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चिंताजनक: टूटे रिकॉर्ड, जून में उच्चतम स्तर पर पहुंचा महासागरों की सतह का तापमान, वैज्ञानिकों ने दी ये चेतावनी

Thu, 02 Jul 2026 05:56 AM IST
अमन तिवारी अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: अमन तिवारी Updated Thu, 02 Jul 2026 05:56 AM IST
सार

जून 2026 में वैश्विक समुद्री सतह का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और अल नीनो के संयुक्त प्रभाव से महासागर असामान्य रूप से गर्म हो रहे हैं, जिससे आने वाले महीनों में चरम मौसम, बाढ़, सूखा और चक्रवात का खतरा बढ़ सकता है।

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global ocean temperature record june 2026 climate change el nino copernicus sea surface temperature
महासागर का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धरती का सबसे बड़ा ताप नियंत्रक माने जाने वाले महासागर अब स्वयं असामान्य रूप से गर्म हो चुके हैं। जून 2026 में समुद्र की सतह का वैश्विक औसत तापमान इस मौसम के लिए अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है। वैज्ञानिक इसे केवल एक नया रिकॉर्ड नहीं, बल्कि पृथ्वी के जलवायु तंत्र में तेजी से गहराते असंतुलन और आने वाले महीनों में चरम मौसमी आपदाओं की गंभीर चेतावनी मान रहे हैं।
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यूरोपीय संघ की कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस और कॉपरनिकस मरीन सर्विस के ताजा विश्लेषण से संकेत मिला है कि मानवजनित जलवायु परिवर्तन और अल नीनो के संयुक्त प्रभाव ने महासागरों को अभूतपूर्व रूप से गर्म कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अल नीनो अगले कुछ महीनों में और मजबूत हुआ तो दुनिया के कई हिस्सों में भीषण गर्मी, अत्यधिक वर्षा, विनाशकारी बाढ़, सूखा, शक्तिशाली चक्रवात और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर गहरा संकट देखने को मिल सकता है।कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के अनुसार 21 जून 2026 को समुद्र की सतह का वैश्विक औसत तापमान 20.86 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह जून महीने के लिए अब तक का सबसे अधिक तापमान है और इसने 2023 तथा 2024 में दर्ज 20.83 डिग्री सेल्सियस के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
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उधर, कॉपरनिकस मरीन सर्विस ने अपने स्वतंत्र विश्लेषण में इसी दिन वैश्विक औसत समुद्री सतह तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया, जो उसके पिछले रिकॉर्ड से 0.1 डिग्री सेल्सियस अधिक है। दोनों स्वतंत्र वैज्ञानिक प्रणालियों का लगभग समान निष्कर्ष पर पहुंचना इस रिकॉर्ड की विश्वसनीयता को और मजबूत करता है।वैज्ञानिकों का कहना है कि महासागरों का इस स्तर तक गर्म होना सामान्य उतार-चढ़ाव का हिस्सा नहीं माना जा सकता। यह इस बात का संकेत है कि पृथ्वी का जलवायु तंत्र तेजी से असंतुलित हो रहा है। महासागर पूरी दुनिया के तापमान और मौसम प्रणाली को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनका लगातार गर्म होना वैश्विक जलवायु संकट को और गहरा सकता है।
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अल नीनो ने बढ़ाई चिंता
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने 2 जून 2026 को भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति विकसित होने की पुष्टि की थी। वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो और लगातार बढ़ते वैश्विक तापमान का संयुक्त प्रभाव महासागरों की गर्माहट को असामान्य स्तर तक ले गया है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में अधिकतर महासागर सामान्य से 0.35 से 0.73 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म बने हुए हैं। जून 2026 में यह अंतर सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।


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विशेषज्ञ बोले,नए और अनिश्चित दौर में प्रवेश कर रही है दुनिया...यूरोपीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र (ईसीएमडब्ल्यूएफ) में कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के निदेशक कार्लो बुओनटेम्पो का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियां जलवायु के एक नए और अनिश्चित चरण की शुरुआत का संकेत देती हैं।उनके अनुसार यदि समुद्र का तापमान इसी तरह ऊंचा बना रहा और अल नीनो ने और ताकत पकड़ी तो आने वाले महीनों में समुद्र और वातावरण दोनों में तापमान के नए रिकॉर्ड बन सकते हैं।
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