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समंदर में पैनी होगी भारत की नजर: नौसेना को मिलेंगे दो और MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन, क्या है इनकी खासियत?
Mon, 17 Aug 2026 10:56 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 17 Aug 2026 10:56 PM IST
सार
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ाने के लिए अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक्स एयरोनॉटिकल सिस्टम्स के साथ 1,943 करोड़ रुपये का करार किया है। इसके तहत दो MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन 30 महीने के लिए लीज पर लिए जाएंगे। नौसेना पहले से ऐसे दो ड्रोन संचालित कर रही है।
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भारतीय नौसेना की निगरानी क्षमता होगी और मजबूत
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को अमेरिकी रक्षा कंपनी जनरल एटॉमिक्स एयरोनॉटिकल सिस्टम्स के साथ भारतीय नौसेना के लिए दो MQ-9B सी गार्डियन हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) मानवरहित विमान लीज पर लेने के लिए 1,943 करोड़ रुपये का समझौता किया।
भारतीय नौसेना पहले से दो सी गार्डियन ड्रोन का संचालन कर रही है, जिन्हें कुछ साल पहले लीज पर लिया गया था। दो और MQ-9B सी गार्डियन को लीज पर लेने का फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब भारत अमेरिका के साथ करीब चार अरब डॉलर के सौदे के तहत 31 ऐसे ड्रोन की आपूर्ति का इंतजार कर रहा है।
क्या है एमक्यू-9बी सी गार्डियन की खासियत?
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसने रिमोट से संचालित इन विमानों के लिए जनरल एटॉमिक्स एयरोनॉटिकल सिस्टम्स के साथ 30 महीने की अवधि का अनुबंध किया है। मंत्रालय ने कहा, "अनुबंध की कीमत करीब 1,943 करोड़ रुपये है। इस पर रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक (अधिग्रहण) की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।"
भारतीय नौसेना को मिलेगा कैसा ड्रोन?
एमक्यू-9बी सी गार्डियन रिमोट से संचालित विमानों में आधुनिक प्रणालियां, अत्याधुनिक सेंसर और उन्नत पेलोड लगाए गए हैं। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ये विमान भारतीय नौसेना की समुद्री क्षेत्र में जागरूकता यानी मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस की क्षमता को काफी मजबूत करेंगे।
मंत्रालय ने कहा, "ये प्रणालियां समुद्री क्षेत्र के बड़े हिस्से में लगातार खुफिया, निगरानी और टोही कवरेज उपलब्ध कराएंगी। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में होने वाले घटनाक्रमों पर नजर रखने और प्रतिक्रिया देने की भारत की क्षमता मजबूत होगी।"
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग पर भी चर्चा
इससे जुड़े एक घटनाक्रम में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल के मुख्य कार्यकारी विवेक लाल से मुलाकात की। दोनों ने एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में भारत-अमेरिका सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। अमेरिकी राजदूत ने सोशल मीडिया पर कहा, "दूतावास में व्यस्त दिन! जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल के डॉ. विवेक लाल से मिलकर एयरोस्पेस, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में अमेरिका-भारत सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करके खुशी हुई। इसमें उन्नत तकनीकों और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में उनका काम भी शामिल है।"
अक्टूबर 2024 में भारत ने अमेरिका के साथ जनरल एटॉमिक्स से 31 लंबी अवधि तक उड़ान भरने वाले ड्रोन खरीदने का बड़ा सौदा किया था। विदेशी सैन्य बिक्री मार्ग के तहत हुए इस सौदे की कीमत करीब चार अरब डॉलर थी। इसका उद्देश्य भारतीय सेना की युद्धक क्षमता को बढ़ाना था। इन ड्रोन की खरीद को उस साल अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से कुछ सप्ताह पहले अंतिम रूप दिया गया था।
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भारतीय नौसेना पहले से दो सी गार्डियन ड्रोन का संचालन कर रही है, जिन्हें कुछ साल पहले लीज पर लिया गया था। दो और MQ-9B सी गार्डियन को लीज पर लेने का फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब भारत अमेरिका के साथ करीब चार अरब डॉलर के सौदे के तहत 31 ऐसे ड्रोन की आपूर्ति का इंतजार कर रहा है।
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क्या है एमक्यू-9बी सी गार्डियन की खासियत?
- ये ड्रोन 35 घंटे से अधिक समय तक हवा में रह सकते हैं।
- इनमें चार हेलफायर मिसाइल और करीब 450 किलोग्राम बम ले जाने की क्षमता है।
- सी गार्डियन ड्रोन का इस्तेमाल समुद्री निगरानी, पनडुब्बी रोधी युद्ध और ओवर-द-होराइजन टारगेटिंग समेत कई तरह के कार्यों के लिए किया जा सकता है।
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रक्षा मंत्रालय ने बताया कि उसने रिमोट से संचालित इन विमानों के लिए जनरल एटॉमिक्स एयरोनॉटिकल सिस्टम्स के साथ 30 महीने की अवधि का अनुबंध किया है। मंत्रालय ने कहा, "अनुबंध की कीमत करीब 1,943 करोड़ रुपये है। इस पर रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक (अधिग्रहण) की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।"
भारतीय नौसेना को मिलेगा कैसा ड्रोन?
एमक्यू-9बी सी गार्डियन रिमोट से संचालित विमानों में आधुनिक प्रणालियां, अत्याधुनिक सेंसर और उन्नत पेलोड लगाए गए हैं। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ये विमान भारतीय नौसेना की समुद्री क्षेत्र में जागरूकता यानी मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस की क्षमता को काफी मजबूत करेंगे।
मंत्रालय ने कहा, "ये प्रणालियां समुद्री क्षेत्र के बड़े हिस्से में लगातार खुफिया, निगरानी और टोही कवरेज उपलब्ध कराएंगी। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में होने वाले घटनाक्रमों पर नजर रखने और प्रतिक्रिया देने की भारत की क्षमता मजबूत होगी।"
भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग पर भी चर्चा
इससे जुड़े एक घटनाक्रम में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल के मुख्य कार्यकारी विवेक लाल से मुलाकात की। दोनों ने एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में भारत-अमेरिका सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। अमेरिकी राजदूत ने सोशल मीडिया पर कहा, "दूतावास में व्यस्त दिन! जनरल एटॉमिक्स ग्लोबल के डॉ. विवेक लाल से मिलकर एयरोस्पेस, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में अमेरिका-भारत सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करके खुशी हुई। इसमें उन्नत तकनीकों और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में उनका काम भी शामिल है।"
अक्टूबर 2024 में भारत ने अमेरिका के साथ जनरल एटॉमिक्स से 31 लंबी अवधि तक उड़ान भरने वाले ड्रोन खरीदने का बड़ा सौदा किया था। विदेशी सैन्य बिक्री मार्ग के तहत हुए इस सौदे की कीमत करीब चार अरब डॉलर थी। इसका उद्देश्य भारतीय सेना की युद्धक क्षमता को बढ़ाना था। इन ड्रोन की खरीद को उस साल अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से कुछ सप्ताह पहले अंतिम रूप दिया गया था।