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42 साल के स्वर्णिम सफर का अंत: कौन हैं वायुसेना प्रमुख के पद से रिटायर हो रहे एपी सिंह, कैसा रहा कार्यकाल?

Sat, 31 Oct 2026 02:36 PM IST
अमन तिवारी स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: अमन तिवारी Updated Sat, 31 Oct 2026 02:36 PM IST
सार

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह 31 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं। जानिए उनके 42 साल के स्वर्णिम सफर, आत्मनिर्भर भारत के लिए उनकी पहल और ऑपरेशन सिंदूर में उनके नेतृत्व के बारे में।

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IAF Chief Amar Preet Singh Retirement Career Operation Sindoor Explainer
वायुसेना से रिटायर हुए एयर चीफ मार्शल एपी सिंह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय वायुसेना के लिए आज यानी कि 31 अक्तूबर 2026 एक अहम दिन है। देश के वर्तमान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह आज अपने पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। करीब चार दशक तक भारतीय वायुसेना में सेवाएं देने के बाद उनका सफर समाप्त हो रहा है। उनके कार्यकाल में भारतीय वायुसेना ने कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना किया। खासतौर पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका, वायुसेना की युद्धक तैयारियों पर उनका जोर और स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस को लेकर उनका अनुभव चर्चा में रहा।
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अमर प्रीत सिंह का कार्यकाल ऐसे समय में रहा, जब भारत की सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही थीं। एक तरफ पाकिस्तान के साथ तनाव और सीमा पार आतंकवाद की चुनौती थी, तो दूसरी तरफ चीन की सैन्य गतिविधियों को देखते हुए वायुसेना की क्षमता बढ़ाने की जरूरत थी। इसके अलावा आधुनिक युद्ध में ड्रोन, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और नेटवर्क आधारित युद्ध प्रणाली का महत्व भी तेजी से बढ़ा। ऐसे माहौल में उन्होंने वायुसेना की तैयारियों, आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी।
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उनके रिटायरमेंट के साथ ही भारतीय वायुसेना को नया प्रमुख मिलने जा रहा है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित 31 अक्तूबर को वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। ऐसे में सवाल है कि आखिर एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह कौन हैं, उनका सैन्य सफर कैसा रहा और वायुसेना प्रमुख के रूप में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियां क्या रहीं? आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।


कौन हैं एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह?

एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का जन्म 27 अक्टूबर 1964 को हुआ था। उन्होंने 1984 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) से प्रशिक्षण पूरा करने के बाद भारतीय वायुसेना की फाइटर पायलट स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया। दिसंबर 1984 में शुरू हुआ उनका सैन्य सफर करीब 42 वर्षों तक चला। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र भी हैं।

अमर प्रीत सिंह एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी हैं। उन्हें कई तरह के लड़ाकू और परिवहन विमानों को उड़ाने का अनुभव है। उनके नाम 5,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव दर्ज है। 
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IAF Chief Amar Preet Singh Retirement Career Operation Sindoor Explainer
वायुसेना प्रमुख एपी सिंह रिटायर हुए। - फोटो : अमर उजाला
अपने करियर के दौरान, उन्होंने एक ऑपरेशनल फाइटर स्क्वाड्रन और एक फ्रंटलाइन एयर बेस की कमान संभाली है। एक टेस्ट पायलट के रूप में, उन्होंने रूस के मॉस्को में 'मिग-29 अपग्रेड प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम' का नेतृत्व किया। वे नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर में प्रोजेक्ट डायरेक्टर (फ्लाइट टेस्ट) भी रहे और उन्हें 'लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (तेजस) की फ्लाइट टेस्टिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने साउथ वेस्टर्न एयर कमांड में 'एयर डिफेंस कमांडर' और ईस्टर्न एयर कमांड में 'सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर' जैसे महत्वपूर्ण स्टाफ पदों पर कार्य किया है। 'वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ' का पद संभालने से पहले, वे सेंट्रल एयर कमांड के 'एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ' भी थे।


तेजस लड़ाकू विमान के विकास में रही अहम भूमिका

एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह के सैन्य करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस के विकास और परीक्षण से जुड़ा अनुभव भी शामिल है। वह नेशनल फ्लाइट टेस्ट सेंटर में प्रोजेक्ट डायरेक्टर (फ्लाइट टेस्ट) के पद पर रहे। इस दौरान उन्हें लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस के फ्लाइट टेस्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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बता दें कि किसी भी लड़ाकू विमान को सेना में शामिल करने से पहले उसकी उड़ान क्षमता, तकनीकी प्रदर्शन, सुरक्षा और अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने की क्षमता का परीक्षण करना जरूरी होता है। इसमें टेस्ट पायलट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। अमर प्रीत सिंह ने इस जिम्मेदारी को निभाते हुए स्वदेशी विमान कार्यक्रम से नजदीकी रूप से काम किया।

तेजस भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इसका उद्देश्य लड़ाकू विमानों के मामले में विदेशी निर्भरता कम करना और देश में ही आधुनिक विमान विकसित करने की क्षमता तैयार करना है। वायुसेना प्रमुख के रूप में उन्होंने स्वदेशी रक्षा उपकरणों और आत्मनिर्भरता की जरूरत पर लगातार जोर दिया।


ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया वायुसेना का नेतृत्व

अमर प्रीत सिंह के कार्यकाल की चर्चा ऑपरेशन सिंदूर के बिना पूरी नहीं हो सकती। मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी। इस अभियान को ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया। इसमें भारतीय वायुसेना की भूमिका बेहद अहम रही।

IAF Chief Amar Preet Singh Retirement Career Operation Sindoor Explainer
वायुसेना प्रमुख एपी सिंह का करियर। - फोटो : अमर उजाला
इस अभियान के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। वायुसेना ने सटीक हमलों के जरिए आतंकवादी कैंपो को निशाना बनाया। ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायुसेना की भूमिका, उसकी तैयारी और आधुनिक हथियार प्रणालियों के इस्तेमाल को लेकर देश-दुनिया में चर्चा हुई।

इस अभियान के बाद अक्तूबर 2025 में वायुसेना दिवस के अवसर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा की थीं। उन्होंने कहा था कि अभियान में भारतीय वायुसेना ने अहम भूमिका निभाई और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के साथ कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी बताया था कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया और पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को भी नुकसान पहुंचाया। उनके मुताबिक, इस कार्रवाई में स्वदेशी तकनीक और हथियार प्रणालियों का भी प्रभावी इस्तेमाल किया गया।

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आधुनिक युद्ध और वायुसेना की तैयारियों पर दिया जोर

अमर प्रीत सिंह के कार्यकाल में भारतीय वायुसेना के सामने केवल पारंपरिक युद्ध की चुनौती नहीं थी। क्योंकि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब लड़ाकू विमानों के साथ-साथ ड्रोन, लंबी दूरी की मिसाइलें, रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की भूमिका भी बढ़ गई है।

पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों की सैन्य क्षमताओं को देखते हुए भारतीय वायुसेना के लिए अपनी तैयारियों को लगातार मजबूत करना जरूरी है। वायुसेना प्रमुख के तौर पर अमर प्रीत सिंह ने कई मौकों पर इस बात पर जोर दिया कि भविष्य का युद्ध पहले के युद्धों से अलग होगा। इसके लिए वायुसेना को नई तकनीक अपनाने, आधुनिक हथियारों को शामिल करने और जवानों को बदलती परिस्थितियों के मुताबिक प्रशिक्षित करने की जरूरत है।

उनके कार्यकाल में स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने और विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम करने का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने रहा। तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमानों के अलावा आधुनिक हथियार प्रणालियों और रक्षा तकनीक के विकास को उन्होंने जोर दिया।

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वायुसेना प्रमुख एपी सिंह रिटायर हुए। - फोटो : अमर उजाला

5,000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव, आखिरी उड़ान भी बनी यादगार

वायु सेना प्रमुख अमर प्रीत सिंह चार दशक से अधिक के करियर में उन्होंने 5,000 घंटे से ज्यादा समय तक आसमान में उड़ान भरी। उनके रिटायरमेंट से पहले उनकी आखिरी उड़ान भी काफी खास रही। 20 अक्टूबर 2026 को उन्होंने हैदराबाद के पास एचजेटी-16 किरण एमके-1 ट्रेनर विमान में अपनी अंतिम उड़ान भरी। इस दौरान उनके साथ उनके पहले फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर विंग कमांडर वीएस कोचर (रिटायर्ड) भी मौजूद थे। करीब 55 मिनट की इस उड़ान के साथ उनके विमान उड़ाने के सफर का एक भावुक अध्याय समाप्त हुआ।

इस उड़ान का खास महत्व इसलिए भी था, क्योंकि जिस प्रशिक्षक ने उनके शुरुआती दिनों में उन्हें विमान उड़ाना सिखाया था, उसी के साथ उन्होंने अपने उड़ान करियर की अंतिम उड़ान पूरी की। इससे पहले उन्होंने अक्टूबर 2026 में जोधपुर में आयोजित एक्सरसाइज तरंग शक्ति के दौरान स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान से भी उड़ान भरी थी। 

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इन सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं सेना अमर प्रीत सिंह?

भारतीय वायुसेना में उनके लंबे और महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें कई सैन्य सम्मान भी मिले हैं। उन्हें साल 2019 में अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और साल 2023 में परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) से सम्मानित किया गया। ये सम्मान उनकी विशिष्ट सेवाओं और सैन्य नेतृत्व में योगदान को दर्शाते हैं।


कौन संभालेंगे अब भारतीय वायुसेना की कमान?

अमर प्रीत सिंह की सेवानिवृत्ति के साथ ही भारतीय वायुसेना को नया प्रमुख मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायुसेना का अगला प्रमुख नियुक्त किया है। वह 31 अक्टूबर 2026 से वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।

आशुतोष दीक्षित अभी तक वायुसेना के उप प्रमुख के पद पर कार्यरत थे। उन्हें भी लड़ाकू विमानों और रक्षा तकनीक का व्यापक अनुभव है। वह एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं। उनके पास 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। उन्होंने मिराज-2000, मिग विमानों, जगुआर, तेजस और अन्य विमानों को उड़ाया है।

उनके सैन्य करियर में ऑपरेशन सफेद सागर और ऑपरेशन सिंदूर जैसे महत्वपूर्ण अभियानों से जुड़ा अनुभव भी शामिल है। वह सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी काम कर चुके हैं।
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