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एअर इंडिया विमान हादसे की बरसी: त्रासदी से टीमवर्क तक, गुजरात की इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ने पेश की थी मिसाल

पीटीआई, अहमदाबाद Published by: Pavan Updated Wed, 10 Jun 2026 03:19 PM IST
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सार

बीते साल 12 जून को लंदन जाने वाली एअर इंडिया की उड़ान संख्या एआई-171 अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद मेघानीनगर इलाके में बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल कॉम्प्लेक्स पर क्रैश हो गई थी। इस हादसे में विमान में सवार 241 लोगों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई थी। चमत्कारिक रूप से एक यात्री बच गया था।

From tragedy to teamwork: Gujarat's emergency response after AI 171 crash sets model of coordination
एअर इंडिया विमान हादसे की बरसी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

अहमदाबाद में एअर इंडिया की उड़ान संख्या AI-171 विमान हादसे की पहली बरसी पर अहमदाबाद के अधिकारियों ने त्रासदी के दौरान किए गए राहत और बचाव अभियान को याद किया है। इसमें डॉक्टरों, पुलिस, फॉरेंसिक विशेषज्ञों, प्रशासन और स्वयंसेवकों ने मिलकर 260 मृतकों की पहचान और पीड़ित परिवारों की सहायता की थी। सिविल अस्पताल के सुपरिटेंडेंट ने उस दुखद दिन के बारे में अपना अनुभव साझा किया है। 


पिछले साल 12 जून को हादसे से दहल गया था देश
12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए विमान हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। 260 लोगों की जान लेने वाली इस त्रासदी के बाद गुजरात प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, फॉरेंसिक विशेषज्ञों और स्वयंसेवी संगठनों ने जिस तेजी के साथ राहत और बचाव कार्य संभाला, वह देश भर के लिए आपदा प्रबंधन की मिसाल बन गया। हादसे की पहली बरसी पर अधिकारियों ने उन दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे डीएनए मिलान से लेकर शवों के अंतिम हस्तांतरण तक हर प्रक्रिया को व्यवस्थित और मानवीय तरीके से पूरा किया गया।
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हादसे के ठीक बाद सक्रिय हुआ प्रशासन
एआई171 प्लेन क्रैश के ठीक बाद अहमदाबाद सिविल अस्पताल परिसर शोक संतप्त परिवारों की मदद करने वाले लोगों, अधिकारियों, NGO और स्वयंसेवकों से भर गया था। अधिकारियों ने उस मंजर को याद करते हुए प्रार्थना की कि ऐसी त्रासदी दोबारा कभी न हो। अधिकारियों ने बताया कि कैसे एक अकल्पनीय स्थिति के बीच शहर ने अपना सबसे बड़ा अपातकालीन अभियान शुरू किया। इसमें चिकित्सीय जरूरतों के लिए तेजी से तालमेल बिठाया गया और ट्रॉमा टीमों को फौरन तैनात किया गया। हादसे की भयावहता ऐसी थी कि कई शव बुरी तरह जल गए थे।

डीएनए के जरिए किया गया था शवों का परीक्षण
इस भीषण दुर्घटना में जल गए शवों का हाल ऐसा था कि उनकी पहचान करना भी संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में अधिकारियों ने मृतकों की पहचान के लिए डीएनए परीक्षण को ही एकमात्र भरोसेमंद तरीका माना। फोरेंसिक टीमों ने दूसरे विशेषज्ञों के साथ मिलकर लगातार काम किया ताकि पीड़ितों के शवों को सम्मानजनक तरीके से संभाला जा सके। अहमदाबाद सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट राकेश जोशी ने बताया कि डॉक्टरों, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, एनजीओ, राहत टीमों और दमकल विभाग के मिले-जुले प्रयासों की वजह से कम समय में ही स्थिति को व्यवस्थित ढंग से संभाल लिया गया।

हादसे का याद कर क्या बोले डॉक्टर?
अहमदाबाद सिविल अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि कहा, ‘हमने कभी नहीं सोचा था कि हम अपनी जिंदगी में ऐसा कुछ देखेंगे।’ डॉ. जोशी एक जटिल सर्जरी कर रहे थे, तभी हॉस्टल इलाके के पास धुआं उठने की सूचना मिली। इसके कुछ ही समय बाद उनको जानकारी मिली कि एअर इंडिया का एक अंतरराष्ट्रीय विमान क्रैश हो गया था। हादसे के ठीक बाद जो हुआ, वह शहर में देखा गया अब तक का सबसे बड़ी आपातकालीन चिकित्सीय प्रतिक्रिया था। पीड़ितों को अस्पताल लाए जाने से पहले ही सिविल अस्पताल ने मास-कैजुअल्टी प्रोटोकॉल (बड़ी संख्या में हताहत होने की स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया) लागू कर दिया था। अधिकारी ने बताया कि डॉक्टरों के ग्रुप में मैसेज भेजे गए, इमरजेंसी दवाओं का इंतजाम किया गया, ब्लड बैंकों को अलर्ट किया गया और ट्रॉमा टीमों को फौरन तैनात किया गया। जोशी ने बताया कि अस्पताल पहुंचने वाले पहले घायल व्यक्ति हॉस्टल कॉम्प्लेक्स में काम करने वाले माली थे।

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शवों की स्थिति देख सिहर उठे थे डॉक्टर
हादसे के एक घंटे के भीतर जलने, हड्डी टूटने और सदमे से पीड़ित लगभग 71 घायल लोग अस्पताल पहुंचाए जा चुके थे। गंभीर रूप से घायल मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके, इसके लिए सर्जन, न्यूरोसर्जन, फिजिशियन, एनेस्थेटिस्ट और इमरजेंसी डॉक्टरों की खास टीमें बनाई गईं। तत्काल प्रभाव से ऑपरेशन थिएटर तैयार किए गए और एक पूरे वार्ड को बड़े पैमाने पर घायलों के इलाज के लिए खास यूनिट में बदल दिया गया। डॉ. जोशी ने बताया कि इसके बाद सबसे दुखद हिस्सा आया, जब पीड़ितों के बुरी तरह जले हुए शव आने लगे। उस समय सबसे बड़ी चुनौती पीड़ितों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करना और उनके शवों को सम्मानपूर्वक संभालना बन गई। डॉ. जोशी ने बताया कि अपने परिजनों को ढूंढने आए परिवारों की मदद के लिए बीजे मेडिकल कॉलेज के कसौटी भवन में खास सहायता केंद्र बनाए गए थे। साइकोलॉजी डिपार्टमेंट की काउंसलिंग टीमों ने परेशान रिश्तेदारों को सांत्वना देने के लिए लगातार काम किया।
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