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ED: ट्रांस-अरुणाचल राजमार्ग के मुआवजे में घोटाला, 38.18 करोड़ की बजाए 66.25 करोड़ जारी, चीन बॉर्डर के पास छापा

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Mon, 09 Feb 2026 06:38 PM IST
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सार

ट्रांस-अरुणाचल राजमार्ग में ईडी ने बड़े घोटाले का खुलासा किया है। यहां  जमीन अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर घोटाले की जानकारी मिली है। पूर्व उपायुक्त और उनके परिवार के सदस्यों के पास से घोटाले का राशि बरामद की गई है। 

ED Scam in compensation for Trans-Arunachal Highway Rs 66.25 crore released instead of Rs 38.18 crore
ट्रांस-अरुणाचल राजमार्ग के लिए जमीन अधिग्रहण में घोटाला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

ट्रांस-अरुणाचल राजमार्ग के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया। इसकी एवज में लोगों को मुआवजा दिया जाना था। पूर्व उपायुक्त और उनके परिवार के सदस्यों, डीएलआरएसओ, जूनियर इंजीनियर और एक निजी लाभार्थी ने इस मामले में खेल कर दिया। आपसी मिलीभगत से 38.18 करोड़ रुपये के स्वीकार्य मुआवजे के बदले, लगभग 66.25 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। जो अतिरिक्त भुगतान किया गया, वह अधिकारियों और उनके परिचितों की जेब में गया। ईडी ने इस मामले में केमो लोलेन (पूर्व उपायुक्त, जीरो) और उनके परिवार के सदस्यों, भरत लिंगु (पूर्व डीएलआरएसओ, जीरो), टोको ताजे (जूनियर इंजीनियर, पीडब्लूडी) और लिखा सोनी (निजी लाभार्थी) के आवास से आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं। इनमें अचल संपत्ति से संबंधित दस्तावेज भी शामिल हैं। जांच एजेंसी ने इस मामले में चीन बॉर्डर के निकट सहित कई जगहों पर छापेमारी की है। 

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), इटानगर ने ट्रांस-अरुणाचल राजमार्ग भूमि मुआवजा घोटाले के संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत अरुणाचल प्रदेश और असम में छह आवासीय परिसरों पर 06.02.2026 को तलाशी अभियान चलाया। इनमें से चार परिसर इटानगर और उसके आसपास स्थित हैं, एक लिकबाली (डिब्रूगढ़ के पास) में और एक आलो में, जो मेचुका-चीन सीमा के निकट है। अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों से लेकर पूर्वी हिस्सों तक फैले सीमावर्ती क्षेत्रों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भी ईडी की रेड की गई है। 

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तलाशी अभियान के दौरान, ईडी ने कुल 2.62 करोड़ रुपये नकद जब्त किए हैं। इनमें से 2.40 करोड़ रुपये लिखा माज (निजी लाभार्थी/प्रमुख मध्यस्थ) के आवास से और 22 लाख रुपये तादर बाबिन (निजी लाभार्थी) के आवास से जब्त किए गए हैं। इसके अलावा, तादर बाबिन और भरत लिंगु (पूर्व डीएलआरएसओ, जीरो) से संबंधित लगभग 1.77 करोड़ रुपये की बैंक राशि फ्रीज कर दी गई है। ईडी ने केमो लोलेन (पूर्व उपायुक्त, जीरो) और उनके परिवार के सदस्यों, भरत लिंगु (पूर्व डीएलआरएसओ, जीरो), टोको ताजे (जूनियर इंजीनियर, पीडब्लू) और लिखा सोनी (निजी लाभार्थी) के आवास से आपत्तिजनक दस्तावेज और अचल संपत्ति से संबंधित दस्तावेज भी बरामद किए हैं। इन पर जांच एजेंसी को संदेह है कि इन्हें मुआवजे की राशि से प्राप्त किया गया था।

इससे पहले जांच के दौरान, ईडी ने आरोपियों से जुड़े बैंक खातों, सावधि जमा और आवर्ती जमा में पड़े लगभग 3.95 करोड़ रुपये की धनराशि की पहचान कर उसे फ्रीज कर दिया था। इनमें कबाक भट्ट (जूनियर इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी) और मेसर्स टी एंड जी एंटरप्राइजेज से जुड़े खाते भी शामिल थे। जांच में यह भी पता चला है कि सरकारी मुआवजा निधि से लगभग 175 करोड़ रुपये की सावधि जमा बिना अनुमति के खोली गई थीं। इन जमाओं से प्राप्त लगभग 2.79 करोड़ रुपये के ब्याज को वित्तीय नियमों का उल्लंघन करते हुए गबन किया गया था। इसके अलावा, इन सावधि जमाओं से प्राप्त 21.57 लाख रुपये की ब्याज राशि कबाक भट्ट (जूनियर इंजीनियर, पीडब्ल्यूडी) के निजी खाते में स्थानांतरित की गई थी। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए विशेष न्यायालय में कबाक भट्ट के खिलाफ पीएमएलए के तहत अभियोग शिकायत दर्ज कराई है। 


यह जांच ट्रांस-अरुणाचल राजमार्ग (पोटिन-बोपी खंड, 0.00 किमी से 157.70 किमी) परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजे के आकलन और वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं से संबंधित है। इसका उद्देश्य सड़क उन्नयन करना था। इस खंड को प्रशासनिक रूप से याचुली, जीरो और रागा क्षेत्रों में विभाजित किया गया था। जांच में पता चला है कि शुरुआत में लगभग 289.40 करोड़ रुपये के मुआवजे का अनुमान लगाया गया था, लेकिन बाद में इसे घटाकर लगभग 188 करोड़ रुपये कर दिया गया। इसका वितरण अपारदर्शी तरीके से किया गया, जिससे निजी व्यक्तियों को अनुचित लाभ प्राप्त हुआ। राज्य तथ्य-जांच समिति द्वारा किए गए सत्यापन से अनुमानित, स्वीकार्य और वास्तव में वितरित मुआवजे के बीच बड़े पैमाने पर अंतर का पता चला। 

जांच एजेंसी के मुताबिक, याचुली क्षेत्र में, लगभग 38.18 करोड़ रुपये के स्वीकार्य मुआवजे के मुकाबले, लगभग 66.25 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 28 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वितरण हुआ। जीरो और रागा क्षेत्रों में भी इसी तरह की अनियमितताएं और अतिरिक्त वितरण पाए गए। कुल मिलाकर, अनियमितताओं के परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को लगभग 44.98 करोड़ रुपये का अनुचित नुकसान हुआ। जांच में यह भी पता चला है कि फर्जी लाभार्थियों का निर्माण, मूल्यांकन अभिलेखों में हेराफेरी, अनधिकृत बैंक खातों और सावधि जमाओं के माध्यम से सरकारी निधियों का गबन और निजी व्यक्तियों एवं संस्थाओं के माध्यम से धन का हस्तांतरण करके अपराध से प्राप्त धन अर्जित किया गया था। साक्ष्य यह भी दर्शाते हैं कि लोक सेवकों को अवैध रिश्वत दी गई। उसके बाद बैंक खातों, निवेशों और संपत्ति अधिग्रहण के जरिए अपराध से प्राप्त धन को कई स्तरों पर स्थानांतरित किया गया।

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