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Supreme Court: 'एक साल में निपटाएं केस', आतंकवाद विरोधी मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 17 राज्यों को दिया आदेश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Tue, 24 Mar 2026 07:34 PM IST
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सार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र समेत 17 राज्यों से कहा कि विशेष एनआईए अदालतों के माध्यम से यूएपीए मामलों के मुकदमों को एक साल के अंदर निपटाया जाए। कोर्ट ने प्रत्येक मामले की औसतन एक महीने में सुनवाई और समर्पित न्यायाधीश व विशेष लोक अभियोजक तैनात करने का निर्देश दिया। 

Supreme Court States should endeavor that dedicated NIA courts complete trial of UAPA cases in one year
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार

आतंकवाद विरोधी मामलों में सख्ती दिखाते हुए सप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा निर्देश दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र समेत 17 राज्यों से कहा कि वे विशेष एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) अदालतों के माध्यम से यूएपीए यानी आतंकवाद विरोधी मामलों के मुकदमों को एक साल के अंदर निपटाने का प्रयास करें। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि अगर किसी राज्य में 10 या उससे अधिक एनआईए मामले लंबित हैं, तो वहां विशेष एनआईए अदालतें बनाई जाएं।

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सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि अदालतों में समर्पित न्यायाधीश और विशेष लोक अभियोजक तैनात किए जाएं ताकि मुकदमे नियमित रूप से चलें। इतना ही नहीं कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक एनआईए मामले को औसतन एक महीने में निपटाया जाए, भले कभी-कभी किसी मामले में एक महीने से अधिक समय लगे। इसके लिए दैनिक सुनवाई और समर्पित संसाधन जरूरी हैं।
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केंद्र सरकार का वित्तीय सहयोग
पीठ ने नोट किया कि केंद्र सरकार ने प्रत्येक विशेष एनआईए अदालत के लिए एक बार के लिए एक करोड़ रुपये (गैर-निरंतर खर्च), सालाना एक करोड़ रुपये (निरंतर खर्च) का वित्तीय सहायता देने का वादा किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सहायता राज्यों को सामान्य मिलान फंड की तरह नहीं देनी चाहिए, क्योंकि कुछ राज्य राजस्व के मामले में कमजोर हैं और उन्हें अन्य प्राथमिकताएं भी हैं।

राज्यों और उच्च न्यायालयों को निर्देश
अधिवक्ताओं और अधिवक्ता जनरल से कहा गया कि वे जल्द से जल्द एनआईए अदालतों की स्थापना सुनिश्चित करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि अन्य विशेष अदालतों जैसे NDPS और MCOCA जैसी अदालतों को भी बढ़ावा दिया जाए ताकि गंभीर अपराधों के मामलों का निपटान जल्दी हो सके।

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इन राज्यों ने दी दलील, सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मामले में दिल्ली सरकार ने बताया कि यहां रॉस एवेन्यू कोर्ट परिसर के दूसरे तल पर 15 विशेष अदालतें शुरू की जाएंगी और एनआईए अदालतें अप्रैल 2026 तक संचालन के लिए तैयार होंगी। कर्नाटक और तमिलनाडु के अधिवक्ता जनरल ने बताया कि उनके राज्यों में 10 या उससे अधिक एनआईए मामले लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कहा कि वे अपने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से सलाह कर अधिक से अधिक एनआईए अदालतें स्थापित करें और सुनिश्चित करें कि न्यायाधीश अन्य मामलों में व्यस्त न हों।

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