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ED: CISF कर्मी ने अपने ही साथियों के NPS राशि का किया गबन, शादी-पुराना कर्ज चुकाने व कारोबार में लगाया पैसा
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Fri, 30 Jan 2026 04:26 PM IST
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गोवा में ईडी की कार्रवाई
- फोटो : ANI
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सीआईएसएफ कर्मी ने अपने ही सहयोगियों के 'एनपीएस' खाते के अंशदान की राशि का गबन कर दिया। बेईमानी से और बिना किसी अधिकार के अन्य सेवारत और गैर-सेवारत (इस्तीफा दे चुके) सीआईएसएफ कर्मियों के एनपीएस खातों में वह राशि स्थानांतरित कर दी गई। आरोपी कर्मी ने अंशदान का पैसा 'शादी करने, पुराना कर्ज चुकाने, मेडिकल खर्च और कारोबार में पैसा लगा दिया।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने राष्ट्रीय औद्योगिक सुरक्षा अकादमी, हैदराबाद स्थित सीआईएसएफ के पूर्व सहायक उप निरीक्षक (एएसआई)/मंत्रालयी कर्मचारी रूप सिंह मीणा के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया था। जांच एजेंसी ने इस बाबत रंगारेड्डी न्यायालय, हैदराबाद में अभियोग शिकायत (पीसी) दायर की गई और न्यायालय ने 28 जनवरी को पीसी का संज्ञान लिया है।
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तेलंगाना पुलिस द्वारा 18.04.2023 को आईपीसी, 1860 की धारा 409 और 420 के तहत दर्ज एफआईआर संख्या 418/2023 के आधार पर ईडी ने इस केस की जांच प्रारंभ की थी। रूप सिंह मीणा पर सीआईएसएफ कर्मियों के राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) अंशदान की राशि को बेईमानी से और बिना किसी अधिकार के अन्य सेवारत और गैर-सेवारत (इस्तीफा दे चुके) सीआईएसएफ कर्मियों के एनपीएस खातों में स्थानांतरित करने का आरोप है। स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या (एसटी) के बैंक खातों के विवरण में हेरफेर किया गया। हेराफेरी के जरिए तय समय से पहले निकासी का अनुरोध कर बैंक खातों से एनपीएस की गबन की गई धनराशि निकाल ली गई। यह गबन रूप सिंह मीना (तत्कालीन हेड कांस्टेबल/क्लर्क) द्वारा किया गया। वह एनआईएसए, हैदराबाद के एनपीएस अनुभाग में तैनात था।
आरोपी के पास, सीडीडीओ सीआईएसएफ एनआईएसए, हैदराबाद के सभी ग्राहकों के एनपीएस खातों तक पूर्ण पहुंच के लिए लॉगिन क्रेडेंशियल थे। इस तरह, रूप सिंह मीणा ने 60,26,321 रुपये की राशि का गबन किया। इस मामले की जांच जून 2025 में सीबीआई और एसीबी, हैदराबाद को सौंप दी गई थी। ईडी की जांच में पता चला कि रूप सिंह मीणा ने एनपीएस की हेराफेरी से निकाले गए धन को लॉन्डर करने के लिए अपने नाम के साथ-साथ परिवार के सदस्यों, दोस्तों और अन्य असंबंधित व्यक्तियों (जो अपने खातों के उपयोग के वास्तविक उद्देश्य से अनभिज्ञ थे) के नाम पर कई बैंक खातों का इस्तेमाल किया।
अपराध की आय को कई बैंक खातों में जमा किया गया। आरोपी ने इसके बाद आय को अपने बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया। कुछ हिस्सा नकदी के तौर पर निकाल लिया गया। उसने अपराध की आय का एक बड़ा हिस्सा अपनी शादी के खर्च, चिकित्सा उपचार, पुराने कर्ज चुकाने, डेयरी व्यवसाय में निवेश और अन्य व्यक्तिगत खर्चों में खर्च कर दिया। ईडी ने इससे पहले पीएमएलए, 2002 की धारा 5(1) के तहत अनंतिम कुर्की आदेश संख्या 25/HYZO/2025 दिनांक 25.03.2025 के माध्यम से रूप सिंह मीणा की 80,626/- रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों की पहचान कर उन्हें कुर्क कर लिया था।