सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Gen Dwivedi said-Gen-z meet every criterion to become officers in army, this generation isn't afraid of risk

Interview: जनरल द्विवेदी बोले- सेना में अफसर बनने की हर कसौटी पर खरे हैं जेन-जी, जोखिम से नहीं घबराती यह पीढ़ी

आशुतोष भाटिया, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Fri, 05 Jun 2026 07:29 AM IST
विज्ञापन
Gen Dwivedi said-Gen-z meet every criterion to become officers in army, this generation isn't afraid of risk
जनरल उपेंद्र द्विवेदी, सेना प्रमुख - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन
करीब चार दशक की गौरवशाली और लंबी सैन्य सेवा के बाद इसी माह सेवानिवृत्त हो रहे सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कार्यकाल सेना के इतिहास में एक बड़े बदलाव का गवाह रहा है। उनके नेतृत्व में सेना ने ऑपरेशन सिंदूर जैसी निर्णायक और सफल कार्रवाई को अंजाम देकर दुनिया को यह साफ संदेश दिया कि भारत अब अपनी सुरक्षा के लिए पहले ही कदम उठाने को तैयार है। सेना प्रमुख के पद को महत्वाकांक्षा नहीं बल्कि एक सर्वोच्च दायित्व मानने वाले और सेवानिवृत्ति के बाद आहिस्ता जिंदगी कैफे के जरिये युवाओं को नई राह दिखाने का संकल्प रखने वाले जनरल द्विवेदी से आशुतोष भाटिया ने विशेष बातचीत की।


कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?
चुनौतियां हर सेनाध्यक्ष के कार्यकाल का हिस्सा होती हैं, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर का समय सबसे चुनौतीपूर्ण था। यह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि भारत की नई सामरिक सोच की परीक्षा थी। हमारे सामने चुनौती यह थी कि आतंकवाद का जवाब निर्णायक हो, सटीक हो और नियंत्रित भी रहे। ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि भविष्य की लड़ाई केवल बंदूक, टैंक या मिसाइल से नहीं लड़ी जाएगी। इसमें जमीन, हवा, साइबर, अंतरिक्ष और कॉग्निटिव क्षेत्र सभी का तालमेल जरूरी है। मुझे सबसे बड़ी चुनौती यही लगी कि इतने कम समय में निर्णय, समन्वय, सूचना युद्ध और कार्रवाई में संयम के साथ चलना था। भारत ने यह स्पष्ट किया कि आतंकवाद को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं माना जा सकता। जब कोई देश आतंकवाद को समर्थन देता है, तो उसका उत्तर भी उसी दृढ़ता से दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


यदि इसी कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि चुननी हो, तो आप किसे श्रेय देंगे?
इस दौरान सेना के रूपांतरण, आधुनिक तकनीक, ड्रोन क्षमता और नई सैन्य संरचनाओं के निर्माण जैसे कई अहम काम हुए। लेकिन यदि मुझे किसी एक उपलब्धि को चुनना हो, तो मैं ऑपरेशन सिंदूर को ही कहूंगा। इसमें हमारी संयुक्तता, आत्मनिर्भरता, तकनीक और सैन्य दक्षता का बहुत प्रभावी प्रदर्शन हुआ। यह वास्तव में हमारे पूरे राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र की सामूहिक क्षमता का एक ठोस प्रमाण था। यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि इसमें सैनिक का साहस, कमांडर का निर्णय, प्रौद्योगिकी का उपयोग और राजनीतिक-सामरिक इच्छाशक्ति  सब एकसूत्र में दिखाई दिए।
विज्ञापन
Trending Videos


भारत को भविष्य में एक टू-फ्रंट वॉर का सामना करना पड़ेगा?
आज की सुरक्षा परिस्थिति को केवल पारंपरिक टू-फ्रंट वॉर के पुराने चश्मे से नहीं देखा जा सकता। खतरे अब बंटे हुए, अघोषित और कई क्षेत्रों में हैं। ऑपरेशन सिंदूर ने यही दिखाया कि दुश्मन केवल सीमा पर खड़ा प्रतिद्वंद्वी सैनिक नहीं हो सकता, वह आतंकवादी, प्रायोजक, दुष्प्रचार नेटवर्क, ड्रोन, साइबर टूल या मनोवैज्ञानिक अभियान के रूप में भी सामने आ सकता है। इसलिए मेरी दृष्टि में भारत को हर संभावना के लिए तैयार रहना होगा। सीधे युद्ध के लिए भी और हाइब्रिड युद्ध के लिए भी। ढाई मोर्चे की चुनौती अब पूरी तरह स्थापित वास्तविकता है। सेना किसी भी समानांतर खतरे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

फिर जिम्मेदारी मिले तो उसको निभाने के बारे में सोच सकते हैं?
सेना में मेरी यात्रा कभी किसी विशेष पद तक पहुंचने की महत्वाकांक्षा से प्रेरित नहीं रही। मेरा ध्यान हमेशा दिए गए दायित्व को पूरी क्षमता से निभाने पर रहा और यही सोच मेरे पूरे सैन्य जीवन की मार्गदर्शक रही। मैंने कभी सेना प्रमुख बनने का सपना नहीं देखा था। जहां तक सेवानिवृत्ति के बाद का सवाल है, एक सैनिक कभी पूरी तरह सेवा से अलग नहीं होता। यदि देश को मेरी जरूरत पड़ी तो मैं हमेशा तैयार मिलूंगा। फिलहाल मेरा ध्यान आदिवासी क्षेत्रों में विपरीत प्रवास पर काम करने पर रहेगा। मैं एक कैफे खोलने की योजना भी बना रहा हूं, जिसका नाम 'आहिस्ता जिंदगी' होगा।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed