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Congress: 'परिसीमन से पहले महिला आरक्षण कानून में संशोधन की जल्दबाजी क्यों?' खरगे ने सरकार से पूछा सवाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Nirmal Kant Updated Thu, 26 Mar 2026 06:02 PM IST
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सार

Congress: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पूछा कि महिला आरक्षण कानून में संशोधन को लेकर सरकार को जल्दबाजी क्यों है। उन्होंने आग्रह किया कि इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक अप्रैल के चुनाव के बाद ही होनी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को लिखे पत्र में खरगे ने क्या कहा, पढ़िए-

Why is govt in 'hurry' to amend women's quota law, must call all-party meeting after polls: Kharge
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने पूछा कि सरकार महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने की इतनी जल्दबाजी क्यों कर रही है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष खरगे ने यह भी दोहराया कि अप्रैल में विधानभा चुनाव खत्म होने के बाद इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए। इससे पहले केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने नारी वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधन के विचार पर कांग्रेस के साथ बैठक करने को कहा था। इसी के जवाब में खरगे का यह पत्र आया है। 
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पत्र में कांग्रेस अध्यक्ष ने क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, 'मुझे आपका पत्र 26 मार्च 2026 को मिला। विपक्षी दल पहले ही 24 मार्च 2026 को आपको पत्र लिख चुके हैं कि 29 अप्रैल 2026 के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, जिसमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के लागू करने पर चर्चा हो'। उन्होंने कहा कि वह समझ नहीं पा रहे हैं कि सरकार तीस महीने बाद ही इस कानून में बदलाव को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखा रही है। उन्होंने कहा, सभी नेता इस समय चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, इसलिए बैठक चुनाव के बाद ही होनी चाहिए। 
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उन्होंने कहा कि इससे 2029 के लोकसभा चुनाव से इस कानून के लागू होने पर कोई असर नहीं पड़ेगा। खरगे यह भी कहा कि 21 सितंबर 2023 को राज्यसभा में चर्चा के दौरान उन्होंने खुद इस कानून को तुरंत लागू करने की मांग की थी। लेकिन तब सरकार ने उनकी बात नहीं मानी थी। उन्होंने फिर से 29 अप्रैल 2026 के बाद किसी भी समय सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया। 

कई विपक्षी दलों ने सरकार को लिखा पत्र
कई विपक्षी दलों ने भी मंगलवार को सरकार पत्र लिखा था। उन्होंने महिला आरक्षण कानून को लागू करने के तरीकों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। विपक्षी दलों ने अपने पत्र में कहा था कि यह बैठक अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद बाद होनी चाहिए। इससे पहले, 16 मार्च 2026 को एक पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी, ताकि नारी वंदन अधिनियम, 2023 को लागू करने का रोडमैप तय किया जा सके। इस पत्र में कई विपक्षी दलों के नेताओं के हस्ताक्षर थे। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इसमें शामिल नहीं थी। 

यह घटनाक्रम तब सामने आया, जब संकेत मिले कि सरकार लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए विधेयक ला सकती है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि सरकार सितंबर 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन विधेयक में और संशोधन करने की योजना बना रही है। यह कानून आधिकारिक तौर पर संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम के नाम से जाना जाता है। 

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कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और कहा कि अब वह परिसीमन और जनगणना पूरी किए बिना ही संशोधन के जरिये महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह कदम सरकार की विदेश नीति की विफलता और देश में तरल प्राकृतिक गैस (एलपीजी) व ऊर्जा संकट जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश है। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा, सरकार लोकसभा और विधानसभाओं का आकार 50 फीसदी तक बढ़ाने की योजना भी बना रही है, जिस पर गहन चर्चा की जरूरत है। 

महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधासनभाओं में 33 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान 2023 में संविधान संशोधन के जरिये लाया गया था। हालांकि, यह परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होगा। 


 
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