{"_id":"69c26f8938b55c9a1e024cbf","slug":"supreme-court-hearing-on-ed-vs-bengal-government-levels-serious-allegations-against-ed-poses-sharp-questions-2026-03-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट में ईडी बनाम ममता सरकार: ED के अफसरों पर लगे गंभीर आरोप, सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछे तीखे सवाल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट में ईडी बनाम ममता सरकार: ED के अफसरों पर लगे गंभीर आरोप, सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछे तीखे सवाल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Tue, 24 Mar 2026 04:33 PM IST
विज्ञापन
सार
I-PAC Raid Controversy: ईडी और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच टकराव का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। ईडी ने आरोप लगाया कि आई-पैक दफ्तर में छापे के दौरान ममता बनर्जी और पुलिस ने बाधा डाली। राज्य सरकार ने याचिका को अस्वीकार्य बताया और संघीय ढांचे का हवाला दिया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी। आइए इस पूरे मामले को जानते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का सवाल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन
विस्तार
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई में बाधा डालने के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा कानूनी टकराव देखने को मिला। शीर्ष अदालत ने इस मामले में मंगलवार को सुनवाई की, जिसमें केंद्र और राज्य के अधिकारों, जांच एजेंसियों की भूमिका और संघीय ढांचे जैसे गंभीर मुद्दों पर बहस हुई। अदालत ने फिलहाल सुनवाई खत्म करते हुए मामले को अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया है।
इस मामले में ईडी ने आरोप लगाया है कि जब वह तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक सलाहकार संगठन आई-पैक के दफ्तर में तलाशी कर रही थी, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस ने कार्रवाई में बाधा डाली। इसी को लेकर ED ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। मामले की सुनवाई जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने की।
क्या है पूरा विवाद और ईडी का आरोप क्या है?
ईडी का कहना है कि वह मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच के तहत आई-पैक के दफ्तर में सर्च ऑपरेशन कर रही थी। इसी दौरान राज्य सरकार और पुलिस ने उनके काम में दखल दिया और जांच प्रक्रिया को प्रभावित किया। ईडी ने इसे कानून के राज पर हमला बताया और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की।
ये भी पढ़ें- Supreme Court: 'धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त होगा', सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
राज्य सरकार ने क्या दलील दी?
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि ईडी की याचिका कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है। उनका तर्क था कि कोई केंद्रीय एजेंसी सीधे राज्य सरकार के खिलाफ इस तरह की याचिका नहीं दायर कर सकती। उन्होंने कहा कि ऐसा करना देश के संघीय ढांचे के लिए खतरनाक होगा और इससे राज्यों के अधिकार कमजोर होंगे।
क्या सुप्रीम कोर्ट में अधिकारों को लेकर सवाल उठे?
सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि क्या ईडी या उसके अधिकारी अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं। राज्य पक्ष ने कहा कि ईडी कोई व्यक्ति या नागरिक नहीं है, इसलिए उसे मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का दावा करने का अधिकार नहीं है। वहीं, अदालत ने यह भी पूछा कि क्या ईडी के अधिकारी व्यक्तिगत रूप से अपने अधिकारों के आधार पर याचिका दायर कर सकते हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि अगर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री दखल दें, तो क्या अधिकारी राज्य पुलिस के पास जा सकते हैं।
क्या मौलिक आधिकार का मुद्दा बना?
राज्य सरकार के वकीलों ने कहा कि ईडी का काम संवैधानिक नहीं बल्कि वैधानिक है, इसलिए उसके पास मौलिक अधिकारों का दावा करने का आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर किसी अधिकारी को काम में बाधा आती है, तो उसके लिए अलग कानूनी प्रक्रिया है, न कि सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करना।
ये भी पढ़ें- Supreme Court: 'अब भारतीय सेना की महिला अफसरों को स्थायी कमीशन', शॉर्ट सर्विस मामले में अदालत का अहम
ईडी और केंद्र सरकार की क्या दलील रही?
केंद्र की ओर से कहा गया कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें कानून के शासन का सवाल जुड़ा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अदालत को इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उनका कहना था कि अगर जांच एजेंसियों को काम करने से रोका जाएगा, तो इससे पूरे सिस्टम पर असर पड़ेगा।
क्या चुनावी समय को लेकर भी उठे सवाल?
सुनवाई के दौरान यह भी मुद्दा उठा कि मामला चुनाव से ठीक पहले क्यों लाया गया। अदालत ने साफ किया कि वह चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करना चाहती, लेकिन अगर कोई गंभीर आरोप है तो उसे नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि समय का सवाल महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
क्या राज्य और केंद्र के टकराव का मामला बना?
यह मामला सिर्फ एक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि केंद्र और राज्य के अधिकारों के टकराव का उदाहरण बन गया। राज्य सरकार ने कहा कि यदि केंद्रीय एजेंसियों को इस तरह की छूट दी गई, तो यह राज्यों की स्वायत्तता पर असर डालेगा।
अदालत ने फिलहाल क्या फैसला दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई पूरी करते हुए कहा कि मामले की आगे की सुनवाई अप्रैल में होगी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं दिया। अब इस केस में आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि ईडी की याचिका स्वीकार होगी या नहीं।
अन्य वीडियो-
Trending Videos
इस मामले में ईडी ने आरोप लगाया है कि जब वह तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक सलाहकार संगठन आई-पैक के दफ्तर में तलाशी कर रही थी, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस ने कार्रवाई में बाधा डाली। इसी को लेकर ED ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। मामले की सुनवाई जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने की।
विज्ञापन
विज्ञापन
क्या है पूरा विवाद और ईडी का आरोप क्या है?
ईडी का कहना है कि वह मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच के तहत आई-पैक के दफ्तर में सर्च ऑपरेशन कर रही थी। इसी दौरान राज्य सरकार और पुलिस ने उनके काम में दखल दिया और जांच प्रक्रिया को प्रभावित किया। ईडी ने इसे कानून के राज पर हमला बताया और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की।
ये भी पढ़ें- Supreme Court: 'धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त होगा', सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
राज्य सरकार ने क्या दलील दी?
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि ईडी की याचिका कानूनी रूप से स्वीकार्य नहीं है। उनका तर्क था कि कोई केंद्रीय एजेंसी सीधे राज्य सरकार के खिलाफ इस तरह की याचिका नहीं दायर कर सकती। उन्होंने कहा कि ऐसा करना देश के संघीय ढांचे के लिए खतरनाक होगा और इससे राज्यों के अधिकार कमजोर होंगे।
क्या सुप्रीम कोर्ट में अधिकारों को लेकर सवाल उठे?
सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि क्या ईडी या उसके अधिकारी अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं। राज्य पक्ष ने कहा कि ईडी कोई व्यक्ति या नागरिक नहीं है, इसलिए उसे मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का दावा करने का अधिकार नहीं है। वहीं, अदालत ने यह भी पूछा कि क्या ईडी के अधिकारी व्यक्तिगत रूप से अपने अधिकारों के आधार पर याचिका दायर कर सकते हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पूछा कि अगर छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री दखल दें, तो क्या अधिकारी राज्य पुलिस के पास जा सकते हैं।
क्या मौलिक आधिकार का मुद्दा बना?
राज्य सरकार के वकीलों ने कहा कि ईडी का काम संवैधानिक नहीं बल्कि वैधानिक है, इसलिए उसके पास मौलिक अधिकारों का दावा करने का आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर किसी अधिकारी को काम में बाधा आती है, तो उसके लिए अलग कानूनी प्रक्रिया है, न कि सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करना।
ये भी पढ़ें- Supreme Court: 'अब भारतीय सेना की महिला अफसरों को स्थायी कमीशन', शॉर्ट सर्विस मामले में अदालत का अहम
ईडी और केंद्र सरकार की क्या दलील रही?
केंद्र की ओर से कहा गया कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें कानून के शासन का सवाल जुड़ा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अदालत को इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उनका कहना था कि अगर जांच एजेंसियों को काम करने से रोका जाएगा, तो इससे पूरे सिस्टम पर असर पड़ेगा।
क्या चुनावी समय को लेकर भी उठे सवाल?
सुनवाई के दौरान यह भी मुद्दा उठा कि मामला चुनाव से ठीक पहले क्यों लाया गया। अदालत ने साफ किया कि वह चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करना चाहती, लेकिन अगर कोई गंभीर आरोप है तो उसे नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि समय का सवाल महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
क्या राज्य और केंद्र के टकराव का मामला बना?
यह मामला सिर्फ एक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि केंद्र और राज्य के अधिकारों के टकराव का उदाहरण बन गया। राज्य सरकार ने कहा कि यदि केंद्रीय एजेंसियों को इस तरह की छूट दी गई, तो यह राज्यों की स्वायत्तता पर असर डालेगा।
अदालत ने फिलहाल क्या फैसला दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई पूरी करते हुए कहा कि मामले की आगे की सुनवाई अप्रैल में होगी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं दिया। अब इस केस में आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि ईडी की याचिका स्वीकार होगी या नहीं।
अन्य वीडियो-
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन