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DNPA Conclave 2026: अश्विनी वैष्णव ने सूचनाओं के सत्यापन पर दिया जोर, कहा- मानव समाज भरोसे की संस्थाओं पर टिका

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 26 Feb 2026 10:32 AM IST
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सार

DNPA Conclave 2026: डिजिटल मीडिया के दौर में समाचार माध्यमों की भूमिका कैसी होनी चाहिए? सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट की होड़ के बीच तथ्यात्मक और प्रामाणिक सूचनाओं और समाचार के लिए कैसे उपाय किए जाने चाहिए? डीएनपीए कॉन्क्लेव के शुरुआती वक्तव्य में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ऐसे तमाम बिंदुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने जवाबदेही पर विशेष जोर दिया। इस कॉन्क्लेव में अमर उजाला के एमडी तन्मय माहेश्वरी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया की नजर भारत पर है। कॉनक्लेव में किसने क्या कुछ कहा? जानिए इस खबर में

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डीएनपीए कॉन्क्लेव में अश्विनी वैष्णव के संबोधन का अंश - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

डीएनपीए कॉन्क्लेव में आज डिजिटल मीडिया के दौर में समाचार माध्यमों की भूमिका कैसी हो, विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। सरकार ने जवाबदेही पर जोर दिया। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पूरी दुनिया के मीडिया जगत के लिए यह महत्वपूर्ण दौर है। यह सही निर्णय लेने का समय है। यह जरूरी है कि आम सहमति बने, अच्छे विकल्प सामने आएं और अच्छी सिफारिशें मिलें ताकि भविष्य की नीतियों को आकार दिया जा सके।

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मानव समाज भरोसे की संस्थाओं पर टिका है
बदलते दौर में समाचार माध्यमों की भूमिपा पर केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि पूरा मानव समाज भरोसे की संस्थाओं पर टिका है। यह भरोसा परिवार से शुरू होता है और सामाजिक पहचान, न्यायपालिका, मीडिया, विधायिका जैसी संस्थाओं तक जाता है। समाज के अलग-अलग अंग और संस्थाएं विश्वास के सिद्धांत पर काम करती हैं। मीडिया घरानों के लिए भी बुनियादी सिद्धांत यही रहता है कि वह निष्पक्ष और जिम्मेदार रहें। मीडिया के समक्ष खतरे भी मौजूद हैं। जैसे- डीप फेक, गलत सूचनाओं का प्रवाह। हर समाज इस तरह के खतरों से जूझ रहा है। जो संस्थाएं शताब्दियों से मौजूद हैं, उन्हें इन खतरों से कैसे बचाए रखा जाए, यह बड़ी चुनौती है। ऑनलाइन सेफ्टी इसके लिए बहुत जरूरी है। खबरों की प्रामाणिकता, बच्चों की सुरक्षा, सिंथेटिक कंटेंट से बचाव भी जरूरी है और इसके लिए निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है।

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'सत्यापन का ध्यान रखना जरूरी'
वैष्णव ने कहा कि उदाहरण के लिए होटल में आने वाले ग्राहक का होटल प्रबंधन सत्यापन करता है, उसी तरह ऑनलाइन मंचों को भी सत्यापन का ध्यान रखना होगा ताकि कंटेंट का इस्तेमाल करने वालों को किसी तरह का नुकसान न हो। कंटेंट किस तरह वायरल हो जाता है, यह हम सभी जानते हैं। कुछ घंटों में वायरल कंटेंट लोगों तक पहुंच जाता है। ऐसे में जिम्मेदारी रखना बहुत जरूरी है। नागरिकों को खतरों से बचाना, उनकी ऑनलाइन सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है।


'रेवेन्यू भी निष्पक्ष तरीके से साझा किया जाए'
उन्होंने कहा कि संसदीय समितियां और न्यायपालिका भी लोगों के सामने मौजूद खतरों को लेकर चिंतित हैं। अगर किसी यूजर की कोई शिकायत है, तो उसे कैसे सुना जाए और उनकी हिफाजत करने का तंत्र क्या होगा, इस पर चर्चा जरूरी है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को रेवेन्यू भी निष्पक्ष तरीके से साझा करना चाहिए, चाहे फिर वह कमाई खबरें बनाने वालों से जुड़ी हो, परंपरागत मीडिया से जुड़ी हो, या फिर वह इन्फ्ल्यूएंर्स या शोधार्थियों का योगदान हो। इसके लिए नीति बनाना जरूरी है। जिनके पास कॉपीराइट है, जिनके पास मौलिक कंटेंट है, वह उनकी बौद्धिक संपदा है, जिसका सम्मान होना चाहिए।  बौद्धिक संपदा का सम्मान नहीं होगा, तो समाज का विकास भी नहीं हो सकेगा।


अमर उजाला के एमडी बोले- पूरी दुनिया की नजर भारत पर है
इस कॉन्क्लेव में अमर उजाला समूह के प्रबंध निदेशक (एमडी) तन्मय माहेश्वरी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने एक जिम्मेदार समाचार माध्यम की वैश्विक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'मेरा आप सभी से सवाल है कि हम किस से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं?' बकौल तन्मय माहेश्वरी, पहले हम (मीडिया संस्थान) आपस में प्रतिस्पर्धा कर रहे थे, लेकिन आज हम एआई, सोशल मीडिया तमाम बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'इस साल के कॉन्क्लेव की थीम 'न्यू वर्ल्ड ऑर्डर ऑफ न्यूज' है। इस कॉन्क्लेव में कई मीडिया, तकनीकी कंपनियां शामिल हुई हैं, और हम सभी यहां साथ मिलकर सहयोग करने के मकसद से इकट्ठा हुए हैं। हाल ही में एआई समिट हुआ, जिसमें हमें एआई उद्योग के नेताओं को सुनने का अवसर मिला, जिसमें एआई के तकनीकी पक्ष पर बहुत बातें हुई। हमने पूछा कि कंटेंट का क्या होगा? तो कहा गया कि इस बारे में विचार होगा। हमने कहा कि कंटेंट, एआई इंजन का तेल है, हालांकि उन्होंने कहा कि हमें नहीं लगता कि इस पूरे डोमेन में कुछ बहुत बड़ा होने वाला है।'


हम किस से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं?

तन्मय माहेश्वरी ने कहा, 'जब मैं इसमें गहराई में गया तो मुझे पता चला कि कैसे कई कंटेंट माफिया हमसे डेटा लेते हैं और इसे सभी एल्गोरिदम्स को देती हैं। क्रॉल जैसी कंपनियां वैश्विक स्तर पर ये काम कर रही हैं। ऐसे में मेरा आप सभी से सवाल है कि हम किस से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। दो साल पहले हम आपस में प्रतिस्पर्धा कर रहे थे, लेकिन आज हम मीम्स, शॉर्ट वीडियोज, एआई जनित कंटेंट, सोशल मीडिया तमाम बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।' 


हमारा देश डिजिटल, विश्वसनीय भविष्य का हकदार है
अमर उजाला के एमडी ने कहा, 'प्रतिस्पर्धा आदि से अलग, हमें फेक न्यूज से भी निपटना पड़ रहा है। 80 करोड़ प्लस इंटरनेट यूजर्स, सस्ता डेटा ऐसी चीजें हैं, जिसके चलते पूरी दुनिया की हम पर नजर है। लेकिन दुख की बात ये है कि हम बहुत ज्यादा कंटेंट क्रिएट कर रहे हैं और बहुत ज्यादा कंटेंट देख रहे हैं। जिसके चलते मीडिया कंटेंट डोमेन नाजुक स्थिति में है। हमारा देश डिजिटल, विश्वसनीय भविष्य का हकदार है। एआई आज सब कुछ कर सकता है, वह ट्रांसलेट कर सकता है, खबर लिख सकता है। लेकिन एआई पंचायत बैठक में शामिल नहीं हो सकता और स्थानीय लोगों को नहीं समझ सकता और फिर उनकी स्थिति को देश के साथ साझा नहीं कर सकता।'



भारत का इंटरनेट तेजी से बढ़ रहा है
अपने वक्तव्य के अंतिम हिस्से में अमर उजाला के एमडी ने कहा, 'इस कमरे में मौजूद हम सभी की जिम्मेदारी है कि सभी की आवाज सुनी जानी चाहिए। प्रोपेगैंडा पर रोक लगनी चाहिए और देश का विकास होना चाहिए। देश, विश्वास पर ही विकास करता है। भारत एक बड़ा देश है, जहां सैंकड़ों भाषाएं बोली जाती हैं। भारत का इंटरनेट तेजी से बढ़ रहा है। आज ये मायने नहीं रखता कि कौन तेजी से नोटिफिकेशन भेजता है बल्कि ये मायने रखता है कि कौन विश्वास, प्रमाणिकता और तथ्यात्मकता के साथ खबरें देता है।'

देश के लोगों को विश्वसनीय और प्रमाणिक कंटेंट मिले
उन्होंने कहा, 'ये देखना अच्छा है कि तकनीकी कंपनियां भी इस मुद्दे को उठा रही हैं और इस दिशा में छोटे कदम उठा रही हैं लेकिन पत्रकारिता ने हर चुनौती का सामना किया है। एक समय प्रिंटिंग प्रेस ने राजाओं को तबाह किया, टेलीविजन ने राजनीति में उथल-पुथल मचाई। आज एआई सबकुछ तबाह कर रहा है, लेकिन पत्रकारिता ने हर चुनौती का सामना किया है। क्योंकि कोई समाज बिना सूचना के सरवाइव नहीं कर सकता। ये हमारा कर्तव्य है कि हम ये सुनिश्चित करें कि इस देश के लोगों को विश्वसनीय और प्रमाणिक कंटेंट मिले।'


क्या है इस साल के कॉन्क्लेव की थीम?
इस वर्ष की थीम 'द न्यू वर्ल्ड ऑर्डर ऑफ न्यूज: रिराइटिंग द प्लेबुक फॉर ए रिजिलिएंट डिजिटल फ्चूयर' है, जिसमें मीडिया, प्रौद्योगिकी, नीतियों और व्यवसाय जगत में हो रहे महत्वपूर्ण परिवर्तनों पर चर्चा की जाएगी। कॉन्क्लेव में प्रकाशन जगत, टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स और अलग-अलग एजेंसियों का वरिष्ठ नेतृत्व एक मंच पर है ताकि नियमन, बदलते हुए मुद्रीकरण मॉडल, रणनीतिक साझेदारियों और समाचारों के भविष्य को आकार देने में एआई की बढ़ती भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा की जा सके।

क्या है डीएनपीए 
डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) भारत की एक प्रमुख उद्योग संस्था है, जो देश भर के अग्रणी डिजिटल मीडिया संगठनों की डिजिटल इकाइयों का प्रतिनिधित्व करती है। यह विश्वसनीय पत्रकारिता को सुदृढ़ करने, नैतिक मानकों को बनाए रखने और डिजिटल खबरों के पारिस्थितिकी तंत्र में सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।


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