बाइडन आए, ट्रंप के तेवर हुए ढीले और चीन ने दिखाने शुरू किए असली रंग
- बाइडन की उदार नीतियों का माना जा रहा है असर
- लद्दाख में जारी तनाव के समाधान में टाल-मटोल करने लगा है ड्रैगन
- भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना ने किसी भी चुनौती से निबटने के लिए बढ़ाई मुस्तैदी
विस्तार
जो बाइडेन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जीत चुके हैं। हार न मानने की जिद पर अड़े राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तेवर भी ढीले पड़ने लगे हैं, लेकिन ट्रंप के ढीले पड़ते तेवरों के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनके प्रशासन ने भी रंग दिखाना शुरू कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि भारत के साथ लद्दाख सीमा पर तनाव के बाबत सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर होने वाली बातचीत में चीन कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। बताते हैं कि चीन जहां भारतीय भू-भाग से अपने सैनिकों को पीछे ले जाने पर तैयार नहीं हो रहा है, वहीं शीर्ष सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता की तारीख के मामले में भी ढुलमुल रवैया अपनाने लगा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव का कहना है कि सीमा पर शांति और सौहार्द कायम रखने के लिए आवश्यक है कि चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सहमतियों, समझौतों का सम्मान करे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सीमा पर शांति और सौहार्द कायम करने के लिए दोनों देशों के बीच में कूटनीतिक और सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता जारी है। हालांकि वह अगली बातचीत की तारीख के विषय में कुछ नहीं बता सके। इस बारे में सैन्य सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार सीमा विस्तार का पक्षधर चीन लगातार अड़ियल रुख अपना रहा है।
भारतीय सेनाएं किसी भी चुनौती से निबटने के लिए तैयार
भारत की तीनों सेनाएं लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। पश्चिमी सीमा पर भी भारतीय सेना लगातार निगरानी कर रही है। नौसेना ने समुद्री क्षेत्र में न केवल अपनी गश्त बढ़ा दी है, बल्कि हर स्तर पर सतर्कता बरत रही है। सैन्य सूत्रों का कहना है कि भारतीय सैनिकों को सियाचिन ग्लेशियर जैसे ठंडे इलाके में चुनौतियों का सामना करने का अनुभव है। इसलिए लद्दाख क्षेत्र में तापमान भले गिरना शुरू हो गया है, लेकिन भारतीय सैनिकों के हौसले काफी बुलंद हैं। वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल राकेश भदौरिया, नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह और भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे लगातार हालात पर नजर रख रहे हैं।
क्या है जो बाइडन कनेक्शन?
कूटनीति के जानकारों की मानें तो जो बाइडन से अभी चीन को किसी बड़े खतरे का अंदेशा नहीं हो रहा है। जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उनके विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने एशिया क्षेत्र में काफी दखल बढ़ाना शुरू किया था। दक्षिण चीन सागर को लेकर भी अमेरिका काफी आक्रामक था। राष्ट्रपति ट्रंप के समय में चीन और अमेरिका के बीच शुरू हुए ट्रेड वार ने भी ड्रैगन की चिंता बढ़ा दी थी। इतना ही नहीं लद्दाख में चीन की घुसपैठ को लेकर भी राष्ट्रपति ट्रंप का चीन के प्रति प्रयास काफी आक्रामक था।
कूटनीति के जानकारों का कहना है कि ट्रंप के चुनाव हारने और उनका तेवर ढीला पड़ने के बाद से शी जिनपिंग प्रशासन इसे अपने लिए अच्छा संकेत मान रहा है। शी जिनपिंग को लग रहा है कि जो बाइडन राजनीति के मामले में अमेरिका के अनुभवी नेता हैं। वह बराक ओबामा के समय में उपराष्ट्रपति थे और उन्हें घरेलू से लेकर अंतरराष्ट्रीय मामलों की अच्छी समझ है। इसलिए वह अंतरराष्ट्रीय मामलों में संतुलित तरीके से अमेरिका का हित देखकर आगे बढ़ेंगे।
रक्षा और विदेश मामलों के जानकार पत्रकार रंजीत कुमार भी कहते हैं कि जो बाइडन की नीतियां उदार रह सकती है। अमेरिका की इस उदारता का चीन जैसे देश अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों में नाायज लाभ ले सकते हैं। हालांकि जो बाइडन ने भारत के साथ अच्छे रिश्ते का भरोसा दिलाया है। कमला हैरिस वहां की उपराष्ट्रपति भी हैं, लेकिन बाइडेन प्रशासन में राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी की केमिस्ट्री बनने में समय लग सकता है।