धान बोनस नीति: केंद्र-तमिलनाडु में टकराव गहराया, सीएम स्टालिन के दावे पर निर्मला सीतारमण ने किया पलटवार
केंद्र सरकार और तमिलनाडु के बीच धान बोनस नीति को लेकर टकराव बढ़ता जा रहा है। वित्त मंत्री मुख्यमंत्री स्टालिन के दावे को खारिज किया। उन्होंने कहा कि राज्यों के लिए एक सलाह थी, निर्देश नहीं था।
विस्तार
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सोमवार को कहा कि केंद्र ने राज्य से धान पर मौजूदा बोनस नीति की समीक्षा करने और इसे बंद करने पर विचार करने को कहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से पूछा है कि क्या वह इस संबंध में पत्र को सार्वजनिक करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, सीतारमण ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह आरोप कि केंद्र सरकार ने तमिलनाडु को धान की खेती के लिए प्रोत्साहन न देने का निर्देश दिया है, 'तथ्यात्मक रूप से निराधार, राजनीतिक रूप से प्रेरित और तमिलनाडु के किसानों को गुमराह करने के लिए जानबूझकर किया गया एक विकृत दावा है।'
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पत्र राज्यों के लिए एक सलाह थी, निर्देश नहीं
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में 9 जनवरी, 2026 के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि सभी राज्य मुख्य सचिवों को- न केवल तमिलनाडु को - यह सुझाव दिया गया था कि राज्य की बोनस नीतियों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाया जाए। इस पत्र में राज्यों से दालों, तिलहन और बाजरा को बढ़ावा देने के लिए अपनी बोनस नीति को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाने का आग्रह किया गया था, जो पोषण सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और टिकाऊ कृषि के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप हो। उन्होंने कहा, 'यह पत्र राज्यों के लिए एक सलाह थी, निर्देश नहीं।'
सीतारमण ने स्टालिन के हालिया भाषण पर भी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने राज्य सरकारों द्वारा दिए जाने वाले बोनस के संबंध में वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी एक पत्र का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के केंद्रीय सचिव द्वारा सभी राज्य मुख्य सचिवों को लिखा गया उक्त पत्र 'पोषण सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और टिकाऊ कृषि के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप दालों, तिलहन और बाजरा को बढ़ावा देने के लिए अपनी बोनस नीति को संरेखित करने' के लिए था।
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क्या आप वह पत्र सार्वजनिक करेंगी?
वित्त मंत्री को टैग करते हुए स्टालिन ने अपने पोस्ट में कहा, 'आपके मंत्रालय द्वारा तमिलनाडु के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि चूंकि धान पर दिए जाने वाले अतिरिक्त बोनस के कारण राज्य में बंपर उत्पादन हुआ है, इसलिए राज्य सरकार को बोनस बंद करने पर विचार करना चाहिए।' उन्होंने उस पत्र में लिखी बातों के अलावा कुछ भी नहीं कहा था। मुख्यमंत्री ने कहा, 'मुझे ऐसा करने की कोई जरूरत भी नहीं है।' उन्होंने आगे कहा, 'आपने अपने ट्वीट में कहा है कि धान किसानों को एमएसपी से अधिक बोनस देने का फैसला राज्य सरकारों पर निर्भर है और किसी ने भी ऐसे अधिकार नहीं छीने हैं। लेकिन हमें भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि हम राज्य सरकार की मौजूदा बोनस नीति की समीक्षा करें और धान पर बोनस बंद करने पर विचार करें। यदि आपका वर्तमान दावा सही है, तो क्या आप वह पत्र सार्वजनिक करेंगी?'
सीतारमण ने तर्क दिया कि यह पत्र राज्यों को अपनी कृषि नीतियों को व्यापक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालने और उनका पूरक बनने के उद्देश्य से लिखा गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाना राज्यों पर बोझ नहीं है; यह एक साझा जिम्मेदारी है जो किसानों, उपभोक्ताओं और पूरे देश के हित में है। उन्होंने आगे कहा, 'इसे थोपा हुआ बताना या इसके उद्देश्य को जानबूझकर गलत समझना तथ्य को तोड़-मरोड़ कर पेश करना है।'
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