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ECI On Political Advertisement: बिना जांच के चुनावी प्रचार पर सख्ती, सोशल मीडिया पर भी चुनाव आयोग की कड़ी नजर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Fri, 20 Mar 2026 06:54 PM IST
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सार

चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे अपने सभी तरह के चुनाव प्रचार को समय से मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति के पास भेज दें। चुनाव आयोग का यह कदम चुनाव प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए उठाया गया है, ताकि वोटर्स तक सही और विश्वसनीय जानकारी पहुंचे।

ECI directs parties to get political advertisements certified by MCMC before release
चुनाव आयोग - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग (ईसीआई) ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को निर्देश दिया है कि वे अपने किसी भी राजनीतिक विज्ञापन को जारी करने से पहले उसकी जांच और मंजूरी जरूर लें। यह नियम टीवी, रेडियो, सोशल मीडिया, वेबसाइट, ई-पेपर, बल्क एसएमएस और वॉइस मैसेज जैसे सभी इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर लागू होगा। आयोग ने साफ कहा है कि बिना 'प्री-सर्टिफिकेशन' के कोई भी राजनीतिक विज्ञापन जारी नहीं किया जा सकता।
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MCMC के पास भेजें अपने विज्ञापन- चुनाव आयोग
इसके लिए राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को अपने विज्ञापन मीडिया प्रमाणीकरण एवं निगरानी समिति (एमसीएमसी) के पास भेजने होंगे। यह कमेटी यह जांच करेगी कि विज्ञापन में कोई गलत जानकारी, भ्रामक दावा या एआई से बना फर्जी कंटेंट तो नहीं है। हाल के समय में एआई और फेक न्यूज के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए यह कदम काफी अहम माना जा रहा है, ताकि मतदाताओं को गुमराह होने से बचाया जा सके।

फर्जी अकाउंट्स और गलत प्रचार पर रखी जा सकेगी नजर
चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि उम्मीदवारों को अपने सभी असली (ऑफिशियल) सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी नामांकन के समय देनी होगी। इससे फर्जी अकाउंट्स और गलत प्रचार पर नजर रखी जा सकेगी। इसके अलावा, सभी राजनीतिक दलों को अपने चुनाव प्रचार पर हुए खर्च का पूरा हिसाब भी देना होगा। खासकर इंटरनेट और सोशल मीडिया पर किए गए खर्च की जानकारी चुनाव खत्म होने के 75 दिनों के अंदर आयोग को देनी होगी।

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पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव और छह में उपचुनाव
अगर किसी पार्टी या उम्मीदवार को एमसीएमसी के फैसले से आपत्ति होती है, तो राज्य स्तर पर एक अपील समिति भी बनाई गई है, जहां वे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। चुनाव आयोग ने एमसीएमसी को 'पेड न्यूज' यानी पैसे देकर खबर छपवाने या दिखाने के मामलों पर भी कड़ी नजर रखने की जिम्मेदारी दी है। बता दें कि अप्रैल में असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं, जबकि छह राज्यों में उपचुनाव भी होंगे। इन सभी के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

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