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Maharashtra: मनोज जरांगे की मांग- 58 लाख रिकॉर्ड के आधार पर मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी हों, दी ये चेतावनी
Mon, 17 Aug 2026 07:41 PM IST
Pavan
पीटीआई, छत्रपति संभाजीनगर
पीटीआई, छत्रपति संभाजीनगर
Published by: Pavan
Updated Mon, 17 Aug 2026 07:41 PM IST
सार
मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र सरकार पर मराठों के 58 लाख रिकॉर्ड कम करने का आरोप लगाया। उन्होंने पात्र लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र देने, लंबित मांगें 29 अगस्त तक पूरी करने की मांग की। जरांगे ने 20-25 अगस्त को मराठवाड़ा-विदर्भ दौरे और 29 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का एलान किया।
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मनोज जरांगे, मराठा कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार मराठा समुदाय के पात्र लोगों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र देने के लिए पहले मिले 58 लाख रिकॉर्ड की संख्या को कम करना चाहती है। जरांगे ने मांग की कि इन सभी रिकॉर्ड के आधार पर पात्र लोगों को प्रमाणपत्र जारी किए जाएं। जरांगे ने मराठा समुदाय से अपनी मांगों को लेकर और आक्रामक तरीके से आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि समुदाय के लोगों को किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के दबाव में नहीं आना चाहिए।
20 से 25 अगस्त तक दौरा
जरांगे ने कहा कि वह अपनी मांगों को लेकर 20 से 25 अगस्त के बीच मराठवाड़ा और विदर्भ के कुछ हिस्सों का दौरा करेंगे। इसके बाद उन्होंने 29 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन मराठा समुदाय की लंबित मांगों को पूरा कराने के लिए होगा। उन्होंने कहा, 'सरकार को पहले मिले 58 लाख रिकॉर्ड के आधार पर सभी पात्र लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने चाहिए। सरकार इस आंकड़े को कम करना चाहती है, लेकिन मैं ऐसा नहीं होने दूंगा'। जरांगे ने अब तक जारी किए गए कुनबी जाति प्रमाणपत्रों को भी वैध मानने की मांग की।
यह भी पढ़ें- पीएम मोदी से मुलाकात की क्या वजह?: दिल्ली जाने की अटकलों पर फडणवीस बोले- जो जिम्मेदारी मिली है, निभाता रहूंगा
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इन मांगों को 29 अगस्त तक पूरा करने की मांग
जरांगे ने सरकार के सामने कई अन्य मांगें भी रखीं। इनमें सातारा, कोल्हापुर, औंध और बॉम्बे गजट से जुड़े सरकारी आदेश (जीआर) जारी करना शामिल है। उन्होंने मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि एसईबीसी और ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत चयनित उम्मीदवारों की सरकारी नियुक्तियों की प्रक्रिया 29 अगस्त से पहले पूरी की जाए। इसके अलावा आंदोलन में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने की प्रक्रिया भी पूरी करने और लंबित राशि जारी करने की मांग की। जरांगे ने अन्नासाहेब पाटील महामंडल के जरिए मिलने वाली प्रतिपूर्ति और छात्रों की छात्रवृत्ति की लंबित राशि का भुगतान भी 29 अगस्त तक करने को कहा।
सारथी की बंद योजनाएं शुरू करने की मांग
जरांगे ने छत्रपति शाहू महाराज रिसर्च, ट्रेनिंग एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (सारथी) से जुड़ी बंद की गई योजनाओं को दोबारा शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के लिए पर्याप्त धन भी जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मराठा समुदाय की सभी मांगें सरकार को लिखित रूप में दी जा चुकी हैं। सरकार को 29 अगस्त तक कोई भी मांग लंबित नहीं रखनी चाहिए।
जाति वैधता प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच पर सवाल
जरांगे ने जाति वैधता प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच किए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले जारी किए जा चुके प्रमाणपत्रों की वैधता की फिर से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि मराठा आरक्षण उपसमिति के प्रमुख मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने पहले जारी प्रमाणपत्रों की वैधता की दोबारा जांच की प्रक्रिया शुरू की है। जरांगे ने सवाल किया कि क्या सिर्फ मराठा समुदाय के प्रमाणपत्रों की ही जांच हो रही है या अन्य समुदायों के प्रमाणपत्र भी इसी तरह जांचे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे मराठा समुदाय में नाराजगी बढ़े। जरांगे ने दावा किया कि जालना में छह जाति वैधता के मामले कई महीनों से लंबित हैं।
राजनीतिक दलों पर भी निशाना
जरांगे ने रविवार को जालना के अंतरवाली सराटी गांव में हुई बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बैठक में मराठा समुदाय के विद्वानों और आरक्षण के मुद्दे पर काम करने वाले लोगों को बुलाया गया था। बैठक का उद्देश्य सरकारी आदेशों में समुदाय की जरूरत के अनुसार बदलावों पर चर्चा करना था। हालांकि, जरांगे ने दावा किया कि बैठक में कुछ ऐसे लोग भी आए जो मराठा समुदाय से होने के बावजूद समुदाय की मांगों के खिलाफ बोल रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग समुदाय से ज्यादा अपने राजनीतिक दलों के प्रति वफादार हैं।
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जरांगे ने सत्तारूढ़ दलों के नेताओं पर भी साधा निशाना
उन्होंने मंत्री संजय शिरसाट, चंद्रशेखर बावनकुले और सांसद संदीपन भुमरे पर मराठा समुदाय को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि ये नेता लोगों को अदालत जाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। जरांगे ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस सरकार के मंत्रियों का रवैया उचित नहीं है। उनके अनुसार, छात्रों, कारोबारियों, किसानों, माइक्रो-ओबीसी समूहों और आदिवासियों में भी काफी नाराजगी है। उन्होंने दोहराया कि सरकार को 29 अगस्त से पहले मराठा समुदाय की सभी लंबित मांगों पर कार्रवाई करनी होगी। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह 29 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करेंगे।
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20 से 25 अगस्त तक दौरा
जरांगे ने कहा कि वह अपनी मांगों को लेकर 20 से 25 अगस्त के बीच मराठवाड़ा और विदर्भ के कुछ हिस्सों का दौरा करेंगे। इसके बाद उन्होंने 29 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन मराठा समुदाय की लंबित मांगों को पूरा कराने के लिए होगा। उन्होंने कहा, 'सरकार को पहले मिले 58 लाख रिकॉर्ड के आधार पर सभी पात्र लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने चाहिए। सरकार इस आंकड़े को कम करना चाहती है, लेकिन मैं ऐसा नहीं होने दूंगा'। जरांगे ने अब तक जारी किए गए कुनबी जाति प्रमाणपत्रों को भी वैध मानने की मांग की।
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इन मांगों को 29 अगस्त तक पूरा करने की मांग
जरांगे ने सरकार के सामने कई अन्य मांगें भी रखीं। इनमें सातारा, कोल्हापुर, औंध और बॉम्बे गजट से जुड़े सरकारी आदेश (जीआर) जारी करना शामिल है। उन्होंने मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि एसईबीसी और ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत चयनित उम्मीदवारों की सरकारी नियुक्तियों की प्रक्रिया 29 अगस्त से पहले पूरी की जाए। इसके अलावा आंदोलन में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने की प्रक्रिया भी पूरी करने और लंबित राशि जारी करने की मांग की। जरांगे ने अन्नासाहेब पाटील महामंडल के जरिए मिलने वाली प्रतिपूर्ति और छात्रों की छात्रवृत्ति की लंबित राशि का भुगतान भी 29 अगस्त तक करने को कहा।
सारथी की बंद योजनाएं शुरू करने की मांग
जरांगे ने छत्रपति शाहू महाराज रिसर्च, ट्रेनिंग एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (सारथी) से जुड़ी बंद की गई योजनाओं को दोबारा शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के लिए पर्याप्त धन भी जारी किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मराठा समुदाय की सभी मांगें सरकार को लिखित रूप में दी जा चुकी हैं। सरकार को 29 अगस्त तक कोई भी मांग लंबित नहीं रखनी चाहिए।
जाति वैधता प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच पर सवाल
जरांगे ने जाति वैधता प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच किए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले जारी किए जा चुके प्रमाणपत्रों की वैधता की फिर से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि मराठा आरक्षण उपसमिति के प्रमुख मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने पहले जारी प्रमाणपत्रों की वैधता की दोबारा जांच की प्रक्रिया शुरू की है। जरांगे ने सवाल किया कि क्या सिर्फ मराठा समुदाय के प्रमाणपत्रों की ही जांच हो रही है या अन्य समुदायों के प्रमाणपत्र भी इसी तरह जांचे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे मराठा समुदाय में नाराजगी बढ़े। जरांगे ने दावा किया कि जालना में छह जाति वैधता के मामले कई महीनों से लंबित हैं।
राजनीतिक दलों पर भी निशाना
जरांगे ने रविवार को जालना के अंतरवाली सराटी गांव में हुई बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बैठक में मराठा समुदाय के विद्वानों और आरक्षण के मुद्दे पर काम करने वाले लोगों को बुलाया गया था। बैठक का उद्देश्य सरकारी आदेशों में समुदाय की जरूरत के अनुसार बदलावों पर चर्चा करना था। हालांकि, जरांगे ने दावा किया कि बैठक में कुछ ऐसे लोग भी आए जो मराठा समुदाय से होने के बावजूद समुदाय की मांगों के खिलाफ बोल रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग समुदाय से ज्यादा अपने राजनीतिक दलों के प्रति वफादार हैं।
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जरांगे ने सत्तारूढ़ दलों के नेताओं पर भी साधा निशाना
उन्होंने मंत्री संजय शिरसाट, चंद्रशेखर बावनकुले और सांसद संदीपन भुमरे पर मराठा समुदाय को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि ये नेता लोगों को अदालत जाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। जरांगे ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस सरकार के मंत्रियों का रवैया उचित नहीं है। उनके अनुसार, छात्रों, कारोबारियों, किसानों, माइक्रो-ओबीसी समूहों और आदिवासियों में भी काफी नाराजगी है। उन्होंने दोहराया कि सरकार को 29 अगस्त से पहले मराठा समुदाय की सभी लंबित मांगों पर कार्रवाई करनी होगी। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह 29 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करेंगे।