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'युवाओं से बातचीत अच्छा कदम': जेन-जी से भागवत के संवाद से पहले बोले दीपके; झारखंड में प्रदर्शन पर क्या कहा?
Tue, 04 Aug 2026 03:01 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र)।
पीटीआई, छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र)।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 04 Aug 2026 03:01 PM IST
सार
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के जेन-जी छात्रों से संवाद से पहले सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि युवाओं से जुड़ी बातचीत में युवाओं की भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने झारखंड में कथित पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों का मुद्दा भी उठाया। पढ़िए रिपोर्ट-
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अभिजीत दीपके
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
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विस्तार
युवाओं के साथ बातचीत करना अच्छा कदम है, लेकिन अगर इस बातचीत का नेतृत्व युवा या जेन-जी के लोग करें तो यह और बेहतर होगा। यह बात मंगलवार को कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कही। मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत और छात्रों के बीच होने वाली बैठक से पहले दीपके ने यह बात कही।
मोहन भागवत 6 अगस्त को मुंबई में जेन-अल्फा और जेन-जी छात्रों से बातचीत करेंगे। इस कार्यक्रम में देश के 100 से ज्यादा शहरों के 15 से 19 साल की उम्र के 2,000 से अधिक छात्र शामिल होंगे।
नीट परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।
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आरएसएस प्रमुख के कार्यक्रम को लेकर क्या कहा?
मुंबई में होने वाले मोहन भागवत के कार्यक्रम को लेकर पूछे गए सवाल पर अभिजीत दीपके ने कहा, यह अच्छी बात है कि बातचीत हो रही है। लेकिन अगर इसके लिए कुछ युवा चेहरों को आगे किया जाए तो यह और बेहतर होगा।
उन्होंने कहा, युवाओं ने यह बदलाव लाने के लिए मजबूर किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंस्टाग्राम पर रील पोस्ट करनी पड़ रही है। मोहन भागवत भी जेन-जी से बातचीत करना चाहते हैं।
छत्रपति संभाजीनगर में अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में सीजेपी प्रमुख ने कहा, देर से ही सही उन्होंने समझ लिया है कि जेन-जी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न ही उन्हें खारिज किया जा सकता है। हमें उनसे बातचीत करनी होगी। हमें इन युवाओं से बात करनी होगी। ये युवा देश का भविष्य हैं। दीपके ने कहा कि जेन-जी को युवाओं का प्रतिनिधित्व चाहिए।
उन्होंने कहा, मैं कहना चाहता हूं कि अगर युवाओं से बातचीत करने वाले चेहरे जेन-जी या युवा हों तो यह और बेहतर होगा। अगर 70-80 साल के लोग बात कर रहे हैं तो यह अच्छी बात है। लेकिन जेन-जी को इससे क्या मिलेगा? जेन-जी को युवा प्रतिनिधित्व चाहिए। अगर युवा ही युवाओं से बातचीत करेंगे तो यह और बेहतर होगा।
झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर क्या कहा?
दीपके ने आगे दावा किया कि झारखंड सरकार वहां आंदोलन कर रहे छात्रों की अनदेखी कर रही है। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के विरोध में छात्र 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन प्रदर्शन कर रहे हैं।
दीपके ने कहा कि उन्होंने फोन पर झारखंड में आंदोलन कर रहे छात्रों से बातचीत की है। उन्होंने कहा, उन्हें तंबू लगाने की अनुमति नहीं दी जा रही है और उनके लिए शौचालय की भी व्यवस्था नहीं है। झारखंड में उनके साथ वैसा ही व्यवहार किया जा रहा है, जैसा हमारे साथ पिछले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर पर किया गया था। लेकिन हम झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों के साथ हैं। सीजेपी इन प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी है।
ये भी पढ़ें: 'दीपके को तुरंत करें गिरफ्तार': दिल्ली पुलिस से सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान ने की मांग, लगाए क्या आरोप?
प्रदर्शनकारी छात्रों की क्या मांग है?
मंगलवार को प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग की कि झारखंड के बाहर के हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जजों की एक स्वतंत्र समिति से जांच कराई जाए। छात्रों का आरोप है कि राज्य सरकार जांच की जिम्मेदारी अपराध जांच विभाग (सीआईडी) को देकर मामले को 'दबाने' की कोशिश कर रही है।
इससे पहले छात्र केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग कर चुके हैं। साथ ही उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से भी जांच की मांग की थी। छात्रों का दावा है कि कथित भर्ती घोटाले में बड़े स्तर पर पैसे का लेन-देन हुआ है।
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मोहन भागवत 6 अगस्त को मुंबई में जेन-अल्फा और जेन-जी छात्रों से बातचीत करेंगे। इस कार्यक्रम में देश के 100 से ज्यादा शहरों के 15 से 19 साल की उम्र के 2,000 से अधिक छात्र शामिल होंगे।
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नीट परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।
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आरएसएस प्रमुख के कार्यक्रम को लेकर क्या कहा?
मुंबई में होने वाले मोहन भागवत के कार्यक्रम को लेकर पूछे गए सवाल पर अभिजीत दीपके ने कहा, यह अच्छी बात है कि बातचीत हो रही है। लेकिन अगर इसके लिए कुछ युवा चेहरों को आगे किया जाए तो यह और बेहतर होगा।
उन्होंने कहा, युवाओं ने यह बदलाव लाने के लिए मजबूर किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंस्टाग्राम पर रील पोस्ट करनी पड़ रही है। मोहन भागवत भी जेन-जी से बातचीत करना चाहते हैं।
छत्रपति संभाजीनगर में अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में सीजेपी प्रमुख ने कहा, देर से ही सही उन्होंने समझ लिया है कि जेन-जी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न ही उन्हें खारिज किया जा सकता है। हमें उनसे बातचीत करनी होगी। हमें इन युवाओं से बात करनी होगी। ये युवा देश का भविष्य हैं। दीपके ने कहा कि जेन-जी को युवाओं का प्रतिनिधित्व चाहिए।
उन्होंने कहा, मैं कहना चाहता हूं कि अगर युवाओं से बातचीत करने वाले चेहरे जेन-जी या युवा हों तो यह और बेहतर होगा। अगर 70-80 साल के लोग बात कर रहे हैं तो यह अच्छी बात है। लेकिन जेन-जी को इससे क्या मिलेगा? जेन-जी को युवा प्रतिनिधित्व चाहिए। अगर युवा ही युवाओं से बातचीत करेंगे तो यह और बेहतर होगा।
झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर क्या कहा?
दीपके ने आगे दावा किया कि झारखंड सरकार वहां आंदोलन कर रहे छात्रों की अनदेखी कर रही है। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के विरोध में छात्र 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन प्रदर्शन कर रहे हैं।
दीपके ने कहा कि उन्होंने फोन पर झारखंड में आंदोलन कर रहे छात्रों से बातचीत की है। उन्होंने कहा, उन्हें तंबू लगाने की अनुमति नहीं दी जा रही है और उनके लिए शौचालय की भी व्यवस्था नहीं है। झारखंड में उनके साथ वैसा ही व्यवहार किया जा रहा है, जैसा हमारे साथ पिछले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर पर किया गया था। लेकिन हम झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों के साथ हैं। सीजेपी इन प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ी है।
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प्रदर्शनकारी छात्रों की क्या मांग है?
मंगलवार को प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग की कि झारखंड के बाहर के हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जजों की एक स्वतंत्र समिति से जांच कराई जाए। छात्रों का आरोप है कि राज्य सरकार जांच की जिम्मेदारी अपराध जांच विभाग (सीआईडी) को देकर मामले को 'दबाने' की कोशिश कर रही है।
इससे पहले छात्र केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग कर चुके हैं। साथ ही उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से भी जांच की मांग की थी। छात्रों का दावा है कि कथित भर्ती घोटाले में बड़े स्तर पर पैसे का लेन-देन हुआ है।