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भारत-जापान संबंध: वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और क्रिकेट.., जयशंकर ने मजबूत द्विपक्षीय रिश्ते की अहमियत बताई

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Fri, 16 Jan 2026 03:22 PM IST
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सार

India-Japan Relations: भारत-जापान रणनीतिक संवाद में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आर्थिक सुरक्षा को सबसे अहम मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक हालात में भारत और जापान की साझेदारी केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए जरूरी है। साथ इस बैठक में क्रिकेट का भी तड़का लगा। आइए इस पूरी वार्ता के बारे में विस्तार से समझते हैं।

EAM jaishankar discovers shared love for cricket with Japan's FM amid strategic talks
विदेश मंत्री एस जयशंकर जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी के साथ। - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत और जापान के रिश्तों में रणनीति, अर्थव्यवस्था और कूटनीति के साथ अब खेल की साझा भावना भी जुड़ गई है। 18वें भारत-जापान रणनीतिक संवाद के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी के बीच गंभीर वैश्विक मुद्दों के साथ हल्के-फुल्के क्षण भी देखने को मिले। इस बैठक में भारत ने स्पष्ट किया कि अनिश्चित वैश्विक माहौल में आर्थिक सुरक्षा अब कूटनीति का केंद्र बिंदु बन चुकी है।
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जयशंकर ने एक्स पर जापानी भाषा में एक भी पोस्ट किया। इस पर जयशंकर ने कहा कि जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी का भारत में स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। आज जब हम इंडिया-जापान स्ट्रेटेजिक डायलॉग कर रहे हैं, तो मुझे यह जानकर और भी खुशी हो रही है कि मेरी तरह, मंत्री मोतेगी भी क्रिकेट के शौकीन हैं।
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वहीं, वार्ता में जयशंकर ने अपने शुरुआती वक्तव्य में कहा कि भारत जापान के साथ साझेदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में दोनों देशों का रिश्ता केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह व्यापक, रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी में बदल चुका है। भारत और जापान प्रमुख लोकतंत्र और बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं, इसलिए वैश्विक व्यवस्था को आकार देने की जिम्मेदारी भी दोनों पर है।

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इंडो-पैसिफिक विजन कैसे बना साझा आधार?
जयशंकर ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के संदर्भ में साझा सोच पर जोर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे का 2007 में भारतीय संसद में दिया गया ‘कनफ्लुएंस ऑफ द टू सीज’ भाषण आज के इंडो-पैसिफिक ढांचे की नींव बना। जयशंकर के अनुसार, भारत की ‘महासागर’ पहल और जापान का ‘फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ दृष्टिकोण एक-दूसरे के पूरक हैं।

आर्थिक सुरक्षा पर इतना जोर क्यों?
  • जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में आर्थिक सुरक्षा सबसे अहम मुद्दा है।
  • दोनों देशों ने अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं को जोखिम से बचाने पर सहमति जताई।
  • अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी अस्थिरता से बचाना साझा लक्ष्य बताया गया।
  • बातचीत में मजबूत सप्लाई चेन, अहम खनिजों, ऊर्जा और स्वास्थ्य सुरक्षा पर फोकस रहा।
  • समुद्री सुरक्षा को भी आर्थिक स्थिरता से जोड़ा गया।

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क्रिकेट से रिश्तों में आई गर्माहट

रणनीतिक संवाद के बीच एक हल्का पल तब आया जब जयशंकर ने बताया कि उन्हें मोतेगी में क्रिकेट के प्रति गहरी रुचि देखने को मिली। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर साझा किया कि उन्होंने जापान की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की जर्सी प्राप्त की और बदले में भारतीय क्रिकेट टीम द्वारा हस्ताक्षरित बल्ला भेंट किया। जयशंकर ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे भविष्य में जापान में उनके साथ क्रिकेट मैच देखने की उम्मीद रखते हैं। 

जयशंकर ने भरोसा जताया कि अगले वर्ष भारत-जापान राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के साथ यह साझेदारी और मजबूत होगी। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री साने ने हाल ही में जी20 के दौरान मुलाकात की थी। विदेश मंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत और जापान क्वाड, संयुक्त राष्ट्र और जी20 जैसे मंचों पर मिलकर वैश्विक स्थिरता के लिए काम करते रहेंगे।

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