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BJP: धर्मेंद्र प्रधान ने पहले दिन ही इस्तीफे की पेशकश की थी, फिर क्या हुआ? कैलाश विजयवर्गीय ने बताई पूरी कहानी

Sun, 26 Jul 2026 11:29 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल पीटीआई, इंदौर
पीटीआई, इंदौर Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 26 Jul 2026 11:29 AM IST
सार

केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ा दावा किया। उनका कहना है कि छात्र आंदोलन शुरू होने के पहले ही दिन प्रधान इस्तीफा देने को तैयार थे, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने उन्हें रोक दिया था। आखिर पार्टी ने उस समय इस्तीफा क्यों नहीं लिया और बाद में क्या बदला कि प्रधान ने पद छोड़ दिया? आइए, इस पूरी कहानी को समझते हैं...

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Dharmendra Pradhan Offered Resign Day One of Student Protests What Changed Later Kailash Vijayvargiya Reveals
धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने से क्यों रोका गया? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

नीट पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चले छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अब मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा बयान सामने आया। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन शुरू होने के पहले ही दिन धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद छोड़ने की पेशकश कर दी थी। हालांकि, उस समय भाजपा नेतृत्व ने उन्हें इस्तीफा देने से मना कर दिया था। विजयवर्गीय के अनुसार, बाद में परिस्थितियां बदलने पर पार्टी ने फैसला लिया और प्रधान ने तुरंत इस्तीफा दे दिया।
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इंदौर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने हर जिम्मेदारी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाई। उन्होंने दावा किया कि छात्र आंदोलन शुरू होते ही प्रधान ने भाजपा अध्यक्ष से कहा था कि अगर पार्टी को जरूरत लगे तो वह शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। लेकिन उस समय पार्टी अध्यक्ष ने उन्हें स्पष्ट रूप से कहा कि इस मुद्दे पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है, इसलिए वह न तो इस्तीफा दें और न ही इस बारे में किसी से चर्चा करें।
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विदेशी ताकतों की साजिश को लेकर विजयवर्गीय ने क्या दावा किया?

कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उन विदेशी ताकतों की योजना को विफल करने वाला कदम साबित हुआ, जो हिंसा फैलाकर भारत को अस्थिर करना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं पहले बांग्लादेश और श्रीलंका में भी देखने को मिली थीं। विजयवर्गीय ने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने उन विदेशी ताकतों की साजिश को नाकाम कर दिया, जो हिंसा के जरिए भारत को अस्थिर करना चाहती थीं। मैं उनके इस फैसले के लिए उन्हें बधाई देता हूं।" उन्होंने यह भी कहा कि प्रधान ने अपने कार्यकाल के दौरान हर जिम्मेदारी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाई।
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धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने से क्यों रोका गया?

विजयवर्गीय ने दावा किया कि छात्र आंदोलन शुरू होने के पहले ही दिन धर्मेंद्र प्रधान ने भाजपा अध्यक्ष से कहा था कि यदि पार्टी को उचित लगे तो वह शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। उनके अनुसार, भाजपा अध्यक्ष ने उस समय कहा कि इस मुद्दे पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। इसलिए न तो इस्तीफा दिया जाए और न ही इस विषय पर किसी से चर्चा की जाए। विजयवर्गीय ने कहा कि बाद में जब परिस्थितियां बदलीं और पार्टी ने फैसला लिया कि प्रधान को पद छोड़ना चाहिए, तब उन्होंने तुरंत इस्तीफा दे दिया।

कांग्रेस पर हमला बोलते हुए क्या कहा?

विजयवर्गीय ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष ऐसे जश्न मना रहा है, जैसे पड़ोसी के घर बेटे के जन्म पर ढोल बजा रहा हो। उन्होंने सवाल किया कि छात्र आंदोलन के दौरान कांग्रेस की क्या भूमिका थी। उनके मुताबिक, आंदोलन छात्रों ने शुरू किया था और कांग्रेस सिर्फ उनके पीछे खड़ी दिखाई दी। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद विपक्ष पूरी तरह निराश हो गया था और उसी दौर में उसे सीजेपी के रूप में उम्मीद की एक किरण दिखाई दी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या छात्र आंदोलन के दौरान किसी कांग्रेस नेता पर पुलिस ने कार्रवाई की थी।

राहुल गांधी और आरएसएस पर क्या बोले विजयवर्गीय?

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देश की शिक्षा व्यवस्था को दीमक की तरह खोखला कर दिया है। इस पर विजयवर्गीय ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें राहुल गांधी की राजनीतिक सोच और समझ पर दुख होता है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को अभी भी आरएसएस को समझने की जरूरत है। विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसमें आरएसएस का महत्वपूर्ण योगदान है।
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