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असम में बाढ़ का कहर जारी: छह जिलों के 46 हजार से अधिक लोग प्रभावित, एक शख्स की मौत
Wed, 01 Jul 2026 06:53 PM IST
राहुल कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, गुवाहाटी
अमर उजाला ब्यूरो, गुवाहाटी
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 01 Jul 2026 06:53 PM IST
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असम में बाढ़
- फोटो : आईएएनएस
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असम में बाढ़ की स्थिति बुधवार को भी गंभीर बनी हुई है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, छह जिलों में 46,938 से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि 3,809 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पानी में डूब गई है। इस सीजन में बाढ़ से पहली मौत भी दर्ज की गई है। इस दौरान, बाढ़ के पानी में डूबने से एक महिला की मौत हो गई।
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एएसडीएमए के अनुसार, धेमाजी, लखीमपुर, बिस्वनाथ, नलबाड़ी, डिब्रूगढ़ और चिरांग जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। इन जिलों के 10 राजस्व सर्किलों के 221 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें धेमाजी सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है, जहां अकेले 45,841 लोग बाढ़ से जूझ रहे हैं। प्राधिकरण ने बताया कि धेमाजी जिले के सिस्सीबोरगांव क्षेत्र में बाढ़ के पानी में डूबने से एक महिला की मौत हो गई। इसे इस वर्ष के बाढ़ सीजन की पहली मौत माना गया है।
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बाढ़ के कारण ब्रह्मपुत्र और दिसांग नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। तेज बहाव के चलते कई इलाकों में सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। फिलहाल 450 से अधिक विस्थापित लोगों को चार राहत शिविरों में ठहराया गया है, जबकि प्रभावित
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क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए छह राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
बाढ़ का असर पशुधन पर भी पड़ा है। एएसडीएमए के अनुसार, राज्य में अब तक 88 हजार से अधिक मवेशी और अन्य पशु बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने कहा है कि जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रभावित जिलों में राहत, बचाव तथा पुनर्वास अभियान जारी है। मौसम और नदी के जलस्तर के आधार पर स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है।
बाढ़ प्रभावित अरुणाचल पहुंचे शिवराज, राज्यपाल से मुलाकात कर कृषि और राहत कार्यों पर की चर्चा
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को अरुणाचल प्रदेश के दौरे के दौरान राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनाइक (सेवानिवृत्त) से लोक भवन में मुलाकात की। लोकभवन के मुताबिक इस दौरान दोनों नेताओं के बीच हालिया बाढ़ से हुए नुकसान, राहत एवं पुनर्वास, कृषि विकास, सिंचाई, सड़क संपर्क, जैविक खेती और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई। शिवराज राज्य में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और हालात का जायजा लिया।
बैठक में राज्यपाल ने हाल की बाढ़ से कई जिलों में हुई क्षति की जानकारी देते हुए राहत, पुनर्वास और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए केंद्र से निरंतर सहयोग का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में टिकाऊ और उच्च मूल्य वाली कृषि का बड़ा केंद्र बनने की क्षमता है। इसके लिए सिंचाई, आधुनिक तकनीक, जैविक खेती, बाजार तक पहुंच और ग्रामीण ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है।
राज्यपाल ने 'ऑर्गेनिक अरुणाचल' ब्रांड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों, किसानों के प्रशिक्षण, कृषि अनुसंधान और जलवायु अनुकूल खेती के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और नाबार्ड जैसी संस्थाओं के सहयोग की भी आवश्यकता जताई। उन्होंने कृषि आधारित उद्योगों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के विस्तार पर भी जोर दिया, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके। शिवराज सिंह चौहान ने राज्य के कृषि विकास और समग्र प्रगति के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। इससे पहले केंद्रीय मंत्री ने राजभवन परिसर स्थित लोक भवन में बकुल (मौलसिरी) का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का संदेश दिया।