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वन्यजीवों के घर उजाड़े तो गिरेगी गाज: चंबल अभयारण्य में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; तीन राज्यों को नोटिस

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवीन पारमुवाल Updated Fri, 20 Mar 2026 06:09 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल चंबल सेंचुरी में हो रहे अवैध रेत खनन पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि वन्यजीवों के आवास को नुकसान पहुंचाने पर कड़ी कार्रवाई होगी और इसके लिए जिम्मेदार अफसरों को भी सजा भुगतनी पड़ेगी।

supreme court on illegal sand mining in national chambal sanctuary notice issued rajasthan mp up govt
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध रेत खनन को लेकर गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि संरक्षित क्षेत्र में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नष्ट करना एक गंभीर अपराध है। इसके लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम समेत कई अन्य कानूनों के तहत सजा और जुर्माने का प्रावधान है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर अवैध खनन नहीं रुका, तो संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
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अफसरों पर होगी सीधी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के वन, खनन और जल संसाधन विभागों के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे हैं। उनकी लापरवाही और सुस्ती की वजह से ही चंबल नदी के किनारे अवैध खनन फल-फूल रहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन अधिकारियों को इस विनाश में मदद करने का दोषी माना जाएगा। अगर वे अवैध खनन को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाते हैं, तो उन पर कानूनी गाज गिरना तय है।
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दुर्लभ जीवों के अस्तित्व पर आया संकट
नेशनल चंबल सेंचुरी करीब 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैली है और यह तीन राज्यों की सीमाओं को छूती है। यह इलाका लुप्तप्राय घड़ियालों, लाल सिर वाले कछुओं और गंगा की दुर्लभ डॉल्फिन का मुख्य ठिकाना है। कोर्ट ने उन मीडिया रिपोर्टों पर संज्ञान लिया है जिनमें बताया गया कि कैसे रेत खनन की वजह से इन जीवों के अंडे देने और रहने की जगह खत्म हो रही है। कोर्ट ने इस मामले में खुद संज्ञान लेते हुए इसे एक गंभीर मुद्दा माना है।

राजस्थान सरकार के फैसले पर भी नजर
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार द्वारा अभयारण्य की करीब 732 हेक्टेयर जमीन को संरक्षित श्रेणी से बाहर करने के फैसले का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि इन सभी पहलुओं पर राज्य सरकारों के जवाब मिलने के बाद विस्तार से विचार किया जाएगा। कोर्ट यह देखना चाहता है कि क्या सीमा बदलने के इस फैसले से वन्यजीवों के आवास पर कोई बुरा असर पड़ा है।

अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) को भी नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दो वकीलों को न्याय मित्र नियुक्त किया है ताकि वे इस मामले में अदालत की मदद कर सकें। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पिछले साल जिस इलाके में घड़ियाल छोड़े थे, वहां भी अवैध खनन की खबरें आई हैं। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को होगी, जिसमें राज्य सरकारों को अपना पक्ष रखना होगा।

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