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ED: नक्सली संगठन का प्रमुख बताकर करता था जबरन वसूली, फर्जी कंपनियों की मदद से पत्नियां ठिकाने लगाती थीं पैसा

Sat, 18 Oct 2025 03:24 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Sat, 18 Oct 2025 03:24 PM IST
सार

ईडी ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया है, जिसमें एक व्यक्ति खुद को नक्सली संगठन का 'स्वयंभू' हेड बताता रहा। जबरन वसूली करनी शुरु कर दी। जबरन वसूली से जितना भी धन एकत्रित होता, उसे ठिकाने लगाने का काम उसकी दो पत्नियां करती थी। 
 

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ED: Self-proclaimed head of Naxalite organisation extorted money
ईडी - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्र सरकार ने देश के कुछ ही क्षेत्रों में बचे माओवादियों के खात्मे की डेड लाइन तय कर दी है। 31 मार्च 2026 तक माओवादी पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह दावा किया है। इस मुहिम में केंद्रीय सुरक्षा बल, जहां अपनी पूरी ताकत के साथ नक्सलियों को खत्म कर रहे हैं या उन्हें सरेंडर के लिए मजबूर कर रहे हैं, वहीं एनआईए और ईडी जैसी जांच एजेंसियां भी नक्सलियों से जुड़े केसों को अंजाम तक पहुंचाने में तेजी दिखाई रही हैं। ईडी ने एक ऐसे मामले का खुलासा किया है, जिसमें एक व्यक्ति खुद को नक्सली संगठन का 'स्वयंभू' हेड बताता रहा। जबरन वसूली करनी शुरु कर दी। जबरन वसूली से जितना भी धन एकत्रित होता, उसे ठिकाने लगाने का काम उसकी दो पत्नियां करती थी। 

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दोनों पत्नियों ने फर्जी कंपनियां खोल कर अवैध धन को बैंकों में जमा कराया और फिर वहां से हवाला के जरिए उसे दूसरे कामों में लगा दिया। झारखंड पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दिनेश गोप और उसके साथियों के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर और आरोपपत्रों के आधार पर ईडी ने पीएमएलए के तहत इस केस की जांच शुरू की। इन अपराधों में हत्या, हत्या का प्रयास, जबरन वसूली और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत आतंकवादी गतिविधियों जैसी कई संगठित आपराधिक गतिविधियां शामिल हैं। ईडी की जांच से पता चला है कि पीएलएफआई के सुप्रीमो के रूप में दिनेश गोप एक आपराधिक गिरोह का संचालन करता था। यह गिरोह झारखंड और आसपास के राज्यों में ठेकेदारों, व्यापारियों व ट्रांसपोर्टरों से हिंसा, आगजनी एवं धमकी के जरिए व्यवस्थित रूप से उगाही करता था।
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ईडी की जांच में सामने आया है कि दिनेश गोप, एक जटिल, बहुस्तरीय मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधि का संचालन करता था। इस कार्यप्रणाली में जबरन वसूली गई नकदी को फर्जी कंपनियों के एक नेटवर्क में डालना भी शामिल था। यह अगुवाई उसकी दोनों पत्नियां, शकुंतला कुमारी और हीरा देवी करती थीं। इन संस्थाओं का, जिनका कोई वैध व्यवसाय नहीं था, बैंकिंग प्रणाली में भारी मात्रा में अवैध नकदी जमा करने के लिए इस्तेमाल किया गया। 
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उस धन को हवाला लेनदेन, स्थानीय धन हस्तांतरण ऑपरेटरों के एक नेटवर्क और तीसरे पक्ष के व्यवसायों सहित विभिन्न जटिल तंत्रों के माध्यम से स्तरीकृत किया गया। मकसद, धन के आपराधिक मूल को छिपाना था। लूटे गए धन को लग्जरी वाहनों और सावधि जमाओं सहित उच्च-मूल्य वाली संपत्तियों के अधिग्रहण के माध्यम से वैध अर्थव्यवस्था में एकीकृत किया गया। परिवार के निजी खर्चों के लिए भी इस धनराशि का इस्तेमाल किया गया।

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ईडी ने पहले पीएलएफआई के एक प्रमुख सहयोगी निवेश कुमार के खिलाफ 4 करोड़ रुपये से अधिक की पीओसी की मनी लॉन्ड्रिंग के लिए अभियोजन शिकायत दर्ज की थी, जिसमें दिनेश गोप से हथियार और गोला-बारूद खरीदने के लिए प्राप्त 2 करोड़ रुपये भी शामिल थे। इसके बाद, दिनेश गोप को ईडी ने 20.08.2025 को गिरफ्तार कर लिया। वर्तमान शिकायत में, ईडी ने सभी 21 आरोपियों पर धन शोधन के अपराध के लिए मुकदमा चलाने और पीओसी के रूप में पहचानी गई संपत्तियों (जिसमें जब्त नकदी, बैंक बैलेंस और वाहन शामिल हैं) को जब्त करने का अनुरोध किया है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), रांची क्षेत्रीय कार्यालय ने अब धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के अंतर्गत विशेष पीएमएलए कोर्ट, रांची में प्रतिबंधित नक्सली संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) के स्वयंभू प्रमुख दिनेश गोप और 19 अन्य व्यक्तियों व संस्थाओं के खिलाफ एक पूरक अभियोजन शिकायत (पीसी) दायर की है। यह शिकायत आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में दर्ज की गई है, जिसमें पीएलएफआई द्वारा व्यवस्थित जबरन वसूली और लेवी वसूली के माध्यम से अपराध की कुल आय (पीओसी) लगभग 20 करोड़ रुपये आंकी गई है। ईडी की जांच में अब तक 3.36 करोड़ रुपये के धन शोधन के तार का पता चला है।

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