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DNPA Conclave 2026: अमर उजाला के एमडी तन्मय माहेश्वरी ने कहा- डिजिटल के दौर में विश्वसनीयता ही टिक पाएगी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 26 Feb 2026 11:43 AM IST
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सार

भारत के शीर्ष प्रकाशक समूहों की डिजिटल इकाइयों के संगठन डीएनपीए की ओर से गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में DNPA Conclave 2026 का आयोजन किया गया। इसमें केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से लेकर मीडिया जगत की प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया। अमर उजाला समूह के प्रबंध निदेशक तन्मय माहेश्वरी ने इसमें प्रमुख उद्बोधन दिया। 

DNPA Conclave 2026 Amar Ujala MD says only credibility will survive in digital era world looking at India
डीएनपीए कॉन्क्लेव 2026 में अमर उजाला के एमडी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

दुनिया में खबरों का नया दौर कैसा है, इस पर चर्चा करने के लिए गुरुवार को डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) के मंच पर मीडिया जगत की प्रमुख हस्तियां मौजूद थीं। इस बार डीएनपीए कॉन्क्लेव की थीम 'द न्यू वर्ल्ड ऑर्डर ऑफ न्यूज: रिराइटिंग द प्लेबुक फॉर ए रिजिलिएंट डिजिटल फ्चूयर' रखी गई, जिसमें मीडिया, प्रौद्योगिकी, नीतियों और डिजिटल उद्योग जगत में आ रहे महत्वपूर्ण बदलावों पर चर्चा की गई। कॉन्क्लेव में अमर उजाला समूह के प्रबंध निदेशक तन्मय माहेश्वरी ने प्रमुख उद्बोधन दिया और डिजिटल मीडिया के समक्ष मौजूद चुनौतियों के बारे में बताया।

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'कई कंपनियां कंटेंट माफिया की तरह काम कर रहीं'
तन्मय माहेश्वरी ने कहा, 'हम सभी यहां पर समन्वय करने और मिलकर कुछ नया रचने के लिए इकट्ठा हुए हैं। हाल ही में हुई एआई समिट में हमने डिजिटल मीडिया में मौजूद कई तरह की परतों (लेयर) पर एआई जगत की प्रमुख हस्तियों से बात की थी। आखिरकार कंटेंट ही डिजिटल इंजन का ऑयल है। इस पर एआई समिट में मौजूद शीर्ष विशेषज्ञों का कहना था कि कंटेंट की परत में कुछ बड़ा होगा, इसकी संभावना नहीं दिखती, लेकिन सवाल यह है कि नए मॉडल किस तरह काम करते हैं। असल में कई तरह की कंपनियां मौजूद हैं, जो कंटेंट माफिया की तरह काम करती हैं, जो हमारे बनाए कंटेंट का अपने अल्गोरिदम में इस्तेमाल करती हैं।'
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'हमारी प्रतिस्पर्धा आखिर किससे है?'
उन्होंने कहा, 'मेरा सभी से एक सवाल है- हम आखिर किससे प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं? ...दो साल पहले तक हम एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे थे। अब हम प्रतिस्पर्धा कर रहे किसी व्यक्ति की रील से, मीम्स से भरे वेब पेजेस से, एआई से बने किरदार, जो संविधान पढ़ते हैं, उनसे और बेशक परिवार के किसी एक ऐसे व्यक्ति से, जो किसी घटना के घटित होने से पहले ही वॉट्सएप पर खबरें ब्रेक कर देता है। इससे भी ज्यादा बड़ी बात है कि हम अनजाने में फेक न्यूज से भी प्रतिस्पर्धा करने को मजबूर हैं। ध्यान आकर्षित करना नया 'ऑयल' है। दुर्भाग्य से यह अल्गोरिदम, डीप फेक और क्लिक बेट से चलता है। भारतीय संदर्भ में 80 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हैं। 60 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन यूजर्स हैं। दुनिया का सबसे सस्ता डेटा यहां मौजूद है। भारत सभी तरह के प्रयोगों के लिए उपयुक्त जगह है।'

'भारत में डिजिटल पर अति सक्रिय समाज'
तन्मय माहेश्वरी ने कहा, 'हम सिर्फ डिजिटल बन चुके देश नहीं हैं, हमारे यहां डिजिटल पर अति सक्रिय समाज है। यह भी विडंबना ही है कि हम अब तक का सबसे ज्यादा डिजिटल कंटेंट बना रहे हैं, अब तक का सबसे ज्यादा डिजिटल कंटेंट देख रहे हैं, फिर भी मीडिया का इकोसिस्टम पहले से कहीं ज्यादा संवेदनशील हो गया है। तो क्या भविष्य सिर्फ डिजिटल का होगा या यह देश डिजिटल के साथ विश्वसनीय भविष्य का भी हकदार है? एआई कोई बात आपको संक्षेप में बता सकता है। अनुवाद कर सकता है। शीर्षक भी बना सकता है, लेकिन मेरे विचार से एआई 45 डिग्री तापमान में स्थानीय जरूरतों को समझते हुए ग्राम पंचायत सभा में हिस्सा नहीं ले सकता।'

'2035 में क्या मायने रखेगा?'
उन्होंने कहा, 'हम सभी के पास यह जिम्मेदारी है कि सभी की बात सुनी जाए। प्रोपगैंडा पर लगाम लगाई जाए और देश आगे बढ़े। देश भरोसे के साथ ही आगे बढ़ता है। भारत में कोई एक मीडिया बाजार नहीं है। यहां 28 तरह के भाषाई मीडिया बाजार हैं। सैकड़ों बोलियां हैं। भारत इंटरनेट बढ़ रहा है। 2035 में यह मायने नहीं रखेगा कि किसका नोटिफिकेशन बुलंद तरीके से सामने आ रहा है। मायने यह रखेगा कि आप पर भरोसा कितना है? आपकी विश्वसनीयता कितनी है? आप कितने टिकाऊ और पारदर्शी हैं? जिसके पास तकनीक, नैतिकता और कारोबार के हुनर का मिश्रण होगा, वही जीतेगा। बिग टेक कंपनियां धीमी गति से ही सही, लेकिन इस दिशा में आगे बढ़ रही हैं। पत्रकारिता ने हर चुनौती में खुद को बचाए रखा है। प्रिंटिंग प्रेस ने कभी राजाओं को हिला दिया था। टीवी ने राजनीति को विचलित कर दिया था। डिजिटल ने भी दो दौर में विज्ञापन जगत को हिलाकर रख दिया। अब एआई ने हर किसी को विचलित कर दिया है, लेकिन पत्रकारिता ऐसी चीज है, जिसने 'डिसरप्शन' के हर दौर में खुद को जिंदा रखा है। यह हमारा कर्तव्य और जिम्मेदारी है कि इस देश के लोगों के पास सच्ची और सत्यापित खबरों का एक्सेस रहे और वे सही और फेक में अंतर कर पाएं।'

ये भी पढ़ें- डीएनपीए कॉन्क्लेव 2026: अश्विनी वैष्णव ने खबरों के प्रति जिम्मेदारियों और सूचनाओं के सत्यापन पर दिया जोर

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा?

इस कॉन्क्लेव के प्रारंभिक वक्तव्य में केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने डिजिटल मीडिया के इस दौर में सूचनाओं के सत्यापन की अहमियत को रेखांकित किया। वैष्णव ने कहा, 'पूरा मानव समाज भरोसे की संस्थाओं पर टिका है। यह भरोसा परिवार से शुरू होता है और सामाजिक पहचान, न्यायपालिका, मीडिया, विधायिका जैसी संस्थाओं तक जाता है। समाज के अलग-अलग अंग और संस्थाएं विश्वास के सिद्धांत पर काम करती हैं। मीडिया घरानों के लिए भी बुनियादी सिद्धांत यही रहता है कि वह निष्पक्ष और जिम्मेदार रहें। मीडिया के समक्ष खतरे भी मौजूद हैं। जैसे- डीप फेक, गलत सूचनाओं का प्रवाह। हर समाज इस तरह के खतरों से जूझ रहा है। जो संस्थाएं शताब्दियों से मौजूद हैं, उन्हें इन खतरों से कैसे बचाए रखा जाए, यह बड़ी चुनौती है। ऑनलाइन सेफ्टी इसके लिए बहुत जरूरी है। खबरों की प्रामाणिकता, बच्चों की सुरक्षा, सिंथेटिक कंटेंट से बचाव भी जरूरी है और इसके लिए निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है।' 

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