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स्वतंत्रता सेनानियों ने गोली खाईं, आप अंडों से डरती हैं?: महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट की दो-टूक, ठुकराई मांग

Fri, 07 Aug 2026 02:39 PM IST
Pavan पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Fri, 07 Aug 2026 02:39 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की पुलिस के सामने वर्चुअल रूप से पेश होने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि राजनीति में आने के बाद अंडे फेंके जाने के डर से जांच से बचा नहीं जा सकता। अदालत के रुख के बाद महुआ ने याचिका वापस ले ली।

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Freedom fighters took bullets, you are afraid of eggs?: Supreme Court remark to Mahua Moitra, rejected plea
सु्प्रीम कोर्ट ने ठुकराई महुआ मोइत्रा की मांग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने पुलिस के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने के बजाय वर्चुअली पूछताछ की अनुमति मांगी थी। अदालत ने साफ कहा कि जांच का सामना करना होगा और केवल सांसद होने के आधार पर विशेष छूट नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के सामने महुआ मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि उनकी मुवक्किल जांच में सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूछताछ की अनुमति दी जाए।
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क्या है मामला?
वकील ने कहा कि पिछली बार जब महुआ मोइत्रा अपने निर्वाचन क्षेत्र के पुलिस थाने गई थीं, तब उनके खिलाफ विरोध हुआ था और उन पर अंडे भी फेंके गए थे। इसलिए उनकी सुरक्षा को देखते हुए वर्चुअल उपस्थिति की अनुमति दी जानी चाहिए। 
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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
इस पर न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, 'क्या सिर्फ इसलिए कि आप सांसद हैं?' उन्होंने आगे कहा, 'जब आपने राजनीति में आने का फैसला किया है तो अंडे फेंके जाने से क्यों डरती हैं? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए अपनी छाती पर गोलियां खाई थीं'। अदालत के रुख को देखते हुए महुआ मोइत्रा की ओर से उनके वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही मामला वापस लिया हुआ मानकर खारिज कर दिया गया।


हेट स्पीच मामले में हाईकोर्ट के आदेश से राहत नहीं
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को हेट स्पीच मामले में कोई राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया, जिसमें उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया था। महुआ मोइत्रा के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के होगलबेरिया थाने में मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले को झूठा बताते हुए एफआईआर रद्द करने और पुलिस की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी।

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कलकत्ता हाईकोर्ट में 1 अक्तूबर को अगली सुनवाई
21 जुलाई को कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने उन्हें 5 अक्तूबर तक गिरफ्तारी जैसी कठोर कार्रवाई से अंतरिम राहत दी थी। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह राहत तभी मिलेगी, जब महुआ मोइत्रा जांच में पूरा सहयोग करें और पुलिस के नोटिस का पालन करते हुए जांच अधिकारी के सामने पेश हों। हाईकोर्ट ने कहा था कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की जिन धाराओं में मामला दर्ज है, उनमें अधिकतम सजा सात वर्ष से कम है। इसलिए कानून के अनुसार उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा मिल सकती है, लेकिन जांच में सहयोग करना अनिवार्य होगा। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई कलकत्ता हाईकोर्ट में 1 अक्तूबर को होगी।
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