Defence Prep: भारत में छठी पीढ़ी की उड़ान की तैयारी! फ्रांस से बातचीत शुरू, संसदीय समिति में क्या चर्चा हुई?
छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की दौड़ में भारत ने भी कदम बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस की अगुवाई वाले फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम कार्यक्रम से जुड़ने के प्रयास तेज किए हैं। संसदीय समिति ने भी वायुसेना की भविष्य की जरूरतों को देखते हुए छठी पीढ़ी के विमानों की खरीद का रोडमैप मांगा है। क्या भारत जल्द ही इस वैश्विक रक्षा परियोजना का हिस्सा बनेगा? क्या AMCA के साथ वायुसेना की ताकत को नई ऊंचाई मिलेगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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विस्तार
भारत छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान का विकास करने के लिए फ्रांस की अगुवाई वाले फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। यह जानकारी रक्षा मंत्रालय ने संसद की स्थायी समिति को दी है। गौरतलब है कि अमर उजाला ने मार्च में ही यह लिखा था कि भारत छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास के लिए यूरोप के दो बड़े अंतरराष्ट्रीय समूहों में से किसी एक का हिस्सा बन सकता है।
रक्षा मंत्रालय ने क्या कहा?
रक्षा मंत्रालय ने संसद की स्थायी समिति को सौंपी अपनी हालिया रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि सरकार ने छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकास कार्यक्रम फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम से जुड़ने के लिए ठोस प्रयास शुरू कर दिए हैं। यह रिपोर्ट 2026-27 के लिए रक्षा अनुदान की मांगों पर आधारित है। दुनिया में फिलहाल छठी पीढ़ी के विमानों को विकसित करने के लिए दो प्रमुख समूह काम कर रहे हैं। पहला समूह ब्रिटेन, इटली और जापान का है जो ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम पर काम कर रहा है, जबकि दूसरा समूह फ्रांस और जर्मनी का है। भारत अब इन विकल्पों को परखते हुए फ्रांस के साथ साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
क्या AMCA का डिजाइन तैयार हो चुका है?
रिपोर्ट में कहा गया है कि एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) का डिजाइन तैयार हो चुका है और इसके निर्माण को लेकर बातचीत फिलहाल जारी है। समिति ने कहा कि विमान की तकनीकी क्षमता में सुधार वायुसेना की लड़ाकू क्षमता बढ़ाने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। रक्षा मंत्रालय ने समिति को बताया है कि उसने फ्रांस सरकार की अगुवाई वाले फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) के छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकास कार्यक्रम से जुड़ने के लिए समन्वित तरीके से प्रयास शुरू कर दिए हैं।
समिति ने छठी पीढ़ी के विमानों के विकास और अधिग्रहण की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट मांगी है। साथ ही, ऐसे विमानों की खरीद के लिए तैयार किए गए रोडमैप और संभावित समयसीमा की जानकारी भी मांगी गई है। समिति ने कहा कि AMCA के विकास और निर्माण की स्थिति पर भी विस्तृत रिपोर्ट कार्रवाई संबंधी बयान के साथ उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि समिति उसकी समीक्षा कर सके।
क्या ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा तैयारियों पर और जोर दिया गया है?
समिति ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा में सेना की निर्णायक भूमिका की सराहना की और रक्षा तैयारियों में लगातार निवेश की जरूरत पर जोर दिया। समिति ने कहा कि भविष्य के बजट में अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों को शामिल करने और जरूरी बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि भारतीय सेना की तेजी को बनाए रखा और और मजबूत किया जा सके।
क्या रक्षा बजट पड़ोसी देशों के खर्च के हिसाब से बढ़ना चाहिए?
समिति ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत का खर्च उसके पड़ोसी देशों के रक्षा खर्च में बढ़ोतरी के अनुपात में होना चाहिए। इसके अनुसार, भारतीय सेना का पूंजीगत बजट इतना पर्याप्त होना चाहिए कि किसी भी संभावित संघर्ष की स्थिति में विरोधियों को रोकने की क्षमता बनी रहे।
मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर समिति ने कहा कि रक्षा सेवा अनुमानों (DSE) में वायुसेना के राजस्व बजट की हिस्सेदारी में स्पष्ट बढ़ोतरी हुई है। यह हिस्सेदारी 2021-22 में 8.83 प्रतिशत से बढ़कर 2026-27 में 10.80 प्रतिशत हो गई है।
क्या वायुसेना के बजट की हिस्सेदारी और बढ़ाने की जरूरत है?
समिति ने मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों और तेजी से वायु-केंद्रित हो रहे युद्ध को देखते हुए कहा कि DSE बजट में भारतीय वायुसेना की कुल हिस्सेदारी को और बढ़ाने की जरूरत है। इससे वायुसेना को मजबूत करने और देश को युद्ध के लिए तैयार रखने में मदद मिलेगी।
समिति के अनुसार, रक्षा क्षेत्र में धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं। क्षमता की कमी को दूर करने और भारत में निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) पर काम किया जा रहा है। इसके अलावा लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) कार्यक्रम भी जारी है।
क्या LCA MK-II और AMCA अभी डिजाइन एवं विकास चरण में हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक LCA MK-II और AMCA फिलहाल डिजाइन एवं विकास (D&D) चरण में हैं। समिति ने कहा कि युद्ध में इस्तेमाल होने वाली तकनीक में एक बड़ा बदलाव आया है। समिति ने कहा कि युद्ध तकनीक में आए बदलाव को देखते हुए भारतीय वायुसेना को नियर-स्पेस ऑपरेशन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन और समर्थन दिया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष क्षमता के क्षेत्र में भारत को अन्य वैश्विक शक्तियों के बराबर मजबूती से खड़ा करना है।
नौसेना के आधुनिकीकरण के लिए कितना बजट आवंटित हुआ?
सरकार ने समिति को बताया कि प्रमुख नई परियोजनाओं में 26 राफेल-एम विमानों का अनुबंध, MH-60R हेलीकॉप्टरों के लिए फॉलो-ऑन सपोर्ट/सप्लाई और स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों के लिए हेवीवेट टॉरपीडो शामिल हैं।
समिति के अनुसार, आधुनिकीकरण बजट में भारतीय नौसेना को 47,748.31 करोड़ रुपये (73.57 प्रतिशत) प्रतिबद्ध देनदारियों के लिए और 17,146.28 करोड़ रुपये (26.43 प्रतिशत) नई योजनाओं के लिए आवंटित किए गए हैं।