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Seva Theerth: तिथि के महत्व से इतिहास, वर्तमान और कर्तव्य की परिभाषा तक; PM मोदी ने इन बड़ी बातों पर दिया जोर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 13 Feb 2026 07:20 PM IST
सार

पीएम मोदी ने सेवा तीर्थ का उद्घाटन करते हुए कहा कि नए प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम सेवा तीर्थ है। सेवा की भावना ही भारत की आत्मा है। सेवा की भावना ही भारत की पहचान है। पीएम ने आगे कहा कि नाम बदलने की पहल केवल शब्दों का बदलाव नहीं है, इन सभी प्रयासों के पीछे वैचारिक सूत्रता एक ही है- स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान। गुलामी से मुक्त निशान।

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PM Modi inaugurated of Seva Teerth, 10 Key points of PM Speech, Kartavya Bhavan, New PM House, News in Hindi
PM मोदी के संबोधन की 10 बड़ी बातें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सेवा तीर्थ परिसर का उद्घाटन किया। इसमें नया भवन प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय भी शामिल है जो कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 के नाम से जाने जाएंगे। इसके बाद उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज हम सभी एक नए इतिहास को बनते देख रहे हैं। 13 फरवरी का यह दिन, भारत की विकास यात्रा में एक नए आरंभ का साक्षी बन रहा है। शास्त्रों में विजया एकादशी का बहुत महत्व रहा है। इस दिन जिस संकल्प के साथ आगे बढ़ते हैं, उसमें विजय अवश्य प्राप्त होती है। आज हम सभी विकसित भारत का संकल्प लेकर सेवा तीर्थ में, कर्तव्य भवन में प्रवेश कर रहे हैं। अपने लक्ष्य में विजयी होने का दैवीय आशीर्वाद हमारे साथ है।

 
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PM मोदी के संबोधन की 10 बड़ी बातें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
पीएम मोदी ने आगे कहा- साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें, जो ब्रिटिश सोच की हुकूमत को लागू करने के लिए बनी थीं, वहीं आज सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं। यहां से जो फैसले होंगे, वे किसी महाराजा की सोच को नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे। इसी अमृत भावना के साथ आज मैं ये सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन भारत की जनता को समर्पित कर रहा हूं।
 
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सेवा तीर्थ के उद्घाटन पर PM मोदी की 10 बड़ी बातें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा- इस समय 21वीं सदी का पहला क्वार्टर पूरा हो चुका है। यह आवश्यक है कि विकसित भारत की कल्पना केवल नीतियों और योजनाओं में ही नहीं, बल्कि हमारे कार्यस्थलों और इमारतों में भी दिखाई दे। जहां से देश का संचालन होता है, वह जगह प्रभावी भी होनी चाहिए और प्रेरणादायी भी होनी चाहिए। जैसे, आजादी के इतने वर्षों बाद भी दिल्ली सरकार के अनेक मंत्रालय दिल्ली के 50 से भी ज्यादा स्थानों से चल रहे हैं। प्रतिवर्ष इन स्थानों के किराये में डेढ़ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे हैं। हर रोज 8-10 हजार कर्मचारियों को एक इमारत से दूसरी इमारत में जाने का लॉजिस्टिक खर्च अलग होता था। अब सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों के निर्माण से ये खर्च कम होगा, समय बचेगा और प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी।

यह भी पढ़ें - Seva Teerth: पीएम मोदी सेवा तीर्थ का लोकार्पण कर बोले- स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान, गुलामी से मुक्त निशान
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PM मोदी के संबोधन की 10 बड़ी बातें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा- साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसे पुराने भवनों में जगह की कमी थी, सुविधाओं की भी अपनी सीमाएं थीं। करीब 100 साल पुरानी ये इमारतें भीतर से जर्जर होती जा रही थीं। इसके अलावा भी अनेक चुनौतियां थीं। मैं समझता हूं कि इन चुनौतियों के बारे में बताया जाना जरूरी है। विकसित भारत की यात्रा में यह बहुत जरूरी है कि भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्त होकर आगे बढ़े। दुर्भाग्य है कि आजादी के बाद भी हमारे यहां गुलामी के प्रतीकों को ढोया जाता रहा।
 
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PM मोदी के संबोधन की 10 बड़ी बातें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा- हमारे इन फैसलों के पीछे एक गहरी भावना है, एक विजन है, जो हमारे वर्तमान, हमारे अतीत और हमारे भविष्य को भारत के गौरव से जोड़ता है। जिस जगह को पहले राजपथ के नाम से जाना जाता था, वहां न पर्याप्त सुविधाएं थीं और न ही आम नागरिकों के लिए समुचित व्यवस्था। हमने उसे कर्तव्य पथ के रूप में विकसित किया और आज वह स्थान परिवारों, बच्चों और देशभर से आने वाले नागरिकों के लिए जीवंत स्थल बन चुका है। भारतीय संस्कृति का यही विचार प्रधानमंत्री कार्यालय और सरकार का विजन है। इसलिए सेवा तीर्थ केवल एक नाम नहीं, यह एक संकल्प है। सेवा तीर्थ यानी नागरिक की सेवा से पवित्र हुआ स्थल। ये भवन हमें हर क्षण याद दिलाएगा कि शासन का अर्थ सेवा है और दायित्व का अर्थ समर्पण है। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है, सेवा परमो धर्मः, अर्थात् सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
 
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