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राफेल मामला: नागपुर में दसॉल्ट रिलायंस एविएशन लिमिटेड फैक्ट्री में तेजी से शुरू हुआ काम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर
Updated Sun, 30 Sep 2018 12:54 AM IST
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Rafale Aircraft
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राफेल डील का मुद्दा अभी थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ जहां सरकार इस मुद्दे पर सफाई पर सफाई दे रही है वहीं दूसरी ओर विपक्ष लगातार हमलावर है। वहीं महाराष्ट्र के नागुर में दसॉल्ट रिलायंस एविएशन लिमिटेड फैक्ट्री में तेजी से काम चल रहा है। बता दें कि वहां मिहान-एसईजेड के तीन किलोमीटर अंदर डीआरएएल का बोर्ड लगा हुआ है। यह इलाका 10 हजार वर्गफुट तक फैला हुआ है जिसमें डीअारएएल के 50 कर्मचारी तैनात हैं। यह फ्रांसीसी कर्मचारी भारतीय कर्मचारियों को ट्रेनिंग दे रहे हैं।
मालूम हो कि दसॉल्ट ही राफेल फाइटर जेट बनाती है। वहीं सूत्रों के मुताबिक यहां राफेल से जुड़ा हुआ अभी कोई भी काम शुरू नहीं हुआ है। लेकिन कंपनी के पास विमानों के पुर्जे बनाने की स्वीकृति है। एक महीने पहले वाणिज्य मंत्रालय ने मिहान एसईजेड में दो यूनिट लगाने की अनुमति दी है जिसमें रिलायंस-थालेस जॉइंट वेंचर और रिलायंस कंपोनेंट्स शामिल हैं। योजना है कि नागपुर में एक टेस्टिंग यूनिट भी बनाई जाए। इससे रिलायंस को विमान से जुड़े अन्य ऑर्डर भी मिलेंगे।
रिलायंस कंपनी पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है। रिलायंस यरोस्ट्रक्चर लिमिटेड को यहां राफेल डील से पहले ही वर्ष 2015 में 105 एकड़ जमीन दी गई थी जिसे धीरूभाई अंबानी एयरोस्पेस पार्क के नाम से भी जाना जाता है। इसकी खास बात यह है कि यहां किसी बाहरी व्यक्ति की एंट्री नहीं है। यहां तैनात सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि वह केवल उन्हीं लोगों को अंदर आने देते हैं जिनका उनके साथ व्यापारिक संबंध है।
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यहां जैसे ही फ्रांसीसी कर्मचारी भारतीय कर्मचारियों को ट्रेनिंग दे देंगे उसके बाद विमानों के कलपुर्जों का उत्पादन शुरू हो जाएगा। संभावना है कि इसकी सप्लाई अगले साल से शुरू की जा सकती है। इसके लिए 30 एकड़ में एक हैंगर तैयार किया जा रहा है।
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मालूम हो कि दसॉल्ट ही राफेल फाइटर जेट बनाती है। वहीं सूत्रों के मुताबिक यहां राफेल से जुड़ा हुआ अभी कोई भी काम शुरू नहीं हुआ है। लेकिन कंपनी के पास विमानों के पुर्जे बनाने की स्वीकृति है। एक महीने पहले वाणिज्य मंत्रालय ने मिहान एसईजेड में दो यूनिट लगाने की अनुमति दी है जिसमें रिलायंस-थालेस जॉइंट वेंचर और रिलायंस कंपोनेंट्स शामिल हैं। योजना है कि नागपुर में एक टेस्टिंग यूनिट भी बनाई जाए। इससे रिलायंस को विमान से जुड़े अन्य ऑर्डर भी मिलेंगे।
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रिलायंस कंपनी पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है। रिलायंस यरोस्ट्रक्चर लिमिटेड को यहां राफेल डील से पहले ही वर्ष 2015 में 105 एकड़ जमीन दी गई थी जिसे धीरूभाई अंबानी एयरोस्पेस पार्क के नाम से भी जाना जाता है। इसकी खास बात यह है कि यहां किसी बाहरी व्यक्ति की एंट्री नहीं है। यहां तैनात सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि वह केवल उन्हीं लोगों को अंदर आने देते हैं जिनका उनके साथ व्यापारिक संबंध है।
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यहां जैसे ही फ्रांसीसी कर्मचारी भारतीय कर्मचारियों को ट्रेनिंग दे देंगे उसके बाद विमानों के कलपुर्जों का उत्पादन शुरू हो जाएगा। संभावना है कि इसकी सप्लाई अगले साल से शुरू की जा सकती है। इसके लिए 30 एकड़ में एक हैंगर तैयार किया जा रहा है।