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ED: 'माइंडस्पेस' और 'इंपीरिया बिजनेस पार्क' केस में ईडी की रेड, 15 वर्ष में निवेशकों को नहीं मिला पक्का रिटर्न

Thu, 30 Jul 2026 08:42 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 30 Jul 2026 08:42 PM IST
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ED Cracks Down on Imperia Group, Seizes Cash, Luxury Cars and Key Documents
प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी। - फोटो : अमर उजाला
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम ज़ोनल ऑफिस ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 के तहत 'इंपीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड', 'इंपीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड', उनके प्रमोटर डायरेक्टरों और मौजूदा रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल के दिल्ली स्थित आठ रिहायशी व कमर्शियल ठिकानों पर छापेमारी की हैं। तलाशी अभियान के दौरान कई डिजिटल डिवाइस और अहम दस्तावेज़ ज़ब्त किए गए। इनमें आईडब्लूपीएल और आईएसएल के प्रमोटरों व डायरेक्टरों से जुड़े प्रॉपर्टी के कागजात, ऑडिट किए गए फाइनेंशियल रिकॉर्ड, टैली डेटा, फंड के गलत इस्तेमाल की जानकारी और खरीदारों द्वारा निवेश किए गए फंड का ब्योरा शामिल है। ईडी ने 50.50 लाख रुपये नकद और तीन महंगी लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की हैं।
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ईडी ने ने पीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड, इंपीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड और उनके प्रमोटर डायरेक्टरों-हरप्रीत सिंह बत्रा, ब्रजिंदर सिंह बत्रा, प्रदीप शर्मा, अविनाश सेठिया और अन्य के खिलाफ ईसीआईआर दर्ज की है। जांच एजेंसी ने हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की पुलिस द्वारा आईडब्लूपीएल और आईएसएल के डायरेक्टरों व प्रमोटरों के खिलाफ आईपीसी, 1860 के तहत दर्ज कई केसों के आधार पर जांच शुरू की है। 
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इन एफआईआर में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी, लोगों को बहला-फुसलाकर निवेश कराने, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पूरे न करने, हर महीने तय रिटर्न और लीज़ रेंटल का भुगतान न करने और दिल्ली-एनसीआर इलाके में निवेशकों का पैसा गलत तरीके से दूसरी जगह लगाने के आरोप लगाए गए हैं। ईडी को जांच के दायरे में आए प्रोजेक्ट्स के घर खरीदारों से भी कई शिकायतें मिली हैं।
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जांच में पता चला है कि आईडब्लूपीएल ने गुरुग्राम के सेक्टर 37 में 'एल्वेडोर' प्रोजेक्ट के खरीदारों से इकट्ठा किए गए फंड का इस्तेमाल अपनी दूसरी देनदारियों को पूरा करने के लिए किया। साथ ही, यह भी पाया गया कि कंपनी ने इन सीधे-सादे खरीदारों के निवेश को अपनी संबंधित कंपनियों या लोगों को लोन और एडवांस के तौर पर ट्रांसफर किया। 

आईडब्लूपीएल ने 2011 से ही खरीदारों से बुकिंग लेना शुरू कर दिया था, लेकिन 15 साल बाद भी कंपनी खरीदारों को यूनिट का कब्ज़ा देने में नाकाम रही। आईएसएल ने 'इंपीरिया माइंडस्पेस' (गुरुग्राम) और 'इंपीरिया बिजनेस पार्क' (ग्रेटर नोएडा) के कई खरीदारों से एडवांस बुकिंग ली थी। कंपनी ने उन्हें कब्ज़ा देने के साथ-साथ हर महीने 'एश्योर्ड रिटर्न' (पक्का रिटर्न) और बाद में लीज से होने वाली कमाई देने का वादा किया था, लेकिन वह अपने वादों को पूरा नहीं कर पाई। इसके अलावा, कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें एक ही यूनिट के लिए कई खरीदारों से बुकिंग ली गई, जबकि जानबूझकर बायर-बिल्डर एग्रीमेंट नहीं किए गए। 


कंपनी ने सिर्फ 'समझौता ज्ञापन' किया। इसमें यूनिट की पहचान और कब्ज़ा मिलने की समय-सीमा का कोई ज़िक्र नहीं था। फिलहाल, 'एल्वेडोर' प्रोजेक्ट समाधान प्रक्रिया (रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस) के तहत है। अब तक की जांच से पता चला है कि आईडब्लूपीएल ने 'एल्वेडोर' प्रोजेक्ट के खरीदारों से लगभग 63 करोड़ रुपये इकट्ठा किए थे। 'माइंडस्पेस' (गुरुग्राम) और 'इंपीरिया बिजनेस पार्क' (ग्रेटर नोएडा) जैसे अन्य प्रोजेक्ट्स के मामले में, अपराध से हुई कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) की रकम का पता लगाया जा रहा है। 
 
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