। डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि बच्ची की हालत बहुत खराब है। उसके विभिन्न अंगों पर चोट आई है। बच्ची को भूखा रखा गया है। तारीक और उसकी पत्नी खातून, इस बच्ची से घरेलू काम कराते थे। उसे समय पर खाना नहीं देते थे। अगर बच्ची ठीक से काम नहीं कर पाती तो वे उसे शारीरिक यातनाएं देते थे। बच्ची का हीमोग्लोबिन महज 1.9 बताया गया है। उसकी आंखों के नीचे काले धब्बे थे और पैरों में सूजन थी। उसे गहरे घाव और बेहोशी की हालत में अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में लाया गया था। आरोप है कि तारीक ने बच्ची को प्रारंभिक उपचार के लिए सीआरपीएफ अस्पताल में भर्ती नहीं कराया। जब हालत ज्यादा बिगड़ी तो उसे मैक्स में भर्ती कराया गया।
चिकित्सा रिपोर्ट का विश्लेषण
इस मामले में सीआरपीएफ के शीर्ष नेतृत्व ने जरुरी कार्रवाई की है। चिकित्सा रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद ऐक्शन लिया गया है। सभी कार्मिक यह सुनिश्चित करें कि सीआरपीएफ के आवासीय परिसरों में कोई अनैतिक या आपराधिक कृत्य न हो। आवासीय परिसरों को वहां रहने वालों के लिए सुरक्षित स्थान माना जाना चाहिए। वरिष्ठ पर्यवेक्षक अधिकारी, इस बात का स्वयं अनुपालन सुनिश्चित करेंगे।
कॉन्स्टेबल को निलंबित किया गया
सीआरपीएफ प्रवक्ता एम. दिनाकरण के मुताबिक, कांस्टेबल (जीडी) तारिक अनवर जनवरी 2024 से नोएडा स्थित 235 बटालियन में तैनात है। वह सीआरपीएफ नोएडा अस्पताल में प्राथमिक उपचारकर्ता के रूप में कार्यरत हैं। तारिक के साथ उनका परिवार भी सीआरपीएफ नोएडा शिविर में रहते हैं। नोएडा पुलिस से सर्वोदय अस्पताल में बच्ची के भर्ती होने की सूचना मिलने पर, वरिष्ठ अधिकारियों और एक टीम को मामले की जानकारी जुटाने के लिए भेजा गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए उक्त कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है। प्रक्रिया के अनुसार केस की जांच शुरू कर दी गई है। अस्पताल से प्रारंभिक चिकित्सा रिपोर्ट प्राप्त होने पर, इकाई द्वारा 17.01.2026 को पुलिस स्टेशन इकोटेक में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर तारिक अनवर और उनकी पत्नी को पुलिस ने 18.06.2026 को गिरफ्तार कर लिया है। सीआरपीएफ, इस जांच में पुलिस को हर संभव सहायता प्रदान करेगी। बच्ची के उपचार में पूर्ण सहयोग देगी।