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अच्छी खबर: 80% तक टल सकता ब्रेन स्ट्रोक का खतरा? अध्ययन में जोखिम को लेकर हुआ खुलासा; ये हैं तीन आसान तरीके
सार
वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, करीब 80% ब्रेन स्ट्रोक के मामलों को रोका जा सकता है। मेडिटेरेनियन डाइट, 50 वर्ष से अधिक उम्र में शिंगल्स वैक्सीन और असुंडेक्सियन नाम की नई दवा स्ट्रोक का जोखिम कम करने में मददगार हो सकती हैं। विशेषज्ञों ने नियमित ब्लड प्रेशर व शुगर जांच, संतुलित आहार, व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज जारी रखने की सलाह दी है।
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ब्रेन स्ट्रोक का खतरा
- फोटो : Freepik.com
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विस्तार
ब्रेन स्ट्रोक दुनिया में मौत और विकलांगता की बड़ी वजहों में से एक है। इस सबके बीच अच्छी खबर कि करीब 80 फीसदी स्ट्रोक के मामलों पर रोक लगाई जा सकती है। हाल ही में सामने आए तीन अलग-अलग वैज्ञानिक अध्ययनों में स्ट्रोक का खतरा कम करने के तीन असरदार तरीके सामने आए हैं। इनमें मेडिटेरेनियन डाइट, शिंगल्स (हरपीज जोस्टर) का टीका और असुंडेक्सियन नाम की नई दवा शामिल हैं।
जब दिमाग तक खून पहुंचना बंद हो जाता है या दिमाग की किसी रक्त वाहिका से खून बहने लगता है तब स्ट्रोक आता है। इससे दिमाग की कोशिकाएं तेजी से नष्ट होने लगती हैं। अगर वक्त पर इलाज न मिले तो मरीज की मौत भी हो सकती है या शरीर का कोई हिस्सा हमेशा के लिए काम करना बंद कर सकता है।
शिंगल्स के टीके से दिल और दिमाग की सुरक्षा
एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि शिंगल्स वैक्सीन लगवाने वाले लोगों में स्ट्रोक और दिल से जुड़ी गंभीर दिक्कतों का खतरा कम देखा गया। इस अध्ययन में करीब 5.5 लाख लोगों को शामिल किया गया। हालांकि, वैज्ञानिकों ने कहा कि यह शुरुआती अध्ययन है और इससे अभी यह साबित नहीं होता कि महज वैक्सीन ही जोखिम कम करती है। फिर भी विशेषज्ञों का कहना है कि 50 साल से या उससे अधिक उम्र के लोगों को शिंगल्स का टीका लगवाने की सलाह दी जाती है।
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दूसरी बार स्ट्रोक से बचा सकती है नई दवा असुंडेक्सियन
न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार असुंडेक्सियन नाम की नई दवा उन लोगों में दूसरी बार स्ट्रोक आने का खतरा कम कर सकती है, जिन्हें पहले इस्केमिक स्ट्रोक या ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (टीआईए) हो चुका है। यह दवा शरीर में खून के थक्के बनने की प्रक्रिया को कम करती है और दोबारा स्ट्रोक का जोखिम कम हो सकता है। हालांकि, यह दवा अभी सभी मरीजों के लिए नियमित इलाज का हिस्सा नहीं बनी है। इसका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाना चाहिए।
फल, सब्जियां व जैतून का तेल लेने वालों में स्ट्रोक का खतरा कम
न्यूरोलॉजी ओपन एक्सेस में प्रकाशित एक अध्ययन में 1.05 लाख से अधिक लोगों के खानपान का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि मेडिटेरेनियन डाइट अपनाने वाली महिलाओं में स्ट्रोक का खतरा कम था। इस डाइट में मुख्य रूप से ताजे फल और सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, मेवे और बीज, जैतून का तेल और ओमेगा-3 से भरपूर मछली शामिल हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह डाइट ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, खराब कोलेस्ट्रॉल और शरीर की सूजन को काबू करने में मदद करती है। इससे स्ट्रोक का खतरा कम होता है।
ब्लड प्रेशर व शुगर की नियमित जांच कराएं
विशेषज्ञों के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक की सबसे बड़ी वजह है। इसके अलावा डायबिटीज, धूम्रपान, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खानपान और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल भी स्ट्रोक का खतरा बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों ने सलाह है कि स्ट्रोक से बचने के लिए रोज फल और हरी सब्जियां खाएं, नमक और तली-भुनी चीजें कम करें। ब्लड प्रेशर और शुगर की नियमित जांच कराएं। धूम्रपान व तंबाकू से दूर रहें। रोज 30 मिनट व्यायाम करें। 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग डॉक्टर की सलाह पर शिंगल्स वैक्सीन की जानकारी लें, जिन्हें पहले स्ट्रोकआ चुका है, वे दवाएं कभी न छोड़ें और नियमित फॉलो-अप कराते रहें।
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जब दिमाग तक खून पहुंचना बंद हो जाता है या दिमाग की किसी रक्त वाहिका से खून बहने लगता है तब स्ट्रोक आता है। इससे दिमाग की कोशिकाएं तेजी से नष्ट होने लगती हैं। अगर वक्त पर इलाज न मिले तो मरीज की मौत भी हो सकती है या शरीर का कोई हिस्सा हमेशा के लिए काम करना बंद कर सकता है।
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शिंगल्स के टीके से दिल और दिमाग की सुरक्षा
एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि शिंगल्स वैक्सीन लगवाने वाले लोगों में स्ट्रोक और दिल से जुड़ी गंभीर दिक्कतों का खतरा कम देखा गया। इस अध्ययन में करीब 5.5 लाख लोगों को शामिल किया गया। हालांकि, वैज्ञानिकों ने कहा कि यह शुरुआती अध्ययन है और इससे अभी यह साबित नहीं होता कि महज वैक्सीन ही जोखिम कम करती है। फिर भी विशेषज्ञों का कहना है कि 50 साल से या उससे अधिक उम्र के लोगों को शिंगल्स का टीका लगवाने की सलाह दी जाती है।
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दूसरी बार स्ट्रोक से बचा सकती है नई दवा असुंडेक्सियन
न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार असुंडेक्सियन नाम की नई दवा उन लोगों में दूसरी बार स्ट्रोक आने का खतरा कम कर सकती है, जिन्हें पहले इस्केमिक स्ट्रोक या ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (टीआईए) हो चुका है। यह दवा शरीर में खून के थक्के बनने की प्रक्रिया को कम करती है और दोबारा स्ट्रोक का जोखिम कम हो सकता है। हालांकि, यह दवा अभी सभी मरीजों के लिए नियमित इलाज का हिस्सा नहीं बनी है। इसका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाना चाहिए।
फल, सब्जियां व जैतून का तेल लेने वालों में स्ट्रोक का खतरा कम
न्यूरोलॉजी ओपन एक्सेस में प्रकाशित एक अध्ययन में 1.05 लाख से अधिक लोगों के खानपान का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि मेडिटेरेनियन डाइट अपनाने वाली महिलाओं में स्ट्रोक का खतरा कम था। इस डाइट में मुख्य रूप से ताजे फल और सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, मेवे और बीज, जैतून का तेल और ओमेगा-3 से भरपूर मछली शामिल हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह डाइट ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, खराब कोलेस्ट्रॉल और शरीर की सूजन को काबू करने में मदद करती है। इससे स्ट्रोक का खतरा कम होता है।
ब्लड प्रेशर व शुगर की नियमित जांच कराएं
विशेषज्ञों के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक की सबसे बड़ी वजह है। इसके अलावा डायबिटीज, धूम्रपान, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खानपान और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल भी स्ट्रोक का खतरा बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों ने सलाह है कि स्ट्रोक से बचने के लिए रोज फल और हरी सब्जियां खाएं, नमक और तली-भुनी चीजें कम करें। ब्लड प्रेशर और शुगर की नियमित जांच कराएं। धूम्रपान व तंबाकू से दूर रहें। रोज 30 मिनट व्यायाम करें। 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग डॉक्टर की सलाह पर शिंगल्स वैक्सीन की जानकारी लें, जिन्हें पहले स्ट्रोकआ चुका है, वे दवाएं कभी न छोड़ें और नियमित फॉलो-अप कराते रहें।