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Supreme Court: गुजरात पुलिस ने दाखिल किया हलफनामा, कहा- तीस्ता के खिलाफ केस काफी मजबूत, झूठे साक्ष्य गढ़े गए

Mon, 29 Aug 2022 10:29 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 29 Aug 2022 10:29 PM IST
सार

2002 के गुजरात दंगा मामले में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को मुकदमे में फंसाने के लिए दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ के आरोप में तीस्ता को गिरफ्तार किया गया है।

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Gujarat Police filed affidavit in supreme court said case against Teesta very strong
सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ पर देश विरोधी गतिविधि का लगा था आरोप - फोटो : Getty Images

विस्तार

गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि एनजीओ चलाने वाली तीस्ता सीतलवाड़ के खिलाफ केस काफी मजबूत है। राज्य पुलिस की एसआईटी ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि यह एक ऐसा मामला है जिसमें आपराधिक साजिश रचकर झूठे साक्ष्य गढ़े गए।
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सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे ने यह कहते हुए कि गवाहों ने कहा है कि उन्हें दंगा मामलों की जांच करने वाली एसआईटी के समक्ष पूर्व-टाइप, पूर्व-पुष्टि हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा गया था, राज्य सरकार ने कहा कि जांच 24 जून को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले से स्वतंत्र है। राज्य सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि एक राजनीतिक दल के एक वरिष्ठ नेता के इशारे पर साजिश रची गई थी।
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हलफलनामे में कहा गया है कि इसका उद्देश्य स्पष्ट रूप से कई लोगों को मृत्युदंड दिलाना था। इसके लिए मनगढ़ंत तरीके से मौखिक बयान और दस्तावेजी सुबूत बनाए गए। 2002 के गुजरात दंगा मामले में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को मुकदमे में फंसाने के लिए दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ के आरोप में तीस्ता को गिरफ्तार किया गया है।
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एसआईटी ने कहा, तीस्ता के खिलाफ चल रही जांच का सुप्रीम कोर्ट के 24 जून के फैसले से कोई लेना-देना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में गुजरात दंगों को लेकर एसआईटी रिपोर्ट पर हाईकोर्ट और सत्र अदालत के दृष्टिकोण से सहमति जताई थी और मोदी को आरोपों से बरी कर दिया था। 

एसआईटी ने कहा, जांच एजेंसी ने पर्याप्त सामग्री एकत्र की है, जिससे पता चलता है कि याचिकाकर्ता बहुत ज्यादा प्रभाव रखती है। इतना ही नहीं, अपने निजी हितों के लिए कई अन्य लोग उसकी सुरक्षा करते हैं। यह बात सामने आई है कि 2002 के बाद से तीस्ता ने अपनी हैसियत का इस्तेमाल गवाहों को प्रभावित करने में किया है। 


बता दें कि सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व डीजीपी आरबी श्रीकुमार पर गुजरात दंगों में निर्दोष लोगों को फंसाने का आरोप है। इन दोंने को इसी आरोप में जून में गिरफ्तार किया गया था और वह साबरमति सेंट्रल जेल में बंद हैं। श्रीकुमार ने भी जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। 
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