नवजात शिशु मुहैया कराने वाला रैकेट: गरीब मां-बाप से लेते थे नवजात, लड़की 3.5 लाख तो 4.5 लाख में देते थे लड़का
ईडी ने हैदराबाद में अवैध सरोगेसी रैकेट चलाने के आरोप में डॉ. नम्रता को गिरफ्तार किया। गरीब माता-पिता से नवजात लेकर निःसंतान दंपतियों को बेचा जाता था, लड़की ₹3.5 लाख, लड़का ₹4.5 लाख में। मनी लॉन्ड्रिंग और बाल तस्करी के आरोप, 26 फरवरी तक न्यायिक हिरासत।
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने डॉ. अथुलुरी नम्रता उर्फ पचीपल्ली नम्रता को गिरफ्तार किया है। डॉ. नम्रता, जो 'यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी एंड रिसर्च सेंटर' चलाती हैं, अपने क्लिनिक पर सरोगेसी रैकेट को अंजाम दे रही थी। वे निःसंतान दंपतियों को नवजात शिशु मुहैया करा रही थीं। नवजात शिशुओं को गरीब और कमजोर माता-पिता से प्राप्त किया गया। ये ऐसे मां बाप थे, जो बच्चे का पालन-पोषण करने में असमर्थ थे और गर्भपात कराना चाहते थे। ऐसे माता-पिता से नवजात लेकर निःसंतान दंपतियों को 3.5 लाख रुपये में लड़की और 4.5 लाख रुपये में लड़का दिया जाता था। कई दंपतियों से भारी राशि भी वसूली गई। सेरोगेसी के इस रैकेट में क्लिनिक के कर्मचारी व एजेंट भी शामिल रहे।
ईडी ने डॉ. अथुलुरी नम्रता को 12 फरवरी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी एंड रिसर्च सेंटर के नाम से चलाए जा रहे उनके अवैध सरोगेसी रैकेट की जांच के दौरान की गई। ईडी ने हैदराबाद के गोपालपुरम पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश, अवैध सरोगेसी और बाल तस्करी के कई मामलों में दर्ज एफआईआर के आधार पर इस केस की जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान पिछले साल डॉ. पचीपल्ली नम्रता सहित कई लोगों को लोकल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन्हें 27 नवंबर को जमानत पर रिहा कर दिया गया। जांच के दौरान डॉ. नम्रता और उनके सहयोगियों के विभिन्न परिसरों पर तलाशी ली गई। इसके परिणामस्वरूप इस रैकेट में उनकी संलिप्तता को दर्शाने वाले दस्तावेज जब्त किए गए। पता चला कि कई मामले दर्ज होने से डॉ. नम्रता का मेडिकल लाइसेंस निलंबित कर दिया गया था। इसके बावजूद उन्होंने फर्जी सरोगेसी रैकेट जारी रखा।
ईडी की जांच में पता चला कि डॉ. नम्रता ने सरोगेट मां के माध्यम से बच्चा पैदा कराने का वादा करके निःसंतान दंपतियों से बड़ी रकम वसूली। प्रक्रिया को वास्तविक दिखाने के लिए, उनके युग्मकों को सरोगेट मां में प्रत्यारोपित करने के लिए एकत्र किया गया। हालांकि, नवजात शिशुओं को गरीब और कमजोर माता-पिता से प्राप्त किया गया, जो बच्चे का पालन-पोषण करने में असमर्थ थे। वे गर्भपात कराना चाहते थे। इस रैकेट में शामिल एजेंट, गरीब और जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं की व्यवस्था करते थे। बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उन्हें पैसे देकर बच्चे को त्यागने के लिए राजी करते थे।
डॉ. नम्रता एक बच्ची के लिए लगभग 3.5 लाख रुपये और एक बच्चे के लिए 4.5 लाख रुपये लेती थीं। ये प्रसव उनके विशाखापत्तनम स्थित अस्पताल में कराए जाते थे। वजह, उनके अपने सिकंदराबाद अस्पताल का लाइसेंस अधिकारियों द्वारा रद्द कर दिया गया था। नगर निगम को भेजी गई जन्म रिपोर्टों में भी उन्होंने हेराफेरी की। उनमें निःसंतान दंपतियों के नाम उनके जैविक माता-पिता के नाम के बजाय दर्ज किए गए थे।
कई दंपतियों को इसी तरह ठगा गया। उनसे चेक और नकद के रूप में बड़ी रकम वसूल की गई। इस रकम का कुछ हिस्सा एजेंटों/उप-एजेंटों को उनके कमीशन के रूप में और तस्करी किए गए बच्चों के जैविक माता-पिता को दिया गया। डॉ. नम्रता के बैंक खातों के विश्लेषण से उनकी कार्यप्रणाली की पुष्टि हुई, जिसमें पाया गया कि निःसंतान दंपतियों से एकत्र की गई धनराशि का उपयोग एजेंटों/उप-एजेंटों को भुगतान करने के लिए किया गया था और वहां से तस्करी किए गए बच्चों के जैविक माता-पिता को आगे भुगतान किया गया था। जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी डॉक्टर ने मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी का सहयोग नहीं किया। ईडी के पास ऐसे कई सबूत थे, जिनमें डॉक्टर की भूमिका की पुष्टि होती है।
हैदराबाद के नामपल्ली स्थित एमएसजे कोर्ट ने उन्हें 26 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।