फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   hunger strike lathi charges arrests yet AISA Neha did not yield said repression strengthened movement

23 दिन की भूख हड़ताल, लाठीचार्ज और गिरफ्तारियां: फिर भी नहीं झुकीं नेहा, बोलीं- दमन ने आंदोलन को और मजबूत किया

Sun, 02 Aug 2026 06:13 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 02 Aug 2026 06:13 PM IST
सार

23 दिन की भूख हड़ताल के बाद भी ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा छात्र आंदोलन को आगे बढ़ाने में सक्रिय हैं। उन्होंने 20 जुलाई को जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में छात्रों के घायल होने, गिरफ्तारियों और आंदोलन की चुनौतियों का जिक्र किया। पढ़िए इस इंटरव्यू में उन्होंने और क्या-क्या कहा?

विज्ञापन
hunger strike lathi charges arrests yet AISA Neha did not yield said repression strengthened movement
नेहाा बोरा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

23 दिन की भूख हड़ताल खत्म होने के कई दिन बाद भी ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष और जेएनयू की शोधार्थी नेहा बोरा का शरीर पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन के दौरान गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए छात्रों की रिहाई के लिए बिहार सहित कई राज्यों का दौरा किया। उनका कहना है कि पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर चला यह आंदोलन वर्षों से जारी छात्र संघर्ष का स्वाभाविक विस्तार है।

विज्ञापन


भूख हड़ताल के बाद कैसी है तबीयत?
नेहा बोरा ने बताया कि लंबे उपवास के कारण उनका पाचन तंत्र अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है। डॉक्टरों की सलाह पर वह मसालेदार भोजन और लाल मांस से परहेज कर रही हैं। उनका कहना है कि शरीर धीरे-धीरे सामान्य भोजन स्वीकार कर रहा है, लेकिन आंदोलन की जिम्मेदारियों के कारण उन्होंने आराम करने के बजाय छात्रों के बीच रहने को प्राथमिकता दी।
विज्ञापन


गिरफ्तार छात्रों के लिए बिहार क्यों पहुंचीं?
भूख हड़ताल समाप्त होने के तुरंत बाद वह बिहार पहुंचीं, जहां प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार छात्रों और घायलों से मुलाकात की। उन्होंने दावा किया कि 600 से अधिक छात्रों को हिरासत में लिया गया था और कई पर गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। उनका कहना है कि यदि छात्र संगठनों ने लगातार दबाव नहीं बनाया होता तो कई छात्रों की रिहाई संभव नहीं हो पाती।
विज्ञापन
विज्ञापन


20 जुलाई के प्रदर्शन में आखिर क्या हुआ था?
नेहा बोरा ने बताया कि स्वास्थ्य खराब होने के कारण वह मार्च में शामिल नहीं हो सकीं और मेडिकल टीम के साथ जंतर-मंतर पर ही रहीं। उनके अनुसार कुछ ही देर बाद आंसू गैस के गोले छोड़े गए और घायल छात्र लौटने लगे। उन्होंने दावा किया कि कई छात्रों के हाथ-पैर टूटे, गर्दन और सीने पर गंभीर चोटें आईं, जबकि कुछ लोगों को पेलेट लगने से आंखों की रोशनी तक प्रभावित हुई। उनका आरोप है कि बैरिकेडिंग और पुलिस कार्रवाई के कारण भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हुई, जिसमें बुजुर्ग और बच्चे भी फंस गए।

क्या पुलिस कार्रवाई से आंदोलन कमजोर पड़ा?
नेहा बोरा का कहना है कि पुलिस कार्रवाई से आंदोलन कमजोर होने के बजाय और मजबूत हुआ। उनके अनुसार बड़ी संख्या में छात्र घायल होने के बावजूद जंतर-मंतर पहुंचते रहे। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों के शरीर पर लगे जख्म आने वाली पीढ़ियों के लिए इस संघर्ष की गवाही देंगे।

क्या यह वामपंथी छात्र राजनीति की वापसी है?
नेहा बोरा ने इस धारणा को खारिज किया कि यह वामपंथी छात्र संगठनों की वापसी है। उनका कहना है कि AISA, SFI, AISF सहित कई संगठन वर्षों से शिक्षा, परीक्षा, फीस वृद्धि, यूजीसी, सीएए और किसानों जैसे मुद्दों पर लगातार संघर्ष करते रहे हैं। उनके अनुसार पेपर लीक आंदोलन भी उसी लंबे संघर्ष की अगली कड़ी है।

आंदोलन में वामपंथी संगठनों की क्या भूमिका रही?
बोरा के मुताबिक, आंदोलन में वामपंथी छात्र संगठनों ने केवल भीड़ जुटाने का काम नहीं किया, बल्कि पोस्टर, नारे, पुस्तकालय, सांस्कृतिक कार्यक्रम और राजनीतिक विमर्श के जरिए आंदोलन को दिशा दी। उनका दावा है कि युवाओं ने इन नारों और अभियानों को व्यापक समर्थन दिया और बड़ी संख्या में उनसे जुड़ते गए।


ये भी पढ़ें: TMC के फ्रीज खातों को लेकर SC में कल सुनवाई: ED की रोक को ममता ने दी है चुनौती; हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत

आगे की रणनीति क्या होगी?
नेहा बोरा का कहना है कि छात्र आंदोलनों को मजबूत बनाने के लिए सभी विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के बीच व्यापक एकजुटता जरूरी है। उनके अनुसार सड़क और चुनाव—दोनों स्तरों पर लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखना होगा, ताकि शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सके।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed