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Jharkhand Protests: जंतर मंतर से कितना अलग है झारखंड का प्रदर्शन; पूर्व DGP ने लाठीचार्ज को क्यों बताया सही?

Sun, 09 Aug 2026 08:07 AM IST
प्रशांत तिवारी एएनआई, सूरत
एएनआई, सूरत Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 09 Aug 2026 08:07 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश के पूर्व DGP विक्रम सिंह ने सूरत में जंतर-मंतर के प्रदर्शन और झारखंड के छात्र आंदोलन की तुलना करते हुए शांतिपूर्ण विरोध की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन आंदोलन के दौरान हिंसा या कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती। 

 

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How does protest in Jharkhand differ from one at Jantar Mantar Why ex DGP Vikram Singh justify lathi charge
पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन को लेकर गुजरात के सूरत में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों का अधिकार बताया, लेकिन प्रदर्शन के दौरान हिंसा और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर सवाल उठाए। विक्रम सिंह ने झारखंड के युवाओं के आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां युवाओं ने गरिमा और मर्यादा के साथ शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि अगर जंतर-मंतर पर भी इसी तरह शांतिपूर्ण तरीके से विरोध किया गया होता, तो स्थिति अलग होती।

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जंतर-मंतर की घटना पर पूर्व DGP ने क्या कहा?
जंतर-मंतर की घटना का जिक्र करते हुए विक्रम सिंह ने कहा, 'आपको देश के चुने हुए प्रधानमंत्री के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने का अधिकार किसने दिया? यह किस तरह का शांतिपूर्ण विरोध है, जिसमें दिल्ली पुलिस के 150 जवान-जिनमें वरिष्ठ अधिकारी, स्पेशल कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर, ACP, DCP और महिला अधिकारी शामिल हैं, गंभीर रूप से घायल हुए? इनमें कुछ पुलिसकर्मियों के सिर और कमर की हड्डियां तक टूट गईं।'
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क्या पेलेट गन का इस्तेमाल सही?
उन्होंने आगे कहा, 'इसके अलावा, आपको संसद तक जाने की अनुमति नहीं थी। यह शांतिपूर्ण विरोध नहीं था। अगर आप संसद भवन तक मार्च करेंगे, तो क्या पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं होगा? निश्चित रूप से होगा और जहां भी जरूरी होगा, वहां बल का प्रयोग किया जाएगा।'
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क्या झारखंड के युवाओं ने विरोध के दौरान मर्यादा रखी?
पूर्व DGP विक्रम सिंह ने झारखंड में हुए छात्र आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा, 'झारखंड को देखिए क्या वहां के युवाओं ने कभी ऐसी कार्रवाई का कोई कारण दिया है?'

छात्रों की जायज मांगों पर तुरंत कार्रवाई क्यों जरूरी है?
उन्होंने कहा, 'हालात कभी ऐसे नहीं होने चाहिए कि आंदोलन की नौबत आए। इंटेलिजेंस नेटवर्क इतना मजबूत होना चाहिए कि अगर कोई जायज शिकायत हो, तो उसका समाधान पहले ही हो जाए। अगर आप समय सीमा से पहले नतीजे देते हैं और उम्मीदों से बेहतर काम करते हैं, तो विरोध या धरने का कोई मौका या वजह ही नहीं होगी। छात्रों को भी इनका सहारा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।' विक्रम सिंह ने कहा, 'हालांकि, अगर ऐसी स्थिति पैदा होती है, तो छात्रों की उचित और जायज मांगों को तुरंत पूरा किया जाना चाहिए। यह हमारे युवाओं को गलत तत्वों द्वारा गुमराह किए जाने से बचाने के लिए बेहद जरूरी है।'


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क्या गलत तत्व छात्रों के आंदोलनों का फायदा उठाते हैं?
पूर्व DGP ने कहा, 'गलत और आपराधिक तत्वों ने हमारे छात्रों को पूरी तरह से अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की है। वे जंतर-मंतर पर काफी हद तक सफल रहे, हालांकि झारखंड में वे नाकाम रहे।'

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