फ्री ऑनलाइन कोचिंग, AI की ट्रेनिंग: पीएम मोदी का लाल किले से बड़ा एलान, कहा- युवा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता
देश के युवाओं को विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने उनके लिए एआई ट्रेनिंग से लेकर स्टार्टअप और खेलों तक के लिए कई बड़े एलान किए।
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लाल किले की प्राचीर से देश के युवाओं के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने कई बड़े एलान किए। उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं को विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि सरकार ने शिक्षा, एआई, स्टार्टअप, स्किल डेवलपमेंट और खेलों में अवसर बढ़ाने पर जोर दिया है। आने वाले एक वर्ष में एक करोड़ लोगों को एआई स्किल देने, मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का नेटवर्क खड़ा करने और 5 से 15 वर्ष के बच्चों में खेल प्रतिभा खोजने के लिए गांव-गांव व स्कूल-स्कूल टैलेंट हंट चलाने का लक्ष्य रखा गया है। युवाओं को संसाधनों की कमी न होने देने और उन्हें हर क्षेत्र में नेतृत्व के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया है।
फ्री ऑनलाइन कोचिंग का एलान
पीएम मोदी ने कहा कि देश में कोचिंग क्लासेज की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच हर परिवार को लगता है कि अगर बच्चे को कोचिंग नहीं भेजा गया तो उसका भला नहीं हो सकता। इसी सोच को बदलने के लिए हमने छात्रों के लिए फ्री ऑनलाइन कोचिंग शुरू करने का निर्णय लिया है। हम युवाओं को मुफ्त कोचिंग देने का एक व्यापक नेटवर्क खड़ा करने जा रहे हैं।
एक साल में एक करोड़ युवाओं को एआई स्किल देने का लक्ष्य
लाल किले से मैं देश के नौजवानों के लिए घोषणा करना चाहता हूं कि आने वाले एक वर्ष में एक करोड़ लोगों को एआई स्किल देने के लिए हम काम करेंगे। हमारा लक्ष्य है कि भारत का युवा एआई की दुनिया में केवल भागीदार न रहे, बल्कि नेतृत्व करने का सामर्थ्य रखे।
नई शिक्षा नीति से युवाओं के लिए खुले अवसर
हमने नई शिक्षा नीति लागू की है। 2004 से 2014 तक देश में 50 से कम यूनिवर्सिटी थीं, जबकि पिछले 10 वर्षों में 650 यूनिवर्सिटी जुड़ चुकी हैं। 2014 से पहले मेडिकल की 400 सीटें थीं, आज यह संख्या 850 से ज्यादा हो गई है। अब विदेशी यूनिवर्सिटी भी भारत आ रही हैं, जिससे युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
विकसित भारत का सबसे बड़ा लाभार्थी युवा
मैं देशवासियों को भरोसा देता हूं कि इसी रास्ते पर मेहनत में कोई कमी न करते हुए हम विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करके रहेंगे। हमें मिलकर आगे बढ़ना है और सुधारों को लगातार आगे बढ़ाते रहना है। हम यह काम पूरे कन्विक्शन के साथ कर रहे हैं। इस विकास यात्रा का सबसे बड़ा लाभार्थी कौन है और इसका साधक कौन है? इसका साधक देश का युवा है। देश के विकास में युवाओं की भूमिका सबसे बड़ी है और विकसित भारत का सबसे बड़ा लाभार्थी भी देश का युवा ही होगा। इसलिए हमें युवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाते हुए आगे बढ़ना है।
स्टार्टअप, स्किल और सस्ते डेटा ने युवाओं को दी नई ताकत
स्टार्टअप इंडिया के चलते देश में लगातार नए स्टार्टअप खड़े हो रहे हैं। मैं युवाओं से कहना चाहता हूं कि आप सपने लेकर आगे आइए, हम संसाधनों की कमी नहीं होने देंगे। सस्ते डेटा ने युवाओं को आगे बढ़ने का मौका दिया है और उन्हें नई ताकत दी है। इसी दिशा में स्किल इंडिया को आगे बढ़ाया गया है और खेलो इंडिया का भी विस्तार किया गया है। इन पहलों ने युवाओं के लिए सीखने, कौशल विकसित करने और अपनी प्रतिभा को आगे ले जाने के नए रास्ते खोले हैं।
खेलों में दुनिया के मंच पर बढ़ रहा भारत
आज भारत खेल की दुनिया में अपनी जगह बना रहा है। भारत का राष्ट्रगान आज दुनिया के कई पोडियम पर सुनाई देता है। टॉप्स योजना ने भारतीय खिलाड़ियों को काफी बढ़ावा दिया है। खेलो इंडिया गेम्स, खेलों के लिए कोचिंग, स्पोर्ट्स मेडिसिन और अन्य सुविधाओं के विस्तार से युवाओं के लिए खेल के क्षेत्र में भी नए अवसर बने हैं। भारत 2036 में ओलिंपिक की मेजबानी के लिए मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहा है। वहीं, 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भी भारत करने वाला है।
जिन खेलों में भारत क्वालिफाई नहीं करता, वहां भी युवाओं को मौका
ओलिंपिक में करीब 40 खेल होते हैं और 350 स्पर्धाएं होती हैं। भारत इनमें से करीब दो-तिहाई खेलों में मौजूद नहीं होता और हम उन स्पर्धाओं के लिए क्वालिफाई नहीं करते। लेकिन मैं आपको चैलेंज देता हूं कि जिन स्पर्धाओं में भारत क्वालिफाई नहीं करता, हम उन खेलों में भी आगे बढ़ने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे। हमारा प्रयास होगा कि भारतीय युवा अधिक से अधिक खेलों में दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करें।
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5 से 15 साल के बच्चों में खोजी जाएगी खेल प्रतिभा
5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों में प्रतिभा खोजने के लिए गांव-गांव और स्कूल-स्कूल टैलेंट हंट चलाया जाएगा। इसके बाद प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने और प्रशिक्षित करने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इसका मकसद देश के हर कोने में छिपी युवा प्रतिभा को सामने लाना है, ताकि संसाधनों या अवसरों की कमी किसी बच्चे के सपने के रास्ते में बाधा न बने।