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दिल्ली में ट्रेन-मेट्रो सेवाएं बंद होने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: सीजेआई बोले- मक्खी मारने के लिए हथौड़ा न चलाएं
Fri, 09 Oct 2026 03:32 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 09 Oct 2026 03:32 PM IST
सार
दिल्ली में 10 अक्तूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने के प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। वकीलों ने दलील दी कि प्रदर्शन की आशंका के चलते पूरे शहर को बंद नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रतिबंध लगाने से पहले सभी पक्षों को सुनना जरूरी है।
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सीजेआई सूर्यकांत
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
दिल्ली में 10 अक्तूबर को होने वाले प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशन बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने के प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि 10 अक्टूबर को होने वाले विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर दिल्ली के लिए ट्रेन सेवाएं पूरी तरह बंद न की जाएं और दिल्ली मेट्रो स्टेशनों को बंद न किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सेवाओं को नियंत्रित तरीके से जारी रखने को कहा कि ताकि आम जनता को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर 10 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। दरअसल, सीईसी के खिलाफ सीजेपी और कुछ छात्र संगठनों ने प्रदर्शन का एलान किया है। शुक्रवार को सीपीआई (एम) के महासचिव एमए बेबी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में यह मुद्दा उठाया।
'मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल न करें'
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान आनुपातिकता के सिद्धांत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी समस्या को रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदम जरूरत के हिसाब से होने चाहिए। उन्होंने कहा, "हर नागरिक के लिए हम जिस एक बहुत महत्वपूर्ण सिद्धांत का पालन करते हैं, वह आनुपातिकता का सिद्धांत है। आपको कुछ चीजों को रोकना है। उन्हें रोकने के लिए उतने ही कदम उठाएं, जितने जरूरी हों। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल किया जाए। इस सिद्धांत को ध्यान में रखना होगा।"
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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अदालत की इस टिप्पणी को इस तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए कि मुख्य न्यायाधीश ने सरकार पर मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह बात उदाहरण के तौर पर कही है।
क्या जंतर-मंतर की जगह कहीं और होगा सीजेपी का प्रदर्शन?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल बनाए रखने के फैसले पर पुनर्विचार करे और किसी अन्य स्थान को प्रदर्शन स्थल के रूप में निर्धारित करने पर उचित निर्णय ले। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ को बताया कि सक्षम प्राधिकारी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर के अलावा किसी अन्य स्थान को निर्धारित करने पर विचार करेगा। सॉलिसिटर जनरल के इस आश्वासन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया।
अदालत के आदेश में कहा गया, "सभी पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि अब समय आ गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के लिए आवश्यक सुविधाओं से युक्त किसी अन्य स्थान की पहचान कर उसे निर्धारित किया जाए। सक्षम प्राधिकारी इस सुझाव पर विचार करे और उचित निर्णय ले।" अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि संशोधित पाबंदियों और संबंधित परामर्शों का समाचार पत्रों, आधिकारिक वेबसाइटों और अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इससे यात्रियों को बैरिकेडिंग, प्रतिबंधों और वैकल्पिक मार्गों की जानकारी मिल सकेगी।
कपिल सिब्बल ने दी क्या दलील?
कपिल सिब्बल ने बताया कि उनकी जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने का आदेश है। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और प्रशांत भूषण ने भी इस मामले में अदालत से दखल देने की मांग की। उन्होंने कहा कि पूरे शहर में बैरिकेडिंग की जा रही है और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर पूरी दिल्ली को बंद नहीं किया जा सकता। वकीलों ने कहा कि नागरिकों को विरोध प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सभी पक्षों को सुनना जरूरी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि किसी भी तरह का प्रतिबंध लगाने से पहले सभी पक्षों को सुनना जरूरी है। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि अगर प्रदर्शन की अनुमति नहीं ली गई है, तो यह कानून के अनुरूप नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ऐसा प्रदर्शन असांविधानिक है।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के आयोजकों से पूछा जा सकता है कि इसमें कितने लोग शामिल होंगे। प्रदर्शनकारियों को बिना हथियार के रहने और प्रशासन को प्रदर्शन को नियंत्रित करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, प्रशांत भूषण, वृंदा ग्रोवर और गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि वे मेट्रो स्टेशन बंद करने, सड़कों को रोकने और बैरिकेडिंग के खिलाफ उचित याचिका लेकर फिर अदालत आएंगे।
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विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर 10 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद करने पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। दरअसल, सीईसी के खिलाफ सीजेपी और कुछ छात्र संगठनों ने प्रदर्शन का एलान किया है। शुक्रवार को सीपीआई (एम) के महासचिव एमए बेबी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में यह मुद्दा उठाया।
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'मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल न करें'
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान आनुपातिकता के सिद्धांत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी समस्या को रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदम जरूरत के हिसाब से होने चाहिए। उन्होंने कहा, "हर नागरिक के लिए हम जिस एक बहुत महत्वपूर्ण सिद्धांत का पालन करते हैं, वह आनुपातिकता का सिद्धांत है। आपको कुछ चीजों को रोकना है। उन्हें रोकने के लिए उतने ही कदम उठाएं, जितने जरूरी हों। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल किया जाए। इस सिद्धांत को ध्यान में रखना होगा।"
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News Alert! One should not use hammer to kill fly, says SC on closure of Delhi metro stations on Oct 10 due to CJP protest.
— Press Trust of India (@PTI_News) October 9, 2026
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अदालत की इस टिप्पणी को इस तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए कि मुख्य न्यायाधीश ने सरकार पर मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह बात उदाहरण के तौर पर कही है।
क्या जंतर-मंतर की जगह कहीं और होगा सीजेपी का प्रदर्शन?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल बनाए रखने के फैसले पर पुनर्विचार करे और किसी अन्य स्थान को प्रदर्शन स्थल के रूप में निर्धारित करने पर उचित निर्णय ले। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ को बताया कि सक्षम प्राधिकारी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर के अलावा किसी अन्य स्थान को निर्धारित करने पर विचार करेगा। सॉलिसिटर जनरल के इस आश्वासन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश दिया।
अदालत के आदेश में कहा गया, "सभी पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि अब समय आ गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के लिए आवश्यक सुविधाओं से युक्त किसी अन्य स्थान की पहचान कर उसे निर्धारित किया जाए। सक्षम प्राधिकारी इस सुझाव पर विचार करे और उचित निर्णय ले।" अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि संशोधित पाबंदियों और संबंधित परामर्शों का समाचार पत्रों, आधिकारिक वेबसाइटों और अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इससे यात्रियों को बैरिकेडिंग, प्रतिबंधों और वैकल्पिक मार्गों की जानकारी मिल सकेगी।
कपिल सिब्बल ने दी क्या दलील?
कपिल सिब्बल ने बताया कि उनकी जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने का आदेश है। वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और प्रशांत भूषण ने भी इस मामले में अदालत से दखल देने की मांग की। उन्होंने कहा कि पूरे शहर में बैरिकेडिंग की जा रही है और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर पूरी दिल्ली को बंद नहीं किया जा सकता। वकीलों ने कहा कि नागरिकों को विरोध प्रदर्शन करने का मौलिक अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सभी पक्षों को सुनना जरूरी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि किसी भी तरह का प्रतिबंध लगाने से पहले सभी पक्षों को सुनना जरूरी है। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि अगर प्रदर्शन की अनुमति नहीं ली गई है, तो यह कानून के अनुरूप नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ऐसा प्रदर्शन असांविधानिक है।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के आयोजकों से पूछा जा सकता है कि इसमें कितने लोग शामिल होंगे। प्रदर्शनकारियों को बिना हथियार के रहने और प्रशासन को प्रदर्शन को नियंत्रित करने के निर्देश दिए जा सकते हैं। कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, प्रशांत भूषण, वृंदा ग्रोवर और गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि वे मेट्रो स्टेशन बंद करने, सड़कों को रोकने और बैरिकेडिंग के खिलाफ उचित याचिका लेकर फिर अदालत आएंगे।