Business: पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए सपोर्ट सेल क्यों चाहती है संसदीय समिति, कारोबार में क्या बदलेगा?
पहली पीढ़ी के उद्यमियों यानी अपने दम पर कारोबार शुरू करने वालों के लिए केंद्र सरकार से अलग सपोर्ट सेल बनाने की सिफारिश की गई है। संसदीय समिति चाहती है कि इन उद्यमियों को भी बड़े औद्योगिक घरानों की तरह डिजिटल सिंगल-विंडो, फास्ट-ट्रैक सुविधा और आसान अनुपालन की सुविधा मिले। लेकिन कारोबार शुरू करने में अभी सबसे बड़ी दिक्कतें क्या हैं और समिति ने नियमों को आसान बनाने के लिए क्या सुझाव दिए हैं? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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विस्तार
अपने दम पर कारोबार खड़ा करने वाले पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए संसदीय समिति ने एक अलग ‘सपोर्ट सेल’ बनाने की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि ऐसे उद्यमियों को भी बड़े औद्योगिक घरानों और कॉरपोरेट निवेशकों की तरह सरकारी सुविधाओं तक आसान पहुंच मिलनी चाहिए। इसके लिए डिजिटल सिंगल-विंडो व्यवस्था को मजबूत करने, फास्ट-ट्रैक सुविधा देने और अनुपालन से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने का सुझाव दिया गया है। इसका मकसद यह है कि नया कारोबार शुरू करने वाला व्यक्ति अलग-अलग सरकारी दफ्तरों और विभागों के चक्कर लगाने के बजाय एक ही व्यवस्था के जरिए जरूरी काम पूरा कर सके।
नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम में क्या-क्या जोड़ा जाएगा?
संसदीय समिति ने केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर कारोबार के लिए जरूरी सभी अनुमोदनों को नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम से जोड़ने की सिफारिश की है। समिति के अनुसार आवेदन जमा करने, दस्तावेज देने, भुगतान करने, निरीक्षण और मंजूरी की पूरी प्रक्रिया एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होनी चाहिए। इससे उद्यमियों को अलग-अलग विभागों में आवेदन करने और बार-बार जानकारी देने की परेशानी कम होगी। खासकर पहली बार कारोबार शुरू करने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि उन्हें सरकारी प्रक्रियाओं और अलग-अलग नियमों की जानकारी सीमित होती है।
कागजी प्रक्रियाओं और बार-बार निरीक्षण की समस्या कैसे दूर होगी?
समिति ने मौजूदा व्यवस्था में कई खामियों पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार नियामकीय जिम्मेदारियां कई अलग-अलग प्राधिकरणों में बंटी होने के कारण उद्यमियों को एक ही काम के लिए कई स्तरों से मंजूरी लेनी पड़ती है। इसके अलावा बार-बार निरीक्षण और अलग-अलग जगहों पर कानूनों की अलग व्याख्या भी कारोबारियों के लिए परेशानी पैदा करती है। समिति ने कागज आधारित प्रक्रियाओं से आगे बढ़कर डिजिटल व्यवस्था अपनाने पर जोर दिया है। साथ ही निरीक्षण व्यवस्था को जोखिम के आधार पर व्यवस्थित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि हर कारोबार पर एक जैसी जांच का बोझ न पड़े।
रेस्तरां, हॉस्पिटैलिटी और रिटेल कारोबार के लिए क्या सुझाव दिया गया?
- रेस्तरां, हॉस्पिटैलिटी और रिटेल जैसे क्षेत्रों में समान प्रकृति के लाइसेंस को एकीकृत करने पर विचार किया जाए।
- अलग-अलग कानूनों के तहत होने वाले निरीक्षणों को एक व्यवस्था में लाया जाए।
- फैक्टरी एक्ट, बॉयलर्स एक्ट और पेट्रोलियम एक्ट जैसे कानूनों के तहत निरीक्षण संबंधी काम को एकीकृत किया जाए।
- जोखिम आधारित निरीक्षण व्यवस्था के लिए एकीकृत निरीक्षण प्राधिकरण बनाया जाए।
- पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए अलग सपोर्ट सेल की व्यवस्था की जाए।
क्या इससे छोटे और नए कारोबारियों को सीधे फायदा मिलेगा?
समिति की सिफारिशों का मुख्य उद्देश्य कारोबार शुरू करने और चलाने की प्रक्रिया को सरल बनाना है। पहली पीढ़ी के उद्यमियों के पास बड़े औद्योगिक समूहों की तरह अलग कानूनी, नियामकीय और प्रशासनिक टीम नहीं होती। ऐसे में कई विभागों से मंजूरी लेने, दस्तावेज जमा करने और निरीक्षण जैसी प्रक्रियाएं उनके लिए अधिक मुश्किल हो सकती हैं। सपोर्ट सेल और एकीकृत डिजिटल व्यवस्था लागू होने पर उन्हें एक जगह से जानकारी और सरकारी प्रक्रियाओं में मदद मिल सकती है। हालांकि, अभी ये संसदीय समिति की सिफारिशें हैं। इन्हें किस रूप में और कब लागू किया जाएगा, यह सरकार के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा।