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ED: 23 प्रोजेक्ट में 14105 घर खरीदारों से वसूले 4619 करोड़ रुपये, फ्लैट मिलने में 16-18 साल की देरी

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: Sandhya Kumari Updated Fri, 06 Mar 2026 06:40 PM IST
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सार

ईडी ने पीएमएलए के तहत टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 206.40 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं। आरोप है कि 23 प्रोजेक्ट में 14,105 खरीदारों से 4619 करोड़ लेकर फ्लैट देने में 16–18 साल की देरी की गई और रकम का दुरुपयोग हुआ।

ED Rs 4619 crore recovered from 14105 home buyers in 23 projects, delay of 16-18 years in getting flats
ED - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), गुरुग्राम क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत शुक्रवार को एक अस्थायी कुर्की आदेश जारी किया है। इसमें मेसर्स टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (पूर्व में मेसर्स इंटाइम प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी) से जुड़े धन शोधन मामले में लगभग 206.40 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। आरोप है कि 

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23 प्रोजेक्ट में 14105 घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी की गई। बतौर बुकिंग राशि, उनसे 4619 करोड़ रुपये वसूले गए। जब फ्लैट देने की बारी आई तो 16 से 18 साल की देरी कर दी। बुकिंग राशि का पैसा अन्य कामों में लगाया गया तो दूसरी तरफ लोग फ्लैट मिलने की राह देखते रहे। 

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ईडी ने उक्त कंपनी की जिन संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है, उनमें लगभग 8.3 एकड़ भूमि के टुकड़े और हरियाणा के सोनीपत जिले के कामासपुर में स्थित वाणिज्यिक इकाइयां शामिल हैं। ये संपत्तियां मेसर्स टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसकी संबद्ध कंपनियों के स्वामित्व में हैं।

दिल्ली पुलिस और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू), दिल्ली द्वारा दर्ज की गई 26 एफआईआर/आरोपपत्रों के आधार पर ईडी ने इस मामले की जांच शुरू की है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों के अनुसार, मेसर्स टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, उसके प्रमोटरों और प्रमुख प्रबंधकीय व्यक्तियों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर वादे के अनुसार फ्लैट और यूनिट्स उपलब्ध न कराकर कई घर खरीदारों को धोखा दिया।

ईडी की जांच में पता चला है कि मेसर्स टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने हरियाणा के सोनीपत में कई वाणिज्यिक/आवासीय प्लॉट/हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू किए थे। 23 प्रोजेक्टों के लिए 14,105 ग्राहकों से अग्रिम बुकिंग राशि के रूप में लगभग 4619.43 करोड़ रुपये एकत्र किए थे। ये प्रोजेक्ट 2005 से 2014 के बीच शुरू किए गए थे। हालांकि, चार प्रोजेक्टों के लिए अभी तक ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किए गए हैं। एक प्रोजेक्ट "पार्क स्ट्रीट" अभी भी अधूरा है। 

जांच में यह भी पता चला है कि प्रमोटरों/निदेशकों ने आवासीय/हाउसिंग प्रोजेक्टों को पूरा करने के बजाय, घर खरीदारों से एकत्र की गई बड़ी रकम को सहायक कंपनियों/पूर्व सहायक कंपनियों को जमीन खरीदने और अन्य उद्देश्यों के लिए अग्रिम के रूप में दे दिया। कंपनी ने ग्राहकों की रकम का इस्तेमाल अपने ऋण चुकाने और निवेश करने के लिए भी किया।

इस तरह से रकम के हेरफेर के कारण कंपनी के प्रोजेक्टों के निर्माण में देरी हुई। इसके चलते ग्राहकों को समय पर अपने यूनिट/प्लॉट का कब्जा नहीं मिल पाया। इससे पहले, इस मामले में, मेसर्स टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसकी संबंधित संस्थाओं से संबंधित 45.48 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से कुर्क किया गया था। इस मामले में कुल कुर्की राशि अब 251.88 करोड़ रुपये हो गई है।

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