{"_id":"696a0cad4a737fa96406938f","slug":"will-tej-pratap-join-bjp-2026-01-16","type":"video","status":"publish","title_hn":"Tej Pratap Yadav Dahi Chura Feast: भाजपा में जाएंगे तेज प्रताप? Will Tej Pratap Join BJP?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Tej Pratap Yadav Dahi Chura Feast: भाजपा में जाएंगे तेज प्रताप? Will Tej Pratap Join BJP?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Fri, 16 Jan 2026 03:32 PM IST
Link Copied
मकर संक्रांति पर दही-चूड़ा का भोज… लेकिन सवाल सिर्फ स्वाद का नहीं, सियासत का है। तेज प्रताप यादव का यह भोज क्या सिर्फ परंपरा था या किसी बड़े राजनीतिक मोड़ की भूमिका? लालू यादव ने पहुंचकर बेटे का मान तो रख लिया, लेकिन तेजस्वी यादव क्यों नहीं आए? क्या भाई-भाई के बीच की दूरी अब भी जस की तस है? और एनडीए नेताओं की मौजूदगी… क्या ये महज शिष्टाचार था या किसी नई राजनीतिक एंट्री का संकेत? विजय सिन्हा के ‘वक्त पर सब पता चल जाएगा’ वाले बयान के क्या मायने हैं? क्या दही-चूड़ा के बहाने बिहार की राजनीति में पक रही है कोई नई खिचड़ी?
मकर संक्रांति के मौके पर पटना की राजनीति सिर्फ तिल, दही और चूड़ा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके बहाने सियासी समीकरणों की नई तस्वीर भी उभरती दिखी। जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव का दही-चूड़ा भोज इस बार परंपरा से कहीं ज्यादा राजनीतिक संदेशों से भरा रहा। आयोजन सफल रहा, मेहमान जुटे, कैमरे चमके और सबसे अहम लालू प्रसाद यादव खुद बड़े बेटे के आवास पहुंचे। यही वजह है कि तेज प्रताप यादव पूरे कार्यक्रम के दौरान गदगद नजर आए।
इस भोज पर सबकी निगाहें टिकी थीं कि क्या लालू परिवार एक साथ दिखाई देगा। सवाल यह भी था कि क्या तेज प्रताप और तेजस्वी यादव के बीच जमी बर्फ पिघलेगी? लालू यादव का आना तेज प्रताप के लिए संबल और सम्मान दोनों साबित हुआ, लेकिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की गैरहाजिरी ने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
तेज प्रताप यादव ने खुद एक दिन पहले राबड़ी आवास जाकर मां राबड़ी देवी, पिता लालू यादव और छोटे भाई तेजस्वी यादव को सपरिवार भोज का न्योता दिया था। लालू यादव ने इस न्योते को स्वीकार कर साफ संकेत दिया कि पारिवारिक रिश्तों में पूरी तरह से दरार नहीं आई है। भोज में पहुंचकर उन्होंने बेटे को आशीर्वाद दिया, दही-चूड़ा खाया और कुछ देर रुककर राजनीतिक माहौल को भी महसूस किया। लालू की मौजूदगी को तेज प्रताप के लिए ‘मान रखे जाने’ के तौर पर देखा जा रहा है।
आयोजन के दौरान तेज प्रताप यादव खासे उत्साहित दिखे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने आत्मविश्वास से कहा, “तेजू भैया का भोज है, सुपरहिट तो होगा ही।” उन्होंने अपने माता-पिता को भगवान का दर्जा देते हुए कहा कि बुजुर्गों का आशीर्वाद उनके साथ है। लालू यादव के आने से वे भावुक भी दिखे और बोले कि अब वह आशीर्वाद लेकर पूरे बिहार की यात्रा पर निकलेंगे।
जब पत्रकारों ने तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति पर सवाल किया तो तेज प्रताप अपने चिर-परिचित अंदाज में टाल गए। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि छोटे भाई को न्योता भेजा गया था, लेकिन वो थोड़ा देर से उठते हैं। हालांकि, खबर लिखे जाने तक तेजस्वी यादव भोज में नहीं पहुंचे थे। इसी गैरमौजूदगी ने यह सवाल फिर हवा में तैर दिया कि क्या दोनों भाइयों के रिश्तों में अभी भी तल्खी बरकरार है।
दूसरी ओर, इस भोज में एनडीए नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक रंग और गहरा कर दिया। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा समेत कई भाजपा और एनडीए नेता तेज प्रताप यादव के दरवाजे पर पहुंचे। यही नहीं, मकर संक्रांति के मौके पर विजय सिन्हा ने अपने आवास पर भी दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया, जहां तेज प्रताप यादव की मौजूदगी ने सबका ध्यान खींच लिया।
विजय सिन्हा के आवास पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान जब तेज प्रताप यादव के एनडीए या भाजपा में शामिल होने को लेकर सवाल उठा तो विजय सिन्हा ने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा, “वक्त पर सब पता चल जाएगा।” इसके बाद उन्होंने “सकारात्मक ऊर्जा के साथ मिलकर बिहार को आगे बढ़ाने” की बात कही, जिसे तेज प्रताप को लेकर एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, तेज प्रताप यादव का राजनीतिक सफर पिछले कुछ वर्षों से उतार-चढ़ाव भरा रहा है। एक वायरल तस्वीर के बाद उन्हें लालू यादव ने न सिर्फ राजद से, बल्कि परिवार से भी अलग कर दिया था। बाद में तेज प्रताप ने अपनी अलग पार्टी बनाई और विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस दौरान तेजस्वी यादव के साथ उनके रिश्तों में खटास की खबरें भी सामने आती रहीं।
अब मकर संक्रांति के दही-चूड़ा भोज ने तेज प्रताप यादव को फिर से राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। लालू यादव का आशीर्वाद, तेजस्वी की दूरी और एनडीए नेताओं की नजदीकी तीनों मिलकर बिहार की राजनीति में नए संकेत दे रहे हैं। सवाल यही है कि क्या तेज प्रताप यादव किसी बड़े राजनीतिक फैसले की ओर बढ़ रहे हैं या यह सब फिलहाल सिर्फ सियासी संकेतों और अटकलों का खेल है। जवाब शायद जल्द ही सामने आएगा।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।