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धोखे से धर्म परिवर्तन पर सख्ती: सीएम फडणवीस ने नए बिल का किया बचाव, महिलाओं के शोषण को रोकने का भी किया दावा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई। Published by: Pavan Updated Mon, 16 Mar 2026 03:37 PM IST
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Fadnavis defends bill against fraudulent religious conversions, cites exploitation of women
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस - फोटो : एएनआई (फाइल)
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार का नया धोखाधड़ी से धर्म परिवर्तन रोकने वाला बिल खास तौर पर महिलाओं के शोषण को रोकने के लिए लाया गया है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में महिलाओं को झूठे प्यार के जाल में फंसाकर शादी की जाती है और बाद में उन्हें छोड़ दिया जाता है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए यह कानून जरूरी है।
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'वोट बैंक के लिए मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा विपक्ष'
मुख्यमंत्री फडणवीस ने मंत्रालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को वोट बैंक की राजनीति के लिए बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। उनका कहना है कि अगर विपक्षी दल इस बिल को ठीक से पढ़ेंगे तो उन्हें इसमें किसी समुदाय के खिलाफ कुछ भी नजर नहीं आएगा, क्योंकि इसका उद्देश्य सिर्फ जबरदस्ती, लालच या धोखे से किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है।

क्या है महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता विधेयक 2026?
सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता विधेयक 2026 पेश किया है। इस बिल में ऐसे धर्म परिवर्तन पर कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है जो जबरदस्ती, धोखे, लालच या शादी के बहाने कराए जाते हैं। इस प्रस्तावित कानून के अनुसार अगर कोई व्यक्ति शादी का बहाना बनाकर धर्म परिवर्तन करवाता है तो उसे 7 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं अगर यह अपराध महिला, नाबालिग, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति या अनुसूचित जाति-जनजाति के व्यक्ति के साथ किया जाता है तो सजा और भी सख्त होगी। ऐसे मामलों में सात साल तक की जेल और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

'महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है बिल'
सीएम फडणवीस ने कहा कि कई मामलों में महिलाएं किसी के साथ भागकर शादी कर लेती हैं, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया जाता है। ऐसे हालात में उनकी जिंदगी मुश्किल हो जाती है, खासकर जब उनके बच्चे भी होते हैं। उन्होंने कहा कि यह बिल ऐसे मामलों का समाधान ढूंढने और महिलाओं को सुरक्षा देने के लिए बनाया गया है। इस बिल में एक और अहम प्रावधान यह है कि अगर कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलना चाहता है तो उसे कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत अधिकारी को सूचना देनी होगी। इसके बाद अधिकारी इस जानकारी को सार्वजनिक करेगा और लोगों को 30 दिन के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया जाएगा। धर्म परिवर्तन होने के बाद उस व्यक्ति और समारोह आयोजित करने वाले व्यक्ति या संस्था को 21 दिन के अंदर प्रशासन को लिखित घोषणा देनी होगी। अगर किसी को लगता है कि धर्म परिवर्तन गलत तरीके से कराया गया है तो उस व्यक्ति के माता-पिता, भाई-बहन या रिश्तेदार पुलिस में एफआईआर दर्ज करा सकते हैं, और पुलिस को उस शिकायत पर कार्रवाई करनी होगी।

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'महाराष्ट्र ऐसा कानून लाने वाला पहला राज्य नहीं'
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र ऐसा कानून लाने वाला पहला राज्य नहीं है। इससे पहले उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड जैसे कई राज्यों में भी इसी तरह के कानून बनाए जा चुके हैं। उन्होंने दोहराया कि इस कानून का मकसद किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि धोखे और दबाव के जरिए होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है।

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