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लखनऊ अग्निकांड के बाद उठी मांग: पूरे देश के लिए एक सेफ्टी नियम बनाए सरकार; सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

Fri, 26 Jun 2026 03:54 PM IST
प्रशांत तिवारी आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Fri, 26 Jun 2026 03:54 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में मांग की गई है कि देशभर के स्कूल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, होटल और अन्य सार्वजनिक इमारतों के लिए एक जैसे न्यूनतम फायर और जीवन-सुरक्षा नियम लागू किए जाएं। याचिका में कहा गया है कि अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग नियम और उनका कमजोर पालन लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।

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Demand raised fire incident Government should formulate unified safety rule for country petition filed in SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पिछले दिनों लखनऊ के अलीगंज में स्थित एक कोचिंग संस्थान में आग लगने से 15 बच्चों की मौत के बाद एक बार फिर से सावर्जनिक स्थानों पर फायर सेफ्टी से जुड़े नियमों को लेकर सवाल उठने लगा है। इसी बीच देश में स्कूल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, होटल और दूसरी सार्वजनिक इमारतों में बार-बार लगने वाली आग की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इसमें मांग की गई है कि पूरे देश में ज्यादा जोखिम वाली सार्वजनिक जगहों के लिए एक जैसा 'राष्ट्रीय न्यूनतम फायर और जीवन-सुरक्षा फ्रेमवर्क' बनाया जाए और उसे सख्ती से लागू किया जाए।

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सुप्रीम कोर्ट सरकारों को निर्देश देने की मांग
यह याचिका वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने दायर की है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की है कि सभी सार्वजनिक इमारतों के लिए न्यूनतम फायर और जीवन-सुरक्षा मानक तय किए जाएं। उनका कहना है कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम होने की वजह से सुरक्षा के स्तर में काफी अंतर है और नियमों का सही तरीके से पालन भी नहीं हो पाता।
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फायर सेफ्टी को लेकर कई जगह नियम अधूरे
याचिका में कहा गया है कि मौजूदा फायर सेफ्टी कानून राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग हैं। कई जगह नियम अधूरे हैं, जबकि कई जगह उनका सही तरीके से पालन नहीं किया जाता। इसका सीधा असर लोगों की सुरक्षा पर पड़ता है और आग लगने जैसी घटनाओं में जान-माल का नुकसान बढ़ जाता है। याचिका में मांग की गई है कि एक ऐसा राष्ट्रीय फ्रेमवर्क बनाया जाए, जो पूरे देश में समान रूप से लागू हो। इसके दायरे में स्कूल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, होटल, गेस्ट हाउस, मनोरंजन स्थल, कमर्शियल बिल्डिंग और ऐसी सभी जगहों को शामिल किया जाए, जहां बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं।
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फायर सेफ्टी नियमों का सख्ती से पालन कराने की मांग
इसके अलावा, याचिका में फायर सेफ्टी नियमों का सख्ती से पालन कराने, नियमित निरीक्षण कराने, आपातकालीन स्थिति से निपटने की तैयारी सुनिश्चित करने, लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की स्पष्ट व्यवस्था बनाने और नियमों के उल्लंघन पर संबंधित अधिकारियों व भवन मालिकों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि देश में बार-बार होने वाली आग की घटनाएं यह दिखाती हैं कि फायर सेफ्टी व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। आग से बचाव के नियम होने के बावजूद उनका सही तरीके से पालन नहीं हो रहा, जिससे लोगों की जान लगातार खतरे में बनी रहती है।

याचिका में कई घटनाओं का जिक्र
इसमें देश की कई बड़ी आग की घटनाओं का भी ज़िक्र किया गया है। इनमें उपहार सिनेमा अग्निकांड, AMRI अस्पताल में आग, सूरत के तक्षशिला आर्केड कोचिंग सेंटर में आग, अनाज मंडी अग्निकांड, राजकोट के TRP गेम जोन में आग, हाल ही में दिल्ली के मालवीय नगर स्थित गेस्ट हाउस में लगी आग और लखनऊ के अलीगंज कोचिंग सेंटर में आग की घटनाएं शामिल हैं। याचिका में कहा गया है कि इन घटनाओं से साफ होता है कि अलग-अलग कानून, कमजोर निगरानी और नियमों को लागू करने में लापरवाही लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गई है।


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सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का दिया गया हवाला
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 से जुड़े लोगों के मौलिक अधिकारों का है। नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकारों की संवैधानिक जिम्मेदारी है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी हवाला दिया गया है। इनमें स्कूलों में आग से सुरक्षा को लेकर अविनाश मेहरोत्रा बनाम भारत संघ मामले का फैसला और अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) कार्यवाही शामिल है। इसके अलावा नेशनल बिल्डिंग कोड, मॉडल बिल्डिंग बाय-लॉज़, NDMA की गाइडलाइंस और मॉडल फायर सर्विस बिल, 2019 का भी जिक्र किया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, उन्होंने 24 जून को केंद्र और राज्य सरकारों के संबंधित अधिकारियों को भी एक आवेदन देकर राष्ट्रीय न्यूनतम फायर और जीवन-सुरक्षा फ्रेमवर्क बनाने की मांग की थी, लेकिन उस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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