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ED: रेत खनन से अवैध कमाई, फाइलों में घाट दिखे MP में...ट्रक दौड़ते रहे महाराष्ट्र में; तैयार किए फर्जी परमिट

डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Fri, 16 Jan 2026 05:28 PM IST
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ED: Illegal earnings from sand mining maharashtra  madhya pradesh
ईडी की कार्रवाई। - फोटो : अमर उजाला
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रेत खनन में अवैध कमाई, ईडी ने इस केस में एक बड़ा खुलासा किया है। आरोपियों ने अवैध रेत खनन के लिए एक नया तरीका अपनाया। फाइलों में मध्यप्रदेश के रेत घाट दिखाए गए, जबकि रेत ढोने वाले ट्रक महाराष्ट्र में दौड़ते रहे। अवैध रेत के परिवहन के दौरान कानून प्रवर्तन एजेंसियों की पकड़ से बचने के लिए उन्होंने सुनियोजित और धोखे भरे तरीके अपनाए। फर्जी इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिट परमिट तैयार किए गए। ये फर्जी ईटीपी नागपुर में रेत माफिया के सरगनाओं को 6000 रुपये से 10000 रुपये प्रति ईटीपी की दर से बेचे जा रहे थे। प्रवर्तन निदेशालय, नागपुर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने मध्य प्रदेश के भोपाल, होशंगाबाद, बेतूल जिलों और महाराष्ट्र के नागपुर व और भंडरा जिलों में 16 परिसरों में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के प्रावधानों के तहत तलाशी अभियान चलाया है। 

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ईडी के मुताबिक, यह अभियान महाराष्ट्र के नागपुर और भंडरा जिलों के आसपास स्थित रेत घाटों से अवैध रेत खनन से संबंधित जांच के सिलसिले में चलाया गया है। नागपुर शहर के सदर और अंबाज़ारी पुलिस स्टेशन में नरेंद्र पिंपल, अमोल उर्फ गुड्डू खोरगड़े और अन्य के खिलाफ आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज अपराधों के आधार पर ईडी ने इस केस की जांच शुरू की थी। उन पर जाली और फर्जी इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिट परमिट का इस्तेमाल करके अवैध रूप से रेत निकालने, परिवहन करने और बेचने का संगठित अवैध रेत खनन करने का आरोप था। यह खुलासा हुआ कि नागपुर के आसपास के रेत घाट बंद होने के बावजूद, रेत माफिया ट्रांसपोर्टरों और अन्य लोगों की मिलीभगत से रेत घाटों से अवैध रूप से रेत का खनन कर रहे थे। आरोपी, मध्य प्रदेश से फर्जी रॉयल्टी प्राप्त कर रहे थे, जिसका इस्तेमाल वे नागपुर में अवैध रेत बेचने के लिए कर रहे थे। पुलिस ने इन आरोपियों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए हैं।
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ईडी द्वारा की गई मनी लॉन्ड्रिंग जांच से पता चला है कि संगठित रेत माफिया गिरोह बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन कर रहे थे। अवैध रेत के परिवहन के दौरान कानून प्रवर्तन एजेंसियों की पकड़ से बचने के लिए उन्होंने सुनियोजित और धोखे भरे तरीके अपनाए। जांच में पता चला है कि राहुल खन्ना और बबलू अग्रवाल के नेतृत्व वाला एक गिरोह मध्य प्रदेश में स्थित कानूनी रूप से पट्टे पर लिए गए रेत घाटों के नाम पर फर्जी इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिट परमिट (ईटीपी) तैयार कर रहा था। इन फर्जी ईटीपी (ईटीपी) का इस्तेमाल करके रेत माफिया के सरगना नागपुर और आसपास के इलाकों में स्थित रेत घाटों से अवैध रूप से खोदी गई रेत का परिवहन करते थे। 
 
हालांकि, सरकारी रिकॉर्ड में उन्होंने झूठा दिखाया कि रेत मध्य प्रदेश के कानूनी रूप से पट्टे पर लिए गए घाटों से लादी गई थी। ईटीपी में दर्ज वाहन नंबर भी वैध दिखाए गए थे और वे सरकारी पोर्टल पर पंजीकृत थे। हालांकि, इन वाहनों के जीपीएस डेटा के विश्लेषण से पता चला कि ये वाहन कभी भी ईटीपी में बताए गए मध्य प्रदेश के घाटों तक नहीं गए थे। इसके बजाय, ईटीपी में दर्शाई गई उसी अवधि के दौरान, वाहनों ने नागपुर और आसपास के अवैध रेत घाटों से बार-बार यात्राएं कीं। 
 
इस तरीके से आरोपियों ने भारी अवैध मुनाफा कमाया और रॉयल्टी और करों की चोरी करके सरकार को भारी नुकसान पहुंचाया। इन गतिविधियों से प्राप्त अपराध की आय (पीओसी) प्रथम दृष्टया 30 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है।  तलाशी अभियान के दौरान 38.43 लाख रुपये की अघोषित/अस्पष्ट नकदी, बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज/रिकॉर्ड/संपत्ति संबंधी कागजात, अवैध रेत खनन से प्राप्त भारी धनराशि को संपत्ति अधिग्रहण में निवेश करने के साक्ष्य वाले डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। तलाशी के दौरान 1.34 करोड़ रुपये की बैंक राशि सहित चल संपत्ति को फ्रीज कर दिया गया। एक बीएमडब्ल्यू, 2 फॉर्च्यूनर, 1 थार सहित 8 वाहन, 2 जेसीबी मशीनें और 2 पोकलैंड मशीनें जब्त की गईं हैं। 

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