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Chamoli Tunnel Accident: Rescue of trapped workers—here is how the personnel reached inside! Chamoli Tunnel La
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Chamoli Tunnel Accident:टनल में फंसे मजदूरों का Rescue,ऐसे अंदर पहुंचे जवान!Chamoli Tunnel Landslide
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Fri, 14 Aug 2026 02:52 AM IST
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उत्तराखंड के चमोली से इस वक्त बड़ी खबर सामने आई है। अलकनंदा नदी पर निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टनल में अचानक पानी और मलबा घुसने से कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए। जिस जगह मजदूर काम कर रहे थे, उससे करीब 150 मीटर दूर भूस्खलन हुआ, जिसके बाद पत्थर और मलबा पानी के साथ टनल के भीतर पहुंच गया। देखते ही देखते टनल में गले तक पानी और मलबा भर गया। सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और रात में ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। फिलहाल छह लोगों के लापता होने की बात सामने आई है और उन्हें सुरक्षित निकालने की कोशिश जारी है।
चमोली में अलकनंदा नदी पर बन रही विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टनल में हादसे के बाद हड़कंप मच गया।
बताया जा रहा है कि टेल रेस टनल यानी टीआरटी में मजदूर काम कर रहे थे। इसी दौरान मजदूरों से करीब 150 मीटर दूर भूस्खलन हुआ। भूस्खलन के बाद बड़ी मात्रा में पानी, पत्थर और मलबा टनल के अंदर जा घुसा। इसकी चपेट में कई मजदूर आ गए।
हादसे के बाद टनल के अंदर हालात बेहद मुश्किल हो गए। बताया जा रहा है कि पानी और मलबा काफी ऊंचाई तक भर गया है। इसके चलते अंदर फंसे लोगों तक पहुंचना रेस्क्यू टीम के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
घटना की जानकारी मिलते ही राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। रात करीब 10 बजे एनडीआरएफ की टीमें तीन वाहनों के साथ टनल के अंदर पहुंचीं। जवानों ने पानी के बीच आगे बढ़ने के लिए नीले रंग के ड्रमों का सहारा लिया और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
लेकिन टनल में लगातार पानी भरने के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। चमोली के एसपी सुरजीत सिंह पंवार के मुताबिक, श्रीनगर गढ़वाल से राफ्ट मंगाई गई है। इसी राफ्ट की मदद से टनल में लापता छह लोगों तक पहुंचने और उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की जाएगी।
यानी रेस्क्यू टीम के सामने चुनौती सिर्फ मलबे की नहीं है, बल्कि टनल के भीतर जमा पानी भी ऑपरेशन को मुश्किल बना रहा है। इसके बावजूद एनडीआरएफ और प्रशासन की टीमें लगातार अभियान में जुटी हुई हैं।
वहीं, परियोजना के प्रोजेक्ट निदेशक शरद कुमार ने हादसे को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि इस वक्त सबसे पहली प्राथमिकता टनल में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके लिए उपलब्ध सभी संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रोजेक्ट निदेशक के मुताबिक, प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दी जाएगी। साथ ही घटना की विस्तृत जांच भी कराई जाएगी।
प्रोजेक्ट की मैनेजमेंट टीम भी राहत और बचाव कार्य में प्रशासन के साथ मिलकर जुटी हुई है। मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है और टनल में फंसे लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि टनल के अंदर फंसे छह लोगों तक रेस्क्यू टीम कितनी जल्दी पहुंच पाती है। पानी और मलबे के बीच चुनौती बेहद बड़ी है, लेकिन एनडीआरएफ, प्रशासन और परियोजना प्रबंधन की टीमें सभी जरूरी संसाधनों के साथ बचाव अभियान में जुटी हैं।
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