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Gujarat Riots: SIT ने कोर्ट में कहा- निर्दोष लोगों को फंसाने की बड़ी साजिश का हिस्सा थे पूर्व डीजीपी श्रीकुमार
Mon, 25 Jul 2022 08:54 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 25 Jul 2022 08:54 PM IST
सार
हलफनामे में कहा गया है कि "एसआईटी द्वारा की गई एक संक्षिप्त जांच, सीतलवाड़ और पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट सहित अन्य द्वारा 'बड़ी साजिश' के आरोप का समर्थन करने के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करती है।"
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पूर्व डीजीपी आरबी श्रीकुमार
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
विशेष जांच दल (एसआईटी) ने यहां एक अदालत को बताया कि पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आरबी श्रीकुमार एक 'असंतुष्ट' अधिकारी थे, जो 2002 के गुजरात सांप्रदायिक दंगों के मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने की एक 'बड़ी साजिश' का हिस्सा बने।
श्रीकुमार और सीतलवाड़ को पिछले महीने किया गया गिरफ्तार
सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट के साथ श्रीकुमार के खिलाफ अहमदाबाद अपराध शाखा ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 468 (जालसाजी) और धारा 194 (झूठे सबूत देना या गढ़ना) के तहत अन्य अपराधों के साथ मामला दर्ज किया था। श्रीकुमार और सीतलवाड़ को पिछले महीने गुजरात पुलिस की एसआईटी ने गिरफ्तार किया था।
उन्होंने जमानत की भी मांग की थी। श्रीकुमार की जमानत याचिका के जवाब में अतरिक्त प्रधान न्यायाधीश डीडी ठक्कर की अदालत में दायर एक हलफनामे में एसआईटी ने हाल ही में कहा कि वह एक असंतुष्ट सरकारी अधिकारी थे, जिन्होंने गलत उद्देश्यों और पूरे गुजरात राज्य के निर्वाचित प्रतिनिधियों, नौकरशाही और पुलिस प्रशासन को बदनाम करने के लिए प्रक्रिया का दुरुपयोग किया।
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अदालत श्रीकुमार और सह-आरोपी सीतलवाड की जमानत याचिकाओं पर मंगलवार को अपना आदेश सुना सकती है, जो अभी न्यायिक हिरासत में हैं। हलफनामे में कहा गया है कि "एसआईटी द्वारा की गई एक संक्षिप्त जांच, सीतलवाड़ और पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट सहित अन्य द्वारा 'बड़ी साजिश' के आरोप का समर्थन करने के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करती है।" संजीव भट्ट पहले से ही एक अलग आपराधिक मामले में जेल में हैं।
एसआईटी का दावा-गोधरा की घटना के कुछ दिन सीतवाड़ से मिले श्रीकुमार
हलफनामे में कहा गया है कि श्रीकुमार ने शुरू से ही साजिश के एक हिस्से के रूप में काम करना शुरू कर दिया था क्योंकि गोधरा ट्रेन जलने की घटना (27 फरवरी 2002) के कुछ ही दिनों के बाद उन्होंने सह-आरोपी सीतलवाड़ के साथ मीटिंग की थी।
एसआईटी ने दावा कि तत्कालीन सांसद और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार स्वर्गीय अहमद पटेल के कहने पर श्रीकुमार, सीतलवाड़ और भट्ट समेत अन्य आरोपियों द्वारा 'राजनीतिक उद्देश्यों' के साथ यह बड़ी साजिश रची गई थी।
एसआईटी ने गवाहों के बयान का हवाला देते हुए कहा कि श्रीकुमार गवाहों को पढ़ाने और उन पर दबाव बनाने में शामिल थे जो आगे 'साजिश की राजनीतिक प्रकृति' का खुलासा करता है। हलफनामे में दंगों के मामलों की जांच के लिए सुप्रीम द्वारा नियुक्त एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है जिसमें 'आरबी श्रीकुमार द्वारा की गई प्रविष्टियों की वास्तविकता केबारे में एक मजबूत संदेह' की बात की गई थी।
श्रीकुमार, सीतलवाड़ और भट्ट के नाम की प्राथमिकी तब आई थी जब शीर्ष अदालत ने पिछले महीने जाकिया जाफरी की याचिका खारिज कर दी थी, जिनके पति व पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी गोधरा ट्रेन जलने की घटना से भड़के दंगों के दौरान मारे गए ते। गुजरात पुलिस ने तीनों के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था।
गुजरात दंगों में मारे गए ते 1,044 लोग
गोधरा स्टेशन के पास भीड़ द्वारा कथित तौर पर साबरमती एक्सप्रेस की एक बोगी में आग लगाने की घटना के एक दिन बाद 28 फरवरी, 2002 को हुई हिंसा के दौरान अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में मारे गए 68 लोगों में एहसान जाफरी भी शामिल थे। ट्रेन में आग लगने से 59 यात्रियों की मौत हो गई थी।
ट्रेन जलने की घटना से शुरू हुए राज्यव्यापी दंगों में 1,044 लोग मारे गए थे। केंद्र सरकार ने मई 2005 में राज्यसभा को सूचित किया था कि गोधरा के बाद के दंगों में 254 हिंदू और 790 मुस्लिम मारे गए थे।
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श्रीकुमार और सीतलवाड़ को पिछले महीने किया गया गिरफ्तार
सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट के साथ श्रीकुमार के खिलाफ अहमदाबाद अपराध शाखा ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 468 (जालसाजी) और धारा 194 (झूठे सबूत देना या गढ़ना) के तहत अन्य अपराधों के साथ मामला दर्ज किया था। श्रीकुमार और सीतलवाड़ को पिछले महीने गुजरात पुलिस की एसआईटी ने गिरफ्तार किया था।
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उन्होंने जमानत की भी मांग की थी। श्रीकुमार की जमानत याचिका के जवाब में अतरिक्त प्रधान न्यायाधीश डीडी ठक्कर की अदालत में दायर एक हलफनामे में एसआईटी ने हाल ही में कहा कि वह एक असंतुष्ट सरकारी अधिकारी थे, जिन्होंने गलत उद्देश्यों और पूरे गुजरात राज्य के निर्वाचित प्रतिनिधियों, नौकरशाही और पुलिस प्रशासन को बदनाम करने के लिए प्रक्रिया का दुरुपयोग किया।
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अदालत श्रीकुमार और सह-आरोपी सीतलवाड की जमानत याचिकाओं पर मंगलवार को अपना आदेश सुना सकती है, जो अभी न्यायिक हिरासत में हैं। हलफनामे में कहा गया है कि "एसआईटी द्वारा की गई एक संक्षिप्त जांच, सीतलवाड़ और पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट सहित अन्य द्वारा 'बड़ी साजिश' के आरोप का समर्थन करने के लिए पर्याप्त आधार प्रदान करती है।" संजीव भट्ट पहले से ही एक अलग आपराधिक मामले में जेल में हैं।
एसआईटी का दावा-गोधरा की घटना के कुछ दिन सीतवाड़ से मिले श्रीकुमार
हलफनामे में कहा गया है कि श्रीकुमार ने शुरू से ही साजिश के एक हिस्से के रूप में काम करना शुरू कर दिया था क्योंकि गोधरा ट्रेन जलने की घटना (27 फरवरी 2002) के कुछ ही दिनों के बाद उन्होंने सह-आरोपी सीतलवाड़ के साथ मीटिंग की थी।
एसआईटी ने दावा कि तत्कालीन सांसद और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार स्वर्गीय अहमद पटेल के कहने पर श्रीकुमार, सीतलवाड़ और भट्ट समेत अन्य आरोपियों द्वारा 'राजनीतिक उद्देश्यों' के साथ यह बड़ी साजिश रची गई थी।
एसआईटी ने गवाहों के बयान का हवाला देते हुए कहा कि श्रीकुमार गवाहों को पढ़ाने और उन पर दबाव बनाने में शामिल थे जो आगे 'साजिश की राजनीतिक प्रकृति' का खुलासा करता है। हलफनामे में दंगों के मामलों की जांच के लिए सुप्रीम द्वारा नियुक्त एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है जिसमें 'आरबी श्रीकुमार द्वारा की गई प्रविष्टियों की वास्तविकता केबारे में एक मजबूत संदेह' की बात की गई थी।
श्रीकुमार, सीतलवाड़ और भट्ट के नाम की प्राथमिकी तब आई थी जब शीर्ष अदालत ने पिछले महीने जाकिया जाफरी की याचिका खारिज कर दी थी, जिनके पति व पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी गोधरा ट्रेन जलने की घटना से भड़के दंगों के दौरान मारे गए ते। गुजरात पुलिस ने तीनों के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था।
गुजरात दंगों में मारे गए ते 1,044 लोग
गोधरा स्टेशन के पास भीड़ द्वारा कथित तौर पर साबरमती एक्सप्रेस की एक बोगी में आग लगाने की घटना के एक दिन बाद 28 फरवरी, 2002 को हुई हिंसा के दौरान अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में मारे गए 68 लोगों में एहसान जाफरी भी शामिल थे। ट्रेन में आग लगने से 59 यात्रियों की मौत हो गई थी।
ट्रेन जलने की घटना से शुरू हुए राज्यव्यापी दंगों में 1,044 लोग मारे गए थे। केंद्र सरकार ने मई 2005 में राज्यसभा को सूचित किया था कि गोधरा के बाद के दंगों में 254 हिंदू और 790 मुस्लिम मारे गए थे।