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Mayawati: यूं ही नहीं मायावती निशाने पर ले रहीं नारायण साकार को! सियासी जमीन वापस पाने का यह है नया फॉर्मूला

Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Thu, 11 Jul 2024 02:37 PM IST
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सार
हाथरस में हुई बड़ी घटना के बाद कथावाचक नारायण साकार को मिली क्लीन चिट के साथ मायावती ने उन पर सीधा हमला शुरू कर दिया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जिन दलितों की मायावती खुद को नेता बताती हैं, वहीं दलित, पिछड़ों और अति पिछड़ों की बड़ी संख्या नारायण साकार की भक्त है।
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Hathras Incident BSP Mayawati Narayan Saakar Hari Political meaning Formula news and updates
बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाथरस में हुई बड़ी घटना के बाद बहुजन समाज पार्टी ऐसी पार्टी है, जो खुलकर कथावाचक नारायण साकार की गिरफ्तारी की मांग कर रही है। लगातार सोशल मीडिया पर बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती न सिर्फ नारायण साकार को निशाने पर ले रही हैं, बल्कि उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर एक बड़े वोट बैंक को भी साध रही हैं। सियासी गलियारों में चर्चाएं इस बात की हो रही हैं कि आखिर मायावती नारायण साकार के खिलाफ खुलकर इस कदर क्यों बोल रही हैं। वह भी तब जब कभी बहुजन समाज पार्टी की सरकार में नारायण साकार की तूती बोला करती थी। दरअसल राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती ने नारायण साकार पर हमला कर दलितों को एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। इस संदेश में बहुजन समाज पार्टी के रणनीतिकार अपना बड़ा सियासी फायदा भी देख रहे हैं।


हाथरस में हुई बड़ी घटना के बाद कथावाचक नारायण साकार को मिली क्लीन चिट के साथ मायावती ने उन पर सीधा हमला शुरू कर दिया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जिन दलितों की मायावती खुद को नेता बताती हैं, वहीं दलित, पिछड़ों और अति पिछड़ों की बड़ी संख्या नारायण साकार की भक्त है। फिर मायावती का यह हमला कितना सियासी रूप से कारगर है। राजनीतिक जानकार उपेंद्र सिंह कहते हैं कि दरअसल मायावती का अपना जो कोर वोट था वही खिसक चुका है। ऐसे में वह हाथरस में हुई घटना के बाद आक्रामक होकर नारायण साकार को निशाने पर लेने से उनका कुछ नुकसान नहीं है। तर्क देते हुए उपेंद्र कहते हैं कि दलित पिछड़े और अति पिछड़े की बड़ी संख्या नारायण साकार की भक्त है। अगर वह मायावती के नारायण साकार को निशाने पर लिए जाने से नाराज भी होती हैं, तो भी मायावती का कोई बड़ा नुकसान होता नहीं दिखता है। क्योंकि इस वर्ग का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही मायावती से दूर जा चुका है। ऐसे में बहुजन समाज पार्टी के रणनीतिकारों की उम्मीद यही है कि मायावती की अपील के साथ दलितों पिछड़ों और अतिपिछड़ों का एक बड़ा तबका उनके साथ जुड़ सकता है।




बहुजन समाज पार्टी से जुड़े रणनीतिकारों की मानें तो सियासी रूप से यह दांव मायावती के लिए कारगर नजर आ रहा है। यही वजह है कि मायावती खुलकर इस मामले में नारायण साकार को निशाने पर ले रही हैं। वरिष्ठ पत्रकार बृजेंद्र शुक्ला कहते हैं कि यह बात भी सही है कि हाथरस के पूरे घटनाक्रम पर जिस तरीके से सियासी दल चुप्पी साधे हैं, उसमें मायावती राजनीतिक तौर पर अपने लिए संजीवनी तलाश रहीं हैं। पार्टी से जुड़े नेताओं का मानना है कि अगर ऐसा करके पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड क्षेत्र में दलितों के बड़े वर्ग को अपनी ओर मोड़ा जा सकेगा, तो आने वाले चुनाव में उसका बड़ा फायदा भी दिखने वाला है। शुक्ल कहते हैं कि समझने वाली बात यही है कि बसपा की सरकार में नारायण साकार की तूती बोलती थी, लेकिन अब वही बसपा सुप्रीमो नारायण साकार को निशाने पर लेकर गिरफ्तारी की लगातार मांग कर रही हैं।

हालांकि बहुजन समाज पार्टी से जुड़े नेताओं का मानना है कि पार्टी सिर्फ हाथरस मामले से ही नहीं बल्कि अपने जनाधार को पाने के लिए जमीनी रूप से बड़ी मजबूत तैयारी कर रही हैं। इसके लिए बाकायदा पार्टी में अपने संघटनात्मक ढांचे को मजबूत करने की पूरी तैयारी शुरू कर दी है। दरअसल पार्टी के भीतर भी इस बात को लेकर मंथन हो रहा है कि जिस तरीके से उनके वोट बैंक में ससेंधमारी हो रही है। अगर ऐसा ही होता रहा, तो आने वाले दिनों में और बड़े सियासी संकट के दौर से पार्टी गुजर सकती है। पार्टी से जुड़े रहे एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ और कांग्रेस ने तो सेंधमारी की ही है, बल्कि पार्टी के लिए बड़ी चिंता लोकसभा सदस्य चंद्रशेखर भी बन रहे हैं। राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार ओपी मिश्र कहते हैं कि दलित राजनीति में जिस तरीके से बहुजन समाज पार्टी के सामने चुनौती आ रही है, वह निश्चित तौर पर बसपा सुप्रीमो के लिए चिंता की बात तो है। उनका मानना है कि बहुजन समाज पार्टी अगर अभी भी सधी हुई सियासी रणनीति का कुछ इस्तेमाल करती है, तो उसके अपने बचे हुए वोट बैंक को रोक सकती है। बहुजन समाज पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि उनकी पार्टी ने इसी आधार पर आगे की पूरी रणनीति बनाई है।
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