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SC: 'क्या टूटने तक जेल में रखना चाहते हैं', पूर्व SIB चीफ को लंबे समय तक कैद में रखने पर भड़का सुप्रीम कोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवम गर्ग
Updated Fri, 16 Jan 2026 05:28 PM IST
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सार
फोन टैपिंग मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार से कड़े सवाल पूछे। अदालत ने पूर्व SIB प्रमुख टी. प्रभाकर राव को लेकर कहा कि जांच के नाम पर किसी को तोड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
तेलंगाना के बहुचर्चित फोन टैपिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार से सख्त लहजे में सवाल किया कि क्या वह पूर्व विशेष खुफिया ब्यूरो (SIB) प्रमुख टी. प्रभाकर राव को तब तक जेल में रखना चाहती है, जब तक वह पूरी तरह टूट न जाएं। यह टिप्पणी उस समय आई, जब न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और आर. महादेवन की पीठ प्रभाकर राव की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
जांच के नाम पर दबाव नहीं- सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई की शुरुआत में अदालत ने संकेत दिया कि वह प्रभाकर राव को दी गई अंतरिम राहत को स्थायी कर सकती है। हालांकि, तेलंगाना सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इस मामले में कानूनी सवाल गंभीर हैं, खासकर यह कि विदेश में रह रहे और भगोड़ा घोषित व्यक्ति को अग्रिम जमानत मिल सकती है या नहीं। इस पर पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा हमें ऐसा लग रहा है कि आप उन्हें तब तक जेल में रखना चाहते हैं, जब तक वह टूट न जाएं। हम अपने आदेश का ऐसा इस्तेमाल नहीं होने देंगे।
ये भी पढ़ें:- महाराष्ट्र निकाय चुनाव: लो-प्रोफाइल सीटों के नतीजों ने सबको चौंकाया; इन जगहों की जीत ने भी बटोरीं सुर्खियां
जमानत का मतलब जांच से छूट नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अग्रिम जमानत का मतलब यह नहीं है कि आरोपी जांच से मुक्त हो जाएगा। राज्य पुलिस को पूछताछ के लिए उन्हें बुलाने का पूरा अधिकार रहेगा। पीठ ने बताया कि 11 दिसंबर को प्रभाकर राव को आत्मसमर्पण और हिरासत में भेजने का आदेश अनुच्छेद 142 के तहत अंतरिम व्यवस्था के रूप में दिया गया था, ताकि जांच में मदद मिल सके। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को तय की है और तब तक प्रभाकर राव को दी गई अंतरिम सुरक्षा बढ़ा दी है।
इससे पहले:-
तेलंगाना सरकार ने आरोप लगाया है कि अदालत के निर्देशों के बावजूद प्रभाकर राव ने अब तक अपने iCloud अकाउंट्स की पूरी जानकारी साझा नहीं की है, जिससे जांच प्रभावित हो रही है। प्रभाकर राव ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। इससे पहले 22 मई को हैदराबाद की एक अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित करते हुए उद्घोषणा आदेश जारी किया था। मार्च 2024 से अब तक इस मामले में चार पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिन्हें बाद में जमानत मिल गई।
जानिए क्या है फोन टैपिंग मामला?
हैदराबाद पुलिस के मुताबिक, यह मामला पिछली BRS सरकार के कार्यकाल का है, जिसमें SIB के कुछ अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने-
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जांच के नाम पर दबाव नहीं- सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई की शुरुआत में अदालत ने संकेत दिया कि वह प्रभाकर राव को दी गई अंतरिम राहत को स्थायी कर सकती है। हालांकि, तेलंगाना सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इस मामले में कानूनी सवाल गंभीर हैं, खासकर यह कि विदेश में रह रहे और भगोड़ा घोषित व्यक्ति को अग्रिम जमानत मिल सकती है या नहीं। इस पर पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा हमें ऐसा लग रहा है कि आप उन्हें तब तक जेल में रखना चाहते हैं, जब तक वह टूट न जाएं। हम अपने आदेश का ऐसा इस्तेमाल नहीं होने देंगे।
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ये भी पढ़ें:- महाराष्ट्र निकाय चुनाव: लो-प्रोफाइल सीटों के नतीजों ने सबको चौंकाया; इन जगहों की जीत ने भी बटोरीं सुर्खियां
जमानत का मतलब जांच से छूट नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अग्रिम जमानत का मतलब यह नहीं है कि आरोपी जांच से मुक्त हो जाएगा। राज्य पुलिस को पूछताछ के लिए उन्हें बुलाने का पूरा अधिकार रहेगा। पीठ ने बताया कि 11 दिसंबर को प्रभाकर राव को आत्मसमर्पण और हिरासत में भेजने का आदेश अनुच्छेद 142 के तहत अंतरिम व्यवस्था के रूप में दिया गया था, ताकि जांच में मदद मिल सके। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को तय की है और तब तक प्रभाकर राव को दी गई अंतरिम सुरक्षा बढ़ा दी है।
इससे पहले:-
- 12 दिसंबर को राव ने जुबिली हिल्स थाने में आत्मसमर्पण किया था
- 19 दिसंबर को उनकी पुलिस हिरासत 25 दिसंबर तक बढ़ाई गई
- 26 दिसंबर को पूछताछ के बाद उन्हें रिहा किया गया
तेलंगाना सरकार ने आरोप लगाया है कि अदालत के निर्देशों के बावजूद प्रभाकर राव ने अब तक अपने iCloud अकाउंट्स की पूरी जानकारी साझा नहीं की है, जिससे जांच प्रभावित हो रही है। प्रभाकर राव ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। इससे पहले 22 मई को हैदराबाद की एक अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित करते हुए उद्घोषणा आदेश जारी किया था। मार्च 2024 से अब तक इस मामले में चार पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिन्हें बाद में जमानत मिल गई।
जानिए क्या है फोन टैपिंग मामला?
हैदराबाद पुलिस के मुताबिक, यह मामला पिछली BRS सरकार के कार्यकाल का है, जिसमें SIB के कुछ अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने-
- बिना अनुमति नागरिकों की निगरानी की
- राजनीतिक फायदे के लिए फोन टैप किए
- इलेक्ट्रॉनिक सबूत नष्ट करने की साजिश रची
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