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‘बदनाम किया गया, झूठे आरोप लगाए गए’: आशीष बनर्जी की मौत पर पूर्व CM ममता का छलका दर्द, शुभेंदु सरकार को घेरा
Sun, 16 Aug 2026 05:54 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, कोलकाता।
आईएएनएस, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 16 Aug 2026 05:54 PM IST
सार
टीएमसी नेता आशीष बनर्जी रविवार को बीरभूम में पार्टी कार्यालय में फंदे से लटके मिले। वह पांच बार के विधायक थे। ममता बनर्जी ने उन्हें बदनाम किए जाने और झूठे भ्रष्टाचार आरोपों का सामना करने की बात कही। उन्होंने आखिरी दिनों के मानसिक दबाव पर भी चिंता जताई। ममता बनर्जी ने क्या-क्या कहा? जानिए...
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आशीष बनर्जी और ममता बनर्जी
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी के निधन पर शोक जताया है। रविवार को बीरभूम जिले में पार्टी कार्यालय में आशीष बनर्जी फंदे से लटके मिले। वह रामपुरहाट विधानसभा क्षेत्र से पांच बार के टीएमसी विधायक थे। आशीष बनर्जी की मौत के बाद राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया। टीएमसी के कई नेताओं ने भाजपा और मीडिया के एक वर्ग पर उनके खिलाफ बदनाम करने वाला अभियान चलाने का आरोप लगाया। इनमें पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी भी शामिल हैं।
ममता बोलीं- बार-बार बदनाम किया गया
ममता बनर्जी ने कहा कि आशीष बनर्जी को बार-बार बदनाम किया गया। उन पर भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाए गए। लगातार दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि आशीष जमीन से जुड़े नेता थे। अपने विधानसभा क्षेत्र और जिले के लोगों से उनका करीबी रिश्ता था। ममता ने कहा कि आखिरी दिनों में आशीष ने जिस मानसिक और भावनात्मक दबाव का सामना किया, उससे यह त्रासदी और भी दर्दनाक हो जाती है।
उन्होंने कहा, 'पांच बार के विधायक, पूर्व उपाध्यक्ष और चेयरमैन के रूप में आशीष दा ने रामपुरहाट के विकास के लिए खुद को समर्पित किया। उन्होंने लोगों के लिए कई महत्वपूर्ण काम किए। इसके बावजूद उन्हें बार-बार बदनाम किया गया, उन पर झूठे आरोप लगाए गए और लगातार दबाव में रखा गया।'
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यह भी पढ़ें: सुखबीर बादल पर हमले की NIA जांच की मांग: हरसिमरत ने गृह मंत्री को लिखा पत्र, पंजाब पुलिस पर क्यों उठे सवाल?
'राजनीतिक दुश्मनी की मानवीय कीमत पर सोचने की जरूरत'
ममता बनर्जी ने कहा कि लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में रहने के बावजूद आशीष को जिस तरह के उत्पीड़न और मानसिक दबाव से गुजरना पड़ा, उस पर सभी को विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अपने लंबे सार्वजनिक जीवन के बावजूद उन्होंने जिस उत्पीड़न और मानसिक दबाव का सामना किया, वह सोचने पर मजबूर करता है कि राजनीतिक दुश्मनी की मानवीय कीमत क्या होती है।'
शिक्षा और जनसेवा को समर्पित रहा जीवन: ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने आशीष बनर्जी को ऐसे नेता के तौर पर याद किया, जिन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा और जनसेवा के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि आशीष की कमी हमेशा महसूस होगी। इससे पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आशंका जताई कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर मौजूद भ्रष्ट लोगों ने संभवतः उन्हें डराया-धमकाया हो या किसी ने उन्हें ब्लैकमेल किया हो। शुभेंदु अधिकारी ने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद आशीष बनर्जी के साथ अपने सौहार्दपूर्ण संबंधों का भी उल्लेख किया था।
अभिषेक बनर्जी ने भाजपा सरकार को ठहराया जिम्मेदार
इस बीच, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर इस दुखद घटना के लिए भारतीय जनता पार्टी और मीडिया के एक वर्ग को जिम्मेदार ठहराया है। आशीष बनर्जी के शव के पास से एक सुसाइड नोट मिला था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि राजनीति में आकर उनसे गलती हुई और वे अपने जीवन में कभी किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहे।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि बिना किसी सबूत के बेबुनियाद आरोप लगाकर किसी की छवि खराब करना और जनता की अदालत में दोषी ठहराना बेहद खतरनाक है। उन्होंने कहा कि राजनीति और पत्रकारिता की भी एक सीमा होनी चाहिए, क्योंकि राजनीतिक लड़ाइयां तो आती-जाती रहती हैं लेकिन किसी की जान वापस नहीं आ सकती। आशीष बनर्जी ने रामपुरहाट और बीरभूम क्षेत्र में दशकों तक ईमानदारी और सादगी के साथ लोगों की सेवा की थी, और उनके इस तरह जाने से पूरा प्रदेश दुखी है।
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ममता बोलीं- बार-बार बदनाम किया गया
ममता बनर्जी ने कहा कि आशीष बनर्जी को बार-बार बदनाम किया गया। उन पर भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाए गए। लगातार दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा कि आशीष जमीन से जुड़े नेता थे। अपने विधानसभा क्षेत्र और जिले के लोगों से उनका करीबी रिश्ता था। ममता ने कहा कि आखिरी दिनों में आशीष ने जिस मानसिक और भावनात्मक दबाव का सामना किया, उससे यह त्रासदी और भी दर्दनाक हो जाती है।
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उन्होंने कहा, 'पांच बार के विधायक, पूर्व उपाध्यक्ष और चेयरमैन के रूप में आशीष दा ने रामपुरहाट के विकास के लिए खुद को समर्पित किया। उन्होंने लोगों के लिए कई महत्वपूर्ण काम किए। इसके बावजूद उन्हें बार-बार बदनाम किया गया, उन पर झूठे आरोप लगाए गए और लगातार दबाव में रखा गया।'
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'राजनीतिक दुश्मनी की मानवीय कीमत पर सोचने की जरूरत'
ममता बनर्जी ने कहा कि लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में रहने के बावजूद आशीष को जिस तरह के उत्पीड़न और मानसिक दबाव से गुजरना पड़ा, उस पर सभी को विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अपने लंबे सार्वजनिक जीवन के बावजूद उन्होंने जिस उत्पीड़न और मानसिक दबाव का सामना किया, वह सोचने पर मजबूर करता है कि राजनीतिक दुश्मनी की मानवीय कीमत क्या होती है।'
शिक्षा और जनसेवा को समर्पित रहा जीवन: ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने आशीष बनर्जी को ऐसे नेता के तौर पर याद किया, जिन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा और जनसेवा के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि आशीष की कमी हमेशा महसूस होगी। इससे पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आशंका जताई कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर मौजूद भ्रष्ट लोगों ने संभवतः उन्हें डराया-धमकाया हो या किसी ने उन्हें ब्लैकमेल किया हो। शुभेंदु अधिकारी ने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद आशीष बनर्जी के साथ अपने सौहार्दपूर्ण संबंधों का भी उल्लेख किया था।
अभिषेक बनर्जी ने भाजपा सरकार को ठहराया जिम्मेदार
इस बीच, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर इस दुखद घटना के लिए भारतीय जनता पार्टी और मीडिया के एक वर्ग को जिम्मेदार ठहराया है। आशीष बनर्जी के शव के पास से एक सुसाइड नोट मिला था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि राजनीति में आकर उनसे गलती हुई और वे अपने जीवन में कभी किसी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहे।
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि बिना किसी सबूत के बेबुनियाद आरोप लगाकर किसी की छवि खराब करना और जनता की अदालत में दोषी ठहराना बेहद खतरनाक है। उन्होंने कहा कि राजनीति और पत्रकारिता की भी एक सीमा होनी चाहिए, क्योंकि राजनीतिक लड़ाइयां तो आती-जाती रहती हैं लेकिन किसी की जान वापस नहीं आ सकती। आशीष बनर्जी ने रामपुरहाट और बीरभूम क्षेत्र में दशकों तक ईमानदारी और सादगी के साथ लोगों की सेवा की थी, और उनके इस तरह जाने से पूरा प्रदेश दुखी है।