Gujarat: तीस्ता सीतलवाड़ की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई से अलग हुए हाईकोर्ट के जज, बोले- मेरे सामने नहीं..
तीस्ता सीतलवाड़ का नियमित जमानत का मामला जब जस्टिस समीर दवे के सामने आया तो उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा- मेरे सामने नहीं। हालांकि, उन्होंने इसके लिए कोई कारण भी नहीं बताया।
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गुजरात हाईकोर्ट के जज जस्टिस समीर दवे मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की नियमित जमानत पर सुनवाई से अलग हो गए। सीतलवाड़ पर 2002 के गुजरात दंगों के संबंध में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए कथित तौर पर सबूत गढ़ने के आरोप हैं।
मामला जब जस्टिस समीर दवे के सामने आया तो उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा- मेरे सामने नहीं। हालांकि, उन्होंने इसके लिए कोई कारण भी नहीं बताया। सीतलवाड़ को 2 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम जमानत दी गई थी। तब से वह बाहर हैं।
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आरबी श्रीकुमार, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी संजीव भट्ट और सामाजिक कार्यकर्ता सीतलवाड़ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गोधरा दंदों के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी (मौजूदा प्रधानमंत्री) और अन्य को एसआईटी द्वारा दी क्लीन चिट को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था।
सीतलवाड़ और श्रीकुमार को इसी साल 25 जुलाई को हिरासत में लिया गया था। सत्र अदालत ने 30 जुलाई को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट से सीतलवाड़ को अंतरिम जमानत मिल गई। बाद में हाईकोर्ट ने श्रीकुमार को भी अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया।
एक दिन पहले हाईकोर्ट की एक अन्य बेंच ने सत्र अदालत द्वारा श्रीकुमार की नियमित जमानत याचिका के निपटारे तक अंतरिम जमानत 10 दिन के लिए बढ़ा दी थी। सीतलवाड़ और दो पूर्व आईपीएस अफसरों के खिलाफ आईपीएस की धाराओं के तहत जालसाजी, झूठे सबूत देने या गढ़ने का मामला दर्ज किया गया था।