फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   mha operation trishul 274 fugitives brought back to india red corner notices

MHA: भगोड़ों पर केंद्र का बड़ा अभियान, सैटेलाइट ट्रैकिंग और इंटरपोल सहयोग से तेज हुई प्रत्यर्पण प्रक्रिया

Tue, 04 Aug 2026 03:22 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जितेंद्र भारद्वाज Updated Tue, 04 Aug 2026 03:22 PM IST
सार

गृह मंत्रालय के अनुसार, केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया को तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए तेज किया है। सरकार का दावा है कि 2021 से अब तक 36 देशों से 274 वांछित अपराधियों को भारत लाया गया, जबकि पिछले तीन वर्षों में 401 मामलों में रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुए। मंत्रालय ने बताया कि ‘ऑपरेशन त्रिशूल’, इंटरपोल समन्वय, भारतपोल, नए आपराधिक कानूनों और डिजिटल ट्रैकिंग जैसी व्यवस्थाओं ने प्रत्यर्पण और सूचना साझा करने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया है। सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी प्राथमिकता बताया है।

विज्ञापन
mha operation trishul 274 fugitives brought back to india red corner notices
भगोड़े पर सरकार की कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

केंद्र सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। 2021 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। पिछले तीन साल में 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुआ है। मोदी सरकार ने 'ऑपरेशन त्रिशूल' के माध्यम से विदेशों में नाम और पहचान बदल कर छिपे भगोड़ों की जियो-लोकेशन ट्रैक करने के लिए सैटेलाइट और डिजिटल फुटप्रिंट का उपयोग किया है। भारत ने भगोड़ों के खिलाफ एक एकीकृत, खुफिया-आधारित और प्रौद्योगिकी-संचालित मॉडल विकसित किया है, जिससे भगोड़ों के खिलाफ सख्ती बरतते हुए उन्हें वापस लाने का रास्ता साफ हुआ। 
विज्ञापन


पहले एक वर्ष में औसतन 4 भगोड़ों का प्रत्यर्पण होता था ...  
2014 से पहले प्रत्यर्पण के कानून अप्रासंगिक हो गए थे। केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां थीं। आर्थिक भगोड़ों को पकड़ने और उनकी संपत्ति जब्त करने के लिए कोई अलग कानून नहीं था। 2004 से 2013 के बीच एक वर्ष में औसतन केवल 4 भगोड़ों का प्रत्यर्पण होता था जबकि 110 अनुरोध लंबित थे। इसके अलावा, अधूरे दस्तावेज़ और धीमी कार्यवाही के कारण प्रत्यर्पण प्रक्रिया बहुत जटिल हो गई थी और विदेशी अदालतें भी प्रत्यर्पण की अनुमति नहीं देती थीं। साथ ही, कानूनी एवं न्यायिक बाधाओं जैसे, दोहरे अभियोजन से बचाव और दोहरे अपराध के सिद्धांत के कारण भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध रद्द किए जाते थे। गृह मंत्रालय और अन्य विभागों में समन्वय और एकीकृत रणनीति का अभाव भी था और भगोड़ों की जानकारी साझा करना, लोकेशन ट्रैकिंग, रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने जैसे कार्य धीमी गति से चलते थे।
विज्ञापन

 
अपराध श्रेणी 2026 2025 2024 कुल
धोखाधड़ी / फ्रॉड / वित्तीय अपराध 57 26 32 115
आतंकी गतिविधि / राष्ट्र-विरोधी गतिविधि / नार्को-टेरर 12 11 19 42
संगठित अपराध / गैंगस्टर / एक्सटॉर्शन 15 11 10 36
हत्या / डकैती / हिंसक अपराध 42 30 18 90
यौन अपराध  / POCSO  6 1 7 14
नार्कोटिक्स / NDPS / ड्रग ट्रैफिकिंग 24 18 10 52
स्मगलिंग / फेक करेंसी / साइबर / कंट्राबैंड 2 2 1 5
मानव तस्करी / किडनैपिंग 2 2 1 5
अन्य 22 11 9 42
कुल 182 112 107 401


सरकारों में पॉलिटिकल विल का अभाव ... 
भगोड़ों को वापस लाने को लेकर पहले की सरकारों में पॉलिटिकल विल का अभाव था, मोदी सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को 'राष्ट्रीय प्राथमिकता' बनाया। प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप, केन्द्रीय गृह मंत्री ने भगोड़ों के खिलाफ तीन स्तंभों पर जोर दिया है। इनमें वैश्विक अभियान, मजबूत समन्वय और स्मार्ट कूटनीति शामिल है। गृह मंत्री अमित शाह ने भगोड़े अपराधियों के मुद्दे को देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ बताया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मोदी सरकार 2019 में एनआईए संशोधन अधिनियम और यूएपीए संशोधन अधिनियम लेकर आई। 2020 के बाद भगोड़ों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया को 'मिशन मोड' में आगे बढ़ाया गया। इससे कार्रवाई केवल संगठनों तक सीमित नहीं रही बल्कि व्यक्तिगत आतंकी, हैंडलर्स, फंडिंग नेटवर्क और विदेशों में बैठे सपोर्ट सिस्टम तक कार्रवाई का दायरा बढ़ा।

भगौड़े अपराधियों की अनुपस्थिति में भी ट्रायल ...
वर्ष 2024 में मोदी सरकार ने तीन नए आपराधिक कानूनों को लागू किया, जिनमें भगोड़ों से संबंधित विशेष प्रावधान किए गए। पहली बार, बीएनएसएस की धारा 355 और 356 में 'गैर-हाजिरी में सुनवाई' का प्रावधान रखा गया। इससे भगौड़े अपराधियों की अनुपस्थिति में भी ट्रायल से लेकर अभियोजन तक संपूर्ण प्रक्रिया पूर्ण की जा सकेगी। 2022 में भारत ने 90वीं इंटरपोल जनरल असेंबली की मेजबानी की, जिसमें केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने वैश्विक पुलिसिंग में 'कम्युनिकेशन, कोलैबोरेशन और कोऑपरेशन' का संदेश दिया। भारत और वैश्विक एजेंसियों के बीच समन्वय, संपर्क और संवाद बढ़ाने के लिए गृह मंत्री अमित शाह द्वारा जनवरी, 2025 में 'भारतपोल' लॉन्च किया गया। भारतपोल ने सीबीआई, राज्य पुलिस मुख्यालय और जिला पुलिस मुख्यालय को एकीकृत कर एक व्यापक इन्फॉर्मेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्मित किया। इसके तहत, राज्य और केन्द्रीय एजेंसियों के 1,400 से अधिक यूनिट ऑफिस पोर्टल से जुड़कर सूचना का निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित कर रहे हैं। 
इन्फार्मेशन शेयरिंग के रिस्पॉन्स टाइम में भारी कमी ... 
इसके कारण, सीबीआई और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच इन्फार्मेशन शेयरिंग के रिस्पॉन्स टाइम में भारी कमी आई है। अब सीबीआई द्वारा मांगी गई जानकारी अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा 10 से 20 दिनों में और कुछ मामलों में मात्र 3 से 10 दिनों में साझा कर दी जाती है। मोदी सरकार ने मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून को सख्ती से लागू किया है। मोदी सरकार ने PMLA के सख्ती से लागू होने से वर्ष 2019 से 2026 तक भगौड़ों की कुल ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की। 2019 से 2026 तक ₹18,762 करोड़ की सफल वापसी की गई। इसमें देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों का पैसा शामिल है। सीबीआई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भगोड़ों को पकड़ने के लिए विशेष ग्लोबल ऑपरेशन्स सेंटर स्थापित किया। यह केंद्र इंटरपोल के माध्यम से दुनिया भर की पुलिस से रियल-टाइम समन्वय करता है। सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए हर राज्य व केन्द्रीय जांच एजेंसी में सीबीआई ने इंटरपोल सम्पर्क अधिकारी नियुक्त किए हैं।

रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या में वृद्धि ... 
इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या में वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 में 40, वर्ष 2023 में 100, वर्ष 2024 में 107, वर्ष 2025 में 112, और 2026 में अब तक 182 रेड कार्नर नोटिस जारी हुए हैं। भगोड़ों की जियो-लोकेशन ट्रैक करने के लिए ऑपरेशन त्रिशूल चलाया गया। इसके तहत इंटरपोल के सहयोग से छिपे हुए अपराधियों की सैटेलाइट, सर्विलांस, डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर लोकेशन स्थापित की गई। भगोड़ों द्वारा विदेश में नाम या पहचान बदल ली गई थी लेकिन फिर भी तकनीक और प्रोफाइल-मैपिंग के ज़रिये उन्हें खोज निकाला गया। प्रत्यर्पण प्रक्रिया तेज करने के लिए वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से मुकदमों की सुनवाई जैसी तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। पिछले 3 वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के विरुद्ध रेड कार्नर नोटिस जारी हुए।

तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से एक्स्ट्राडिशन ...
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में प्रत्यर्पण अनुरोधों को अधिक पेशेवर और मानक प्रारूप में तैयार करना शुरू किया गया है। इसके साथ ही हर देश की दस्तावेज आवश्यकताओं और कानूनी अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर लिखित आश्वासन दिए गए। वापस लाए गए भगोड़ों में टेररिस्ट, गैंगस्टर, फाइनेंशियल ऑफेंडर्स, नार्कोटिक्स आरोपी, मर्डर, रेप और पॉक्सो मामलों के वांछित शामिल हैं। भगोड़ों को वापस लाने का यह अभियान टेररिज्म, प्रो-खालिस्तान एक्स्ट्रीमिज्म, गैंगस्टर-टेरर कन्वर्जेंस, नार्कोटिक्स, साइबर फ्रॉड और फेक करेंसी तक फैला है। तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से एक्स्ट्राडिशन भारत के संकल्प और जटिल टेरर मामलों में धैर्यपूर्ण लीगल-डिप्लोमैटिक प्रयास का बड़ा उदाहरण है। जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों में विदेशों में बैठे भगोड़ों का उपयोग टेरर, नार्को-टेरर और क्रॉस-बॉर्डर सपोर्ट नेटवर्क को चलाने में हो रहा था।


विदेशों में बैठे भगोड़े हैं लाइव ऑपरेशनल थ्रेट्स ... 
भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सफलता का आधार केवल संयोग न हीं, बल्कि विश्वसनीयता, लीगल तैयारी, डिप्लोमैटिक पर्सिस्टेंस और सतत फॉलो-अप है। देश के अंदर समन्वय में IB, CBI, R&AW, NIA, ED, MEA, NCB, DGGI और राज्य पुलिस की साझा भूमिका रही है। यह मॉडल “Whole of Government” को दर्शाता है, जहाँ केंद्र और राज्य एजेंसियाँ मिलकर पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही हैं। जनवरी, 2026 में आईबी के मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) के तहत स्टैंडिंग फोकस ग्रुप का गठन एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम है। यह समूह फ्यूजिटिव प्रायोरिटी, डॉसियर स्टैंडर्डाइजेशन, सूचना गैप हटाने, विदेशी पार्टनर्स से फॉलो-अप और राज्य मामलों को राष्ट्रीय समर्थन देता है। विदेशों में बैठे भगोड़े निष्क्रिय केस-फाइल्स नहीं, बल्कि लाइव ऑपरेशनल थ्रेट्स हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed